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राजस्थान पंचायत चुनाव पर संकट, ओबीसी रिपोर्ट अटकी

राजस्थान पंचायत चुनाव पर संकट, ओबीसी रिपोर्ट अटकी
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राजस्थान में आगामी पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य में पंचायती राज और नगरीय विकास विभाग की लापरवाही के कारण चुनाव प्रक्रिया में बड़ा अड़ंगा लग सकता है। दरअसल, पंचायतों और शहरी निकायों से जुड़ी अधूरी जानकारी दिए जाने के कारण ओबीसी आरक्षण को लेकर गठित आयोग की रिपोर्ट अटक गई है। इस देरी का सीधा असर चुनाव की तारीखों और पूरी चुनावी प्रक्रिया पर पड़ने की संभावना है।

विभागों की लापरवाही से बढ़ी मुश्किलें

जानकारी के अनुसार, ओबीसी आयोग को अब तक वार्डों और अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (SC/ST) के आरक्षित वार्डों की पूरी जानकारी नहीं मिल पाई है। यह डेटा पंचायती राज और नगरीय विकास विभागों को उपलब्ध कराना था। आयोग ने कई बार इन विभागों से संपर्क किया और डेटा की मांग की, लेकिन हर बार अधूरी जानकारी ही हाथ लगी। जब तक आयोग के पास वार्डों का पूरा विवरण नहीं होगा, तब तक वह अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप नहीं दे पाएगा।

चुनाव कार्यक्रम पर पड़ेगा सीधा असर

पहले यह उम्मीद जताई जा रही थी कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट 31 जनवरी तक आ जाएगी और राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग भी इसी समय सीमा को ध्यान में रखकर अपनी तैयारियां कर रहा था। लेकिन अब जनवरी का महीना बीतने को है और रिपोर्ट आने की संभावना लगभग खत्म हो गई है और रिपोर्ट में देरी होने का मतलब है कि आरक्षण की स्थिति स्पष्ट नहीं होगी, और बिना इसके चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करना संभव नहीं है।

आयोग को डेटा का इंतजार

ओबीसी आरक्षण आयोग का कहना है कि पूरी जानकारी मिलने के बाद ही रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जा सकेगा। वार्डों के परिसीमन और आरक्षण की स्थिति को समझने के लिए सटीक डेटा अनिवार्य है। विभागों की ओर से हो रही इस देरी ने न केवल आयोग के काम को रोका है, बल्कि उन हजारों उम्मीदवारों को भी असमंजस में डाल दिया है जो चुनाव की तैयारी कर रहे थे। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले में कितनी जल्दी हस्तक्षेप करती है और डेटा कब तक उपलब्ध कराया जाता है।

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