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Reliance Jio IPO: 182 बिलियन डॉलर की हुंकार! जून तक आएगा अंबानी का 'ब्रह्मास्त्र'

Reliance Jio IPO: 182 बिलियन डॉलर की हुंकार! जून तक आएगा अंबानी का 'ब्रह्मास्त्र'
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मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज एक बार फिर भारतीय शेयर बाजार में इतिहास रचने की तैयारी कर रही है। जियो प्लेटफॉर्म्स का बहुप्रतीक्षित आईपीओ अब हकीकत बनने के करीब है और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी ने इस मेगा आईपीओ के लिए वैश्विक दिग्गज बैंकर्स मॉर्गन स्टेनली और गोल्डमैन सैक्स को नियुक्त कर लिया है। यह आईपीओ न केवल रिलायंस के लिए बल्कि पूरे भारतीय कॉर्पोरेट जगत के लिए एक मील का पत्थर साबित होने वाला है। बाजार में इस बात की चर्चा तेज है कि यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम हो सकता है।

कितनी होगी जियो की वैल्यूएशन

बाजार के जानकारों का मानना है कि जियो प्लेटफॉर्म्स की वैल्यूएशन 133 अरब डॉलर से लेकर 182 अरब डॉलर के बीच हो सकती है। अगर यह ऊपरी स्तर को छूती है, तो कंपनी की कीमत करीब 15 लाख करोड़ रुपये हो जाएगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज की यह डिजिटल और टेलीकॉम यूनिट वित्त मंत्रालय से 2 और 5 फीसदी पब्लिक फ्लोट की मंजूरी मिलने का इंतजार कर रही है। जैसे ही यह मंजूरी मिलेगी, कंपनी अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी डीआरएचपी दाखिल कर देगी। यह कदम रिलायंस के शेयरधारकों के लिए भी बड़ी खुशखबरी लेकर आ सकता है।

दिग्गज निवेशक बेच सकते हैं हिस्सा

इस आईपीओ में प्राइमरी इश्यू और सेकेंडरी शेयर सेल दोनों का मिश्रण होने की संभावना है और केकेआर, टीपीजी, सिल्वर लेक और विस्टा पार्टनर्स जैसे बड़े प्राइवेट इक्विटी निवेशक अपनी हिस्सेदारी कम कर सकते हैं। हालांकि, गूगल और मेटा जैसे रणनीतिक साझेदार अपनी हिस्सेदारी बरकरार रख सकते हैं। गूगल के पास वर्तमान में 7. 75 फीसदी और मेटा के पास 9. 99 फीसदी हिस्सा है, जो जियो के भविष्य के डिजिटल विजन और एआई इनिशिएटिव के लिए महत्वपूर्ण हैं। इंटेल जैसी कंपनियां अपनी मामूली हिस्सेदारी की आंशिक बिक्री पर विचार कर सकती हैं।

2020 का वो ऐतिहासिक निवेश

साल 2020 में जियो प्लेटफॉर्म्स ने दुनिया के 13 बड़े निवेशकों से करीब 1. 5 लाख करोड़ रुपये जुटाए थे। उस समय कंपनी ने अपनी कुल 33 फीसदी हिस्सेदारी बेची थी। इस निवेश ने जियो को पूरी तरह से कर्ज मुक्त बनाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। अब आईपीओ के जरिए कंपनी अपनी वैल्यू को और अधिक अनलॉक करना चाहती है। तब से इन टेक दिग्गजों ने रिलायंस के साथ क्लाउड, कंपोनेंट्स और। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में अपनी साझेदारी को और गहरा किया है।

कब तक आएगा यह मेगा आईपीओ

रिलायंस जियो इन्फोकॉम के रणनीति प्रमुख अंशुमन ठाकुर के मुताबिक, आईपीओ पर आंतरिक काम तेजी से चल रहा है। हालांकि, सब कुछ रेगुलेटरी स्पष्टता और सेबी की सिफारिशों पर निर्भर करता है। बाजार को उम्मीद है कि जून 2026 तक या उससे पहले ही यह 'मदर ऑफ आईपीओ' बाजार में दस्तक दे देगा। कंपनी फिलहाल सही समