रिलायंस की बिस्किट बाजार में धमाकेदार एंट्री, जानिए क्या है नया मास्टरप्लान

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रिलायंस की बिस्किट बाजार में धमाकेदार एंट्री, जानिए क्या है नया मास्टरप्लान
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भारत के प्रतिस्पर्धी और विशाल बिस्किट बाजार में अब एक नई और रोमांचक जंग शुरू होने जा रही है। टेलीकॉम सेक्टर में जियो और सॉफ्ट ड्रिंक बाजार में कैंपा के जरिए स्थापित कंपनियों को कड़ी चुनौती दे चुके मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज अब देश के बिस्किट कारोबार में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार है। रिलायंस की एफएमसीजी कंपनी रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड यानी आरसीपीएल ने अपने लोकप्रिय इंडिपेंडेंस ब्रांड के तहत बिस्किट की एक बिल्कुल नई रेंज पेश कर दी है और कंपनी ने बाजार में उतरते ही एक साथ नौ वैरिएंट और अट्ठाइस एसकेयू लॉन्च किए हैं। इन उत्पादों की शुरुआती कीमत मात्र पांच रुपये रखी गई है, जिससे आम उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर आकर्षित किया जा सके। हालांकि, इस बेहद प्रतिस्पर्धी बाजार में रिलायंस की राह बिल्कुल आसान नहीं होने वाली है क्योंकि यहां पहले से ही ब्रिटानिया, पार्ले और आईटीसी जैसी दिग्गज कंपनियों का मजबूत और दशकों पुराना दबदबा कायम है, खासकर पार्ले जी और ब्रिटानिया जैसे नाम भारतीय घरों की पहचान बन चुके हैं।

भारत में बिस्किट केवल एक साधारण स्नैक नहीं है, बल्कि यह हर घर की रोजमर्रा की खपत का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। सुबह की चाय के साथ हो या फिर बच्चों के स्कूल टिफिन की बात हो, बिस्किट की मांग समाज के हर वर्ग और उम्र के लोगों में लगातार बनी रहती है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की जनवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, टेक्नोपैक रिसर्च के आंकड़ों पर आधारित भारत का कुल बिस्किट बाजार वित्त वर्ष 2024 में लगभग 55100 करोड़ रुपये का था। इसके अलावा यह भी अनुमान लगाया गया है कि यह विशाल बाजार वित्त वर्ष 2029 तक तेजी से बढ़कर 90300 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर जाएगा। इसका मतलब साफ है कि इस सेक्टर में सालाना करीब 10 प्रतिशत से ज्यादा की मजबूत ग्रोथ की पूरी संभावना बनी हुई है। इस बाजार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी पहले से ही ब्रांडेड बिस्किट के पास है। इसका सीधा अर्थ यह है कि रिलायंस के लिए बाजार में केवल नए ग्राहकों को जोड़ना ही काफी नहीं होगा, बल्कि उसे मौजूदा ग्राहकों को अन्य स्थापित ब्रांड्स से खींचकर अपनी तरफ लाना होगा।

देश के बिस्किट बाजार में पहले से ही कई बड़ी और स्थापित कंपनियां अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराए हुए हैं। इनमें ब्रिटानिया और पार्ले सबसे बड़े और मजबूत खिलाड़ी के रूप में जाने जाते हैं। मोतीलाल ओसवाल की वित्त वर्ष 2025 की अनुमानित रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे बाजार में विभिन्न कंपनियों की हिस्सेदारी इस प्रकार है जिसमें ब्रिटानिया की हिस्सेदारी लगभग 32 प्रतिशत, पार्ले की हिस्सेदारी लगभग 29 प्रतिशत और आईटीसी की हिस्सेदारी लगभग 11 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह ध्यान देने योग्य बात है कि अलग-अलग बाजार अनुसंधान रिपोर्टों में इन आंकड़ों में थोड़ा अंतर हो सकता है, लेकिन यह पूरी तरह स्पष्ट है कि अकेले ब्रिटानिया और पार्ले मिलकर इस पूरे बाजार के आधे से अधिक हिस्से पर राज करते हैं। ब्रिटानिया की ताकत उसके लोकप्रिय ब्रांड जैसे गुड डे, मैरी गोल्ड, मिल्क बिकीज, टाइगर और न्यूट्रीचाइड्स हैं, जिनके जरिए कंपनी साधारण ग्लूकोज बिस्किट से लेकर प्रीमियम कुकीज तक हर वर्ग के ग्राहक को आसानी से लक्षित करती है। वहीं, पार्ले का सबसे बड़ा हथियार पार्ले जी बिस्किट है, जिसकी बेहद कम कीमत, पुरानी पहचान और देश के छोटे से छोटे गांवों से लेकर महानगरों तक फैली उपलब्धता इसे एक अपराजेय ब्रांड बनाती है। इसके अलावा आईटीसी अपने सनफेस्ट ब्रांड के तहत डार्क फैंटेसी, मैरी लाइट और मॉम्स मैजिक जैसे उत्पादों के साथ मजबूत पकड़ बनाए हुए है, जबकि प्रियागोल्ड, अनमोल और कई अन्य क्षेत्रीय कंपनियां भी इस मुकाबले को और अधिक कठिन बनाती हैं।

