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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का जर्मनी में संबोधन: डिफेंस इन्वेस्टर समिट 2026 में निवेश का आह्वान

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का जर्मनी में संबोधन: डिफेंस इन्वेस्टर समिट 2026 में निवेश का आह्वान
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित 'डिफेंस इन्वेस्टर समिट 2026' (Defence Investor Summit 2026) के दौरान भारतीय रक्षा क्षेत्र में निवेश के अपार और व्यापक अवसरों पर विशेष जोर दिया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन 23 अप्रैल को म्यूनिख के प्रसिद्ध 'Bayerischer Hof' में किया गया, जहाँ रक्षा मंत्री ने भारतीय और जर्मन रक्षा उद्योग से जुड़े प्रमुख नेताओं और हितधारकों को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान, उन्होंने भारत को एक उभरते हुए वैश्विक रक्षा विनिर्माण हब के रूप में प्रस्तुत किया और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को भारत की विकास यात्रा में भागीदार बनने के लिए आमंत्रित किया।

डिफेंस इन्वेस्टर समिट 2026 और द्विपक्षीय सहयोग

म्यूनिख के Bayerischer Hof में आयोजित इस समिट में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत और जर्मनी के बीच रक्षा संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में वर्तमान में किए जा रहे रक्षा सुधार और 'आत्मनिर्भरता' की दिशा में उठाए गए ठोस कदमों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अत्यंत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। राजनाथ सिंह ने दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और अधिक प्रगाढ़ करने पर बल दिया और विशेष रूप से एडवांस और विशिष्ट तकनीकों के क्षेत्र में को-डेवलपमेंट (सह-विकास) और को-प्रोडक्शन (सह-उत्पादन) को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

वैश्विक स्थिरता और सुरक्षा पर प्रभाव

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में इस बात को रेखांकित किया कि भारत और जर्मनी का रक्षा क्षेत्र में एक साथ मिलकर काम करना न केवल दोनों राष्ट्रों की सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा, बल्कि इससे वैश्विक स्थिरता को भी व्यापक बढ़ावा मिलेगा और उन्होंने संकेत दिया कि भारत विदेशी निवेश और तकनीकी साझेदारी के लिए पूरी तरह तैयार है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहाँ आधुनिक तकनीक, नवाचार और उच्च-स्तरीय विशेषज्ञता की आवश्यकता है, भारत वैश्विक भागीदारों के साथ मिलकर काम करने का इच्छुक है।

डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भारत की प्रगति

भारत ने इस समिट के माध्यम से खुद को एक सशक्त रक्षा मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में पेश किया है। रक्षा मंत्री ने बताया कि भारत लगातार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

रक्षा आयात में कमी और भविष्य की रणनीति

रक्षा मंत्री ने जानकारी दी कि भारत धीरे-धीरे अपने रक्षा आयात को कम करने की दिशा में निर्णायक कदम उठा रहा है। राजनाथ सिंह का यह जर्मनी दौरा मुख्य रूप से भारत में रक्षा निवेश को आकर्षित करने और बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है। इस पहल से न केवल भारत के घरेलू रक्षा उद्योग को एक बड़ा बूस्ट मिलेगा, बल्कि यह वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका को भी मजबूत करेगा। समिट में उन्होंने वैश्विक कंपनियों को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण और अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

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