Rare Earth Magnets: रेयर अर्थ मेटल्स पर चीन की बादशाहत खत्म, जापान ने समंदर में खोजा 'खजाना', ड्रैगन की उड़ी नींद!

Rare Earth Magnets - रेयर अर्थ मेटल्स पर चीन की बादशाहत खत्म, जापान ने समंदर में खोजा 'खजाना', ड्रैगन की उड़ी नींद!
| Updated on: 12-Jan-2026 06:00 PM IST
रेयर अर्थ मेटल्स (दुर्लभ पृथ्वी धातु) आधुनिक तकनीक और युद्ध प्रणालियों की रीढ़ हैं, और इन पर अब तक चीन का एकतरफा कब्जा रहा है। यह एकाधिकार अब टूटने की कगार पर है, क्योंकि भारत के एक महत्वपूर्ण सहयोगी जापान ने चीन की मनमानी को चुनौती देने के लिए एक अभूतपूर्व समुद्री मिशन शुरू किया है। इस मिशन का उद्देश्य समुद्र की गहराइयों से उन बेशकीमती खनिजों को निकालना है, जिनके लिए दुनिया अब तक चीन पर अत्यधिक निर्भर थी। यह पहल 2025 में चीन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बाद जापान की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक कदम है, जिसने बीजिंग में खलबली मचा दी है। जापान का यह विशाल जहाज समुद्र का सीना चीरकर उन दुर्लभ धातुओं को निकालने के लिए रवाना हो चुका है, जो स्मार्टफोन से लेकर मिसाइल सिस्टम तक हर चीज के लिए आवश्यक हैं।

जापान का ऐतिहासिक समुद्री मिशन: 'चिक्यू' की यात्रा

न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, जापान का अत्याधुनिक टेस्ट वेसल 'चिक्यू' (Chikyu) टोक्यो से लगभग 1,900 किलोमीटर दूर स्थित मिनमिटोरी द्वीप की ओर तेजी से बढ़ रहा है और यह जहाज एक अत्यंत जटिल और महत्वाकांक्षी मिशन पर है, जिसका मुख्य लक्ष्य समुद्र की सतह से 6 किलोमीटर (यानी लगभग 4 मील) नीचे जाकर, वहां मौजूद कीचड़ को सफलतापूर्वक सतह पर लाना है। वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्र तल के इस कीचड़ में दुर्लभ धातुओं का एक विशाल और अप्रयुक्त भंडार छिपा हुआ है। यह दुनिया में पहली बार होगा जब इतनी असाधारण गहराई से लगातार कीचड़ निकालकर उसकी वैज्ञानिक जांच की जाएगी और इस मिशन पर 'चिक्यू' जहाज पर 130 लोगों की एक समर्पित टीम मौजूद है, जिसमें अनुभवी क्रू सदस्य और शीर्ष शोधकर्ता शामिल हैं। यह टीम 14 फरवरी तक अपने मिशन को पूरा करके वापस लौटने की उम्मीद है, और इसकी सफलता वैश्विक प्रौद्योगिकी परिदृश्य को हमेशा के लिए बदल सकती है।

रेयर अर्थ मेटल्स का महत्व और चीन का एकाधिकार

आज हम जिन स्मार्टफोन का उपयोग करते हैं, जिन इलेक्ट्रिक कारों का सपना देख रहे हैं, और देश की सुरक्षा के लिए जिन उन्नत मिसाइल प्रणालियों को तैनात किया जाता है, उन सभी के निर्माण में रेयर अर्थ मेटल्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ये धातुएं आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों और रक्षा उद्योगों के लिए अपरिहार्य हैं। अब तक, जापान और पश्चिमी देशों सहित दुनिया के अधिकांश देश इन महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति के लिए चीन पर पूरी तरह निर्भर थे। चीन ने अपनी इस रणनीतिक स्थिति का लाभ उठाते हुए, विभिन्न भू-राजनीतिक और राजनयिक। विवादों के बीच इन आवश्यक खनिजों के निर्यात पर कई तरह की पाबंदियां लगाई हैं। चीन की इस 'ब्लैकमेलिंग' रणनीति से बचने और अपनी तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने के लिए जापान अब आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा कदम बढ़ा रहा है। यदि यह समुद्री खनन मिशन सफल होता है, तो यह प्रौद्योगिकी क्षेत्र में चीन की दादागिरी को स्थायी रूप से समाप्त कर सकता है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक लचीला बना सकता है।

सात साल की तैयारी और माउंट फूजी की गवाही

रिपोर्ट के अनुसार, जापान सरकार पिछले सात सालों से इस महत्वाकांक्षी परियोजना की गहन तैयारी कर रही थी। यह एक दीर्घकालिक रणनीति का परिणाम है, जिसमें तकनीकी चुनौतियों और वित्तीय निवेश दोनों को शामिल किया गया था और सरकार समर्थित इस परियोजना के प्रमुख, शोइची इशी ने बताया कि 'चिक्यू' के शिजुओका पोर्ट से रवाना होने का पल उनके लिए बेहद भावुक करने वाला था। उन्होंने बताया कि जहाज के प्रस्थान के समय, पृष्ठभूमि में बर्फ से ढका माउंट फूजी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था, जो इस ऐतिहासिक क्षण को और भी यादगार बना रहा था। शोइची इशी का दृढ़ विश्वास है कि समुद्र तल से 6 किलोमीटर नीचे से संसाधनों को सफलतापूर्वक निकालना तकनीकी रूप से एक बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। यह सफलता न केवल जापान के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए संसाधन खरीद के तरीकों को पूरी तरह से बदल। कर रख देगी, जिससे भविष्य में अन्य देशों को भी गहरे समुद्र में खनन की संभावनाओं का पता लगाने की प्रेरणा मिलेगी।

ड्रैगन पर जापान का पलटवार और भविष्य की संभावनाएं

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि जापान का यह मिशन ऐसे समय में आया है जब चीन ने हाल ही में जापान की सेना और नागरिक उपयोग वाले 'डुअल-यूज' सामानों के साथ-साथ कुछ विशिष्ट खनिजों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया है। जापानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन इन प्रतिबंधों को और अधिक व्यापक बनाने पर विचार कर रहा है, जिससे जापान की अर्थव्यवस्था और तकनीकी उद्योगों पर और दबाव पड़ सकता है। ऐसे में, जापान का यह गहरा समुद्री खनन मिशन चीन की आक्रामक व्यापार नीतियों के खिलाफ एक सीधा और प्रभावी पलटवार है। यदि 'चिक्यू' मिशन सफल होता है, तो यह जापान को रेयर अर्थ मेटल्स के लिए चीन पर अपनी निर्भरता कम करने में मदद करेगा, जिससे उसे अपनी तकनीकी और औद्योगिक स्वायत्तता बनाए रखने में मदद मिलेगी। यह वैश्विक भू-राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है, जहां दुर्लभ संसाधनों पर चीन का एकाधिकार कमजोर होगा और अन्य देशों को भी अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने के लिए नए रास्ते तलाशने की प्रेरणा मिलेगी और यह मिशन न केवल जापान के लिए बल्कि उन सभी देशों के लिए आशा की किरण है जो चीन के रणनीतिक नियंत्रण से मुक्त होना चाहते हैं।

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