Special Intensive Revision: राजस्थान में SIR मुद्दे पर घमासान: कांग्रेस MLA ने BJP पर लगाए गंभीर आरोप, FIR की मांग
Special Intensive Revision - राजस्थान में SIR मुद्दे पर घमासान: कांग्रेस MLA ने BJP पर लगाए गंभीर आरोप, FIR की मांग
राजस्थान में मतदाता सूची (SIR) से नाम हटाने के मुद्दे पर राजनीतिक गलियारों में भारी घमासान मचा हुआ है। आदर्श नगर से कांग्रेस विधायक और सचेतक रफीक़ ख़ान ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी के बूथ लेवल एजेंट (BLA) को साथ लाकर दावा किया कि मतदाताओं के नाम। फर्जी दस्तावेज़ों और जाली हस्ताक्षरों के आधार पर कटवाए जा रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए एक गंभीर खतरा है।
मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप
रफीक़ ख़ान ने आरोप लगाया कि बीजेपी के लोग पहले अपनी इच्छा से मतदाताओं के नाम नहीं कटवा सके, लेकिन अब एक विशेष अभियान चलाकर मतदाताओं के नाम कटवाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह एक योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा प्रयास है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची में गड़बड़ी फैलाना और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करना है और ख़ान ने इस पूरी प्रक्रिया को लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ बताया और कहा कि यह मतदाताओं के अधिकारों का हनन है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे कृत्यों से चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं और जनता का विश्वास कमजोर होता है।फर्जीवाड़े का खुलासा और BLA का इंकार
कांग्रेस विधायक ने दावा किया कि जिन इलाक़ों में बीजेपी के लोग जीवन में कभी गए तक नहीं, उन क्षेत्रों के मतदाताओं के नाम कटवाने के लिए आवेदन कर दिए गए हैं। उन्होंने इसे एक बेहद गंभीर मामला बताया, क्योंकि जिन क्षेत्रों की जानकारी तक संबंधित लोगों को नहीं है, वहां के मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया में दखल देना लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है और रफीक़ ख़ान ने आरोप लगाया कि एक BLA द्वारा 100 से 600 तक मतदाताओं के नाम कटवाने के लिए फॉर्म जमा कराए गए हैं, जो इस बात की ओर इशारा करता है कि बड़े पैमाने पर नाम कटवाने का अभियान चलाया जा रहा है। अपनी बात रखने के दौरान रफीक़ ख़ान बीजेपी के BLA नईमुद्दीन और साबिर अली को भी साथ लेकर आए। दोनों BLA ने मीडिया के सामने कहा कि उन्होंने नाम कटवाने के लिए कोई फॉर्म नहीं भरा, लेकिन किसी अन्य व्यक्ति ने उनके नाम से साइन करके फॉर्म जमा कर दिए। उन्होंने दावा किया कि उनके नाम का गलत इस्तेमाल कर मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया में उन्हें फंसाने की कोशिश की गई है। इस दौरान रफीक़ ख़ान ने कहा कि गलत तरीके से SIR में नाम कटवाने के लिए आवेदन। दिए जा रहे हैं और BLA के फर्जी साइन से फॉर्म भरने वालों पर FIR दर्ज होनी चाहिए।विपक्षी जनप्रतिनिधियों और सामाजिक वर्गों को निशाना बनाने का आरोप
कांग्रेस विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पार्षद अकबर ख़ान का नाम कटवाने का आवेदन दे दिया है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल आम मतदाताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि विपक्ष के जनप्रतिनिधियों और सामाजिक रूप से प्रभावशाली लोगों को भी निशाना बनाया जा रहा है। रफीक़ ख़ान ने आरोप लगाया कि महावत बिरादरी के मुखिया का नाम भी कटवाने की कोशिश की जा रही है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सामाजिक वर्गों को भी इस प्रक्रिया में टारगेट किया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि यह एक विशेष समुदाय या राजनीतिक विचारधारा से जुड़े लोगों को मतदाता सूची से बाहर करने का प्रयास हो सकता है, जो चुनावी निष्पक्षता के लिए घातक है।निर्वाचन आयोग पर सवाल और कोर्ट जाने की चेतावनी
रफीक़ ख़ान ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने फर्जी दस्तावेज़ और फर्जी हस्ताक्षर के आधार पर नाम कटवाने के आवेदन। दिए हैं, उनके खिलाफ तुरंत FIR दर्ज की जाए और दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे कृत्यों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और कानून का उल्लंघन करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और यह मांग चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखने और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
रफीक़ ख़ान ने निर्वाचन आयोग पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां सामने आने के बावजूद यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती है, तो यह निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है और रफीक़ ख़ान ने चेतावनी देते हुए कहा कि “ज़रूरत पड़ी तो हम निर्वाचन आयोग के खिलाफ कोर्ट भी जाएंगे। ” उन्होंने निर्वाचन आयोग पर पूर्वाग्रह से ग्रसित होने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो कांग्रेस कानूनी रास्ता अपनाएगी और न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नहीं है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र। की नींव को कमजोर करने का प्रयास है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।