मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में रविवार की सुबह एक बहुत बड़ा रेल हादसा होने से बाल-बाल बच गया। त्रिवेंद्रम (तिरुवनंतपुरम) से चलकर देश की राजधानी दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्टेशन को जाने वाली गाड़ी संख्या 12431 राजधानी एक्सप्रेस में अचानक भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे के कारण दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पूरी तरह से ठप हो गया है और इस रूट पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर चलने वाली कई प्रमुख ट्रेनों के पहिए जहां-तहां थम गए हैं। मुंबई-जयपुर सुपरफास्ट (12955) जैसी कई महत्वपूर्ण ट्रेनों को बीच के स्टेशनों पर ही रोकना पड़ा है। सबसे राहत की बात यह रही कि समय रहते कोच में सवार सभी 68 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
हादसे का समय और स्थान
रेलवे से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, यह भीषण हादसा रविवार 17 मई 2026 की सुबह करीब 05:15 बजे हुआ। यह घटना नागदा-कोटा रेल खंड पर स्थित लूणी रीछा और विक्रमगढ़ आलोट स्टेशनों के बीच किलोमीटर 729/02 पर घटित हुई। जिस समय यह हादसा हुआ, ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार से दिल्ली की ओर बढ़ रही थी। तभी अचानक एसी कोच बी-1 (B-1) में एसएलआर (SLR) के पास से आग की ऊंची और डरावनी लपटें उठती हुई दिखाई दीं। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरी बोगी धुएं के गुबार से भर गई।
शॉर्ट सर्किट बना आग का कारण
शुरुआती जांच और कोटा रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) से मिली जानकारी के अनुसार, आग लगने की प्राथमिक वजह शॉर्ट सर्किट (Short Circuit) मानी जा रही है। आग इतनी तेजी से फैली कि उसने ट्रेन के दो डिब्बों को अपनी चपेट में ले लिया। सुबह का समय होने के कारण अधिकांश यात्री गहरी नींद में सो रहे थे। जैसे ही बोगियों के भीतर धुआं भरा और ट्रेन के सेफ्टी हूटर बजने लगे, यात्रियों के बीच भारी दहशत और अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
रेलवे स्टाफ की सूझबूझ ने टाला बड़ा हादसा
हादसे के वक्त ट्रेन मैनेजर और गार्ड ने अद्भुत साहस और मुस्तैदी का परिचय दिया। बी-1 कोच से लपटें उठती देख गार्ड ने बिना देरी किए लोको पायलट (ड्राइवर) को वायरलेस के जरिए इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही ड्राइवर ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को तुरंत रोक दिया। इसके बाद रेल प्रशासन तत्काल एक्शन मोड में आ गया। आग को पूरी ट्रेन में फैलने से रोकने के लिए प्रभावित बी-1 कोच और उसके साथ लगी बोगी को मुख्य ट्रेन से काटकर तुरंत अलग किया गया। इसके साथ ही दुर्घटनास्थल पर ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) की बिजली सप्लाई को भी बंद कर दिया गया ताकि राहत कार्य में कोई बाधा न आए। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
यात्रियों की सुरक्षा और आगे की व्यवस्था
रेलवे ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि की है कि इस घटना में कोई भी यात्री हताहत नहीं हुआ है। प्रभावित कोच के सभी 68 यात्रियों को सुरक्षित निकालकर ट्रैक के किनारे लाया गया। रेलवे की ओर से उन्हें तत्काल जलपान, पानी और प्राथमिक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। रेलवे स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मौके पर पहुंच गई थी। यात्रियों की आगे की यात्रा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें फिलहाल ट्रेन के अन्य कोचों में ही समायोजित (Adjust) किया गया है और यह ट्रेन इन यात्रियों को लेकर कोटा तक जाएगी, जहां कोटा स्टेशन पर ट्रेन में एक अतिरिक्त नया कोच जोड़ा जाएगा। इसके बाद सभी यात्री अपनी आवंटित बर्थ पर आरामदायक सफर कर सकेंगे।
अधिकारियों का दौरा और जांच के आदेश
चूंकि यह घटनास्थल राजस्थान के कोटा रेल मंडल के अंतर्गत आता है, इसलिए कोटा से वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय टीम तुरंत मौके के लिए रवाना हो गई। रतलाम मुख्यालय पास होने के कारण रतलाम रेल मंडल के डीआरएम अश्वनी कुमार भी घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। रतलाम कंट्रोल को सुबह 5:20 बजे सूचना मिलते ही एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन (ART/ARME) और टावर वैगन को रवाना कर दिया गया था। पश्चिम मध्य रेल जोन के CPRO हर्षित श्रीवास्तव ने बताया कि यात्रियों को सुरक्षित डिबोर्ड करा लिया गया है और प्रभावित कोचों को अलग कर सुरक्षित स्थान पर खड़ा किया गया है। रेलवे ने यात्रियों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 139 जारी किया है, जिस पर संपर्क कर जानकारी प्राप्त की जा सकती है। फिलहाल ट्रैक को पूरी तरह सुचारू करने का काम युद्धस्तर पर जारी है।