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राजस्थान पंचायत चुनाव: हाई कोर्ट का 31 जुलाई तक चुनाव कराने का आदेश, गरमाई सियासत

राजस्थान पंचायत चुनाव: हाई कोर्ट का 31 जुलाई तक चुनाव कराने का आदेश, गरमाई सियासत
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राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर चल रहा लंबा इंतजार अब खत्म होता नजर आ रहा है। राजस्थान हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव 31 जुलाई तक हर हाल में संपन्न कराए जाएं। अदालत ने इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए ओबीसी आयोग को भी कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि ओबीसी आयोग अपनी रिपोर्ट 20 जून तक अनिवार्य रूप से सौंप दे। गौरतलब है कि अदालत ने पिछले साल नवंबर में राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव करवाने का निर्देश दिया था, लेकिन सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए चुनाव कराने से हाथ पीछे खींच लिए थे। अब कोर्ट के इस ताजा फैसले के बाद राजस्थान की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

सरकार का रुख और ओबीसी आयोग की भूमिका

हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद सरकार की ओर से प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि अभी उन्हें हाई कोर्ट के आदेश की आधिकारिक कॉपी प्राप्त नहीं हुई है और उन्होंने स्पष्ट किया कि जैसे ही आदेश की कॉपी मिलेगी, उसका विस्तार से कानूनी अध्ययन किया जाएगा और उसी के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा। पटेल ने यह भी रेखांकित किया कि हाई कोर्ट ने ओबीसी कमीशन को 20 जून तक रिपोर्ट देने को कहा है, लेकिन चुनाव की वास्तविक समयसीमा इस बात पर निर्भर करती है कि कमीशन अपनी रिपोर्ट कब तक पेश करता है। उन्होंने कहा कि जैसे ही कमीशन की रिपोर्ट आएगी, सरकार उस हिसाब से आगे की चुनावी प्रक्रिया शुरू करेगी।

इसी मामले पर पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि फिलहाल कोर्ट के फैसले का अध्ययन किया जाएगा और उसके बाद ही किसी ठोस नतीजे पर पहुंचा जा सकता है। सरकार का पूरा ध्यान अभी ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और कोर्ट के कानूनी पहलुओं को समझने पर टिका हुआ है।

विपक्ष के आरोप और सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी

दूसरी ओर, विपक्ष ने कोर्ट के इस फैसले का पुरजोर स्वागत किया है, लेकिन साथ ही सरकार की मंशा पर सवाल भी उठाए हैं। राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि सरकार 31 जुलाई तक भी चुनाव नहीं कराएगी। डोटासरा ने आरोप लगाया कि जब से यह सरकार सत्ता में आई है, तब से पंचायती राज और नगरीय निकायों में चुने हुए जनप्रतिनिधियों के अधिकारों को खत्म किया जा रहा है और उन्होंने कहा कि सरकार संविधान की व्यवस्थाओं का उल्लंघन कर रही है और अपनी मनमर्जी से प्रशासक लगाकर सत्ता का दुरुपयोग कर रही है, जिससे स्थानीय सरकारें अब ब्यूरोक्रेट्स के हाथों में चली गई हैं।

डोटासरा ने आगे कहा कि कोर्ट ने पहले भी 15 अप्रैल तक चुनाव कराने का आदेश दिया था, लेकिन सरकार बनने के डेढ़ साल बाद भी ओबीसी आयोग का गठन सही ढंग से नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सर्वे होने के बावजूद उसे 12 महीने तक जानबूझकर रोका गया। डोटासरा ने चेतावनी दी कि अगर सरकार समय पर चुनाव नहीं कराती है, तो कांग्रेस पार्टी इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी।

कांग्रेस की जीत और भाजपा की घेराबंदी

कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने भी कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस पार्टी के निरंतर संघर्ष की जीत है। जूली के अनुसार, प्रदेश में नगर निकाय और पंचायत राज चुनाव समय पर नहीं कराने के पीछे भाजपा की बदनीयत छिपी हुई थी, जिसे कांग्रेस ने हर स्तर पर बेनकाब करने का काम किया है। अब जबकि 20 जून की तारीख ओबीसी आयोग के लिए और 31 जुलाई की तारीख चुनावों के लिए तय की गई है, राजस्थान की सियासत में आने वाले दिन काफी गहमागहमी भरे रहने वाले हैं।

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