रिलायंस ने अपने इंडिपेंडेंस ब्रांड के तहत नौ अलग-अलग वैरिएंट और अट्ठाइस एसकेयू पेश किए हैं, जिनका पूरा फोकस रोजमर्रा में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले बिस्किट तथा क्रीम और चॉकलेट फ्लेवर वाले उत्पादों पर है। इस नए पोर्टफोलियो में इंडिपेंडेंस पावर अप, इंडिपेंडेंस बटर ब्लिस, इंडिपेंडेंस मिल्की पावर, इंडिपेंडेंस मैरी प्राइम, इंडिपेंडेंस कोको वैनिला, इंडिपेंडेंस कोको चॉकलेट, इंडिपेंडेंस क्रेमयम ऑरेंज, इंडिपेंडेंस क्रेमयम चोको और इंडिपेंडेंस ग्लूकोज बूस्ट जैसे बेहतरीन उत्पाद शामिल किए गए हैं। इन उत्पादों की कीमतों को उपभोक्ताओं की अलग-अलग और विविध जरूरतों को ध्यान में रखकर बेहद सावधानी से तय किया गया है। ट्रायल पैक के रूप में पांच रुपये कीमत रखी गई है, जबकि शेयरिंग पैक की कीमत दस रुपये और बड़े फैमिली पैक की कीमत चालीस रुपये से लेकर एक सौ पच्चीस रुपये तक तय की गई है। फिलहाल कंपनी ने अपने इन नए उत्पादों की शुरुआत तमिलनाडु राज्य से की है और इसके लिए वहां अपनी स्थानीय उत्पादन क्षमता को भी तेजी से बढ़ाया जा रहा है ताकि मांग को पूरा किया जा सके। इसके बाद धीरे-धीरे देश के अन्य प्रमुख बाजारों में भी इसके विस्तार की पूरी योजना तैयार की जा चुकी है।

रिलायंस की रणनीति पूरी तरह स्पष्ट है और कंपनी शुरुआत में कम कीमत वाले छोटे पैक के जरिए ग्राहकों का ध्यान खींचना चाहती है और फिर बड़े फैमिली पैक के माध्यम से घरेलू खपत के बाजार में अपनी स्थायी जगह बनाना चाहती है और हालांकि, पांच रुपये का बिस्किट बेचकर सीधे तौर पर ब्रिटानिया को टक्कर देना कितना आसान होगा, यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है। सॉफ्ट ड्रिंक के बाजार में जब रिलायंस ने कैंपा कोला को उतारा था, तब कोका कोला और पेप्सिको जैसी दिग्गज कंपनियों के मुकाबले काफी कम कीमत रखना उसकी सबसे बड़ी और सफल रणनीति साबित हुई थी और लेकिन बिस्किट के बाजार का गणित थोड़ा अलग प्रकार का है क्योंकि इस सेक्टर में पांच रुपये और दस रुपये के किफायती पैक पहले से ही भारी मात्रा में बिक रहे हैं। ब्रिटानिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक रक्षित हरगावे ने छह नवंबर को हुई अर्निंग्स कॉल के दौरान स्पष्ट रूप से कहा था कि बिस्किट बाजार में पांच और दस रुपये के मूल्य बिंदु पहले से ही अपनी जगह बना चुके हैं, इसलिए यहां केवल कीमत के दम पर वैसा क्रांतिकारी बदलाव लाना उतना आसान नहीं होगा जैसा कि कोला बाजार में देखने को मिला था। इसका मतलब साफ है कि रिलायंस को केवल सस्ते बिस्किट बेचने की रणनीति से आगे बढ़कर ग्राहकों को असाधारण वैल्यू और गुणवत्ता प्रदान करनी होगी।

उत्पाद की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पांच रुपये के पैक में उपभोक्ता को कितनी मात्रा मिल रही है, बिस्किट का स्वाद और उसकी गुणवत्ता कैसी है, क्या ग्राहक दोबारा उसी ब्रांड को खरीदना पसंद करेगा और क्या वह उत्पाद आसानी से हर जगह उपलब्ध है। बिस्किट के इस कारोबार में केवल एक बेहतरीन उत्पाद तैयार करना ही काफी नहीं होता, बल्कि उसे देश के कोने-कोने में स्थित लाखों किराना स्टोरों और खुदरा दुकानों तक समय पर पहुंचाना भी उतना ही जरूरी होता है। यहीं पर रिलायंस को अपने विशाल और संगठित रिटेल नेटवर्क का सबसे बड़ा फायदा मिल सकता है। कंपनी अपने इन नए बिस्किट उत्पादों को कई माध्यमों से बेचने की योजना पर पूरी गंभीरता से काम कर रही है। इसमें रिलायंस रिटेल के अपने स्टोर, छोटे और बड़े किराना स्टोर, आधुनिक ट्रेड यानी मॉडर्न ट्रेड, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और मजबूत होलसेल नेटवर्क शामिल हैं और वित्त वर्ष 2024 के अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, ब्रांडेड बिस्किट की कुल बिक्री में सामान्य ट्रेड यानी पारंपरिक किराना दुकानों की हिस्सेदारी लगभग 71 प्रतिशत थी, जबकि मॉडर्न ट्रेड की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत और ई-कॉमर्स की हिस्सेदारी मात्र 8 प्रतिशत के आसपास थी। इससे यह बात पूरी तरह साबित हो जाती है कि रिलायंस के लिए केवल अपने खुद के स्टोरों में बिस्किट बेचना कभी भी पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसे मोहल्ले की छोटी दुकानों और दूरदराज के गांवों तक अपनी गहरी पहुंच बनानी ही होगी और दूसरी तरफ, ब्रिटानिया और पार्ले जैसी स्थापित कंपनियों के पास दशकों पुराना और बेहद मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क मौजूद है, और स्थानीय दुकानदारों के साथ उनके संबंध बेहद गहरे हैं जिन पर ग्राहकों का अटूट भरोसा है। इसलिए रिलायंस के सामने पारंपरिक दुकानदारों को अपने नए उत्पादों को अपनी दुकानों की शेल्फ पर रखने के लिए राजी करना भी एक बहुत बड़ी चुनौती साबित होने वाली है।

रिलायंस का पिछला ऐतिहासिक रिकॉर्ड देखकर बाजार इस पूरी चुनौती को बेहद गंभीरता से ले रहा है। जियो ने अपने शुरुआती दौर में मुफ्त वॉयस कॉल और बेहद सस्ते डेटा प्लान देकर भारतीय टेलीकॉम इंडस्ट्री की पूरी तस्वीर ही बदलकर रख दी थी, जिसके बाद देश की अन्य सभी प्रमुख कंपनियों को अपनी कीमतों और व्यावसायिक रणनीतियों में मजबूरन बड़े बदलाव करने पड़े थे। इसी तरह रिलायंस ने वर्ष 2023 में कैंपा कोला को बाजार में दोबारा लॉन्च किया और अपनी आक्रामक कम कीमत की रणनीति के दम पर कोका कोला और पेप्सिको जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को कड़ी चुनौती दे डाली। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, कैंपा की बाजार हिस्सेदारी वर्ष 2024 में लगभग दो प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2025 में सीधे सात प्रतिशत के करीब पहुंच गई। वित्त वर्ष 2026 में रिलायंस ने कैंपा की सकल बिक्री चार हजार सात सौ करोड़ रुपये से अधिक दर्ज की थी। लेकिन इसके बावजूद इस बात की कोई भी पूर्ण गारंटी नहीं है कि बिस्किट के कारोबार में भी जियो या कैंपा वाला यह फॉर्मूला उसी रूप में पूरी तरह सफल हो जाएगा। टेलीकॉम सेक्टर में एक बार ग्राहक जुड़ने के बाद लगातार डेटा का उपभोग करता है और कंपनी अन्य डिजिटल सेवाओं के माध्यम से भी अपनी कमाई जारी रखती है, जबकि बिस्किट उद्योग में प्रत्येक पैकेट के निर्माण के साथ उत्पादन, पैकेजिंग और परिवहन की भारी लागत जुड़ी होती है। इसलिए लंबे समय तक भारी छूट या कम कीमत पर उत्पाद बेचना कंपनी के कुल मुनाफे पर गहरा दबाव डाल सकता है।

रिलायंस केवल सस्ते बिस्किट के बाजार तक ही सीमित रहने का इरादा नहीं रखती है, क्योंकि भारतीय बाजार में प्रीमियम कुकीज, डाइजेस्टिव और हेल्दी बिस्किट की मांग भी तेजी से बढ़ती जा रही है और इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए रिलायंस ने श्रीलंका की प्रसिद्ध बिस्किट निर्माता कंपनी मालिबान के साथ एक रणनीतिक साझेदारी भी की है। इस साझेदारी से रिलायंस को विभिन्न प्रकार के प्रीमियम और विशेष उत्पादों के सेगमेंट में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी। यानी इंडिपेंडेंस ब्रांड के माध्यम से कंपनी जहां एक तरफ रोजमर्रा के आम बिस्किट बाजार पर कब्जा जमाना चाहती है, वहीं मालिबान के साथ हुई यह साझेदारी उसे विशेष और प्रीमियम उत्पादों के अवसरों की तलाश करने में सक्षम बनाती है। यह सोची-समझी रणनीति रिलायंस को केवल एक सस्ते उत्पाद बेचने वाली कंपनी बनने से आगे ले जाकर उच्च श्रेणी के बाजार में स्थापित कर सकती है।

अंततः यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि बिस्किट बाजार की इस कठिन और रोमांचक जंग का विजेता कौन बनता है। रिलायंस के पास इस विशाल कारोबार में उतरने के लिए पर्याप्त पूंजी, एक अत्यंत विस्तृत खुदरा नेटवर्क, मजबूत विनिर्माण क्षमता और नया ब्रांड खड़ा करने का बेजोड़ अनुभव मौजूद है। हालांकि, ब्रिटानिया और पार्ले जैसी दिग्गज कंपनियों को हल्के में आंकने की भूल बिल्कुल नहीं की जा सकती क्योंकि इन कंपनियों ने दशकों की मेहनत से भारतीय उपभोक्ताओं का अटूट भरोसा और देशव्यापी वितरण नेटवर्क हासिल किया है। रिलायंस की असली और कठिन परीक्षा मुख्य रूप से तीन मोर्चों पर होने वाली है। पहला मोर्चा ग्राहकों का भरोसा है कि क्या आम लोग पार्ले जी और ब्रिटानिया का साथ छोड़कर इंडिपेंडेंस ब्रांड को नियमित रूप से अपनाएंगे। दूसरा मोर्चा किराना नेटवर्क है कि क्या रिलायंस देश भर की लाखों छोटी दुकानों तक अपनी सुगम पहुंच बना पाएगी। और तीसरा मोर्चा मुनाफे का सटीक गणित है कि क्या कंपनी बेहद कम कीमत पर उच्च गुणवत्ता प्रदान करते हुए लंबे समय तक टिकाऊ मुनाफा कमाने में सफल हो पाएगी और रिलायंस की इस धमाकेदार एंट्री से भारतीय बिस्किट बाजार में प्रतिस्पर्धा का स्तर अपने चरम पर पहुंचना तय है। कंपनी के पास कम कीमत, व्यापक उत्पाद पोर्टफोलियो और मजबूत खुदरा ताकत जैसे कई बड़े फायदे जरूर हैं, लेकिन बिस्किट के बाजार में पहले से ही पांच और दस रुपये के किफायती पैक प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। इसलिए केवल सस्ती कीमत के दम पर ब्रिटानिया और पार्ले जैसी कंपनियों को पछाड़ना आसान नहीं होगा। अंततः इस महासंग्राम में वही कंपनी शीर्ष पर टिकेगी जो उपभोक्ताओं को बेहतरीन स्वाद, शानदार गुणवत्ता, सही कीमत और आसान उपलब्धता का अनूठा मेल प्रदान करेगी और रिलायंस के लिए सबसे बड़ी चुनौती केवल बिस्किट बेचना नहीं है, बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं की दैनिक जीवन शैली और आदत का हिस्सा बनना है।

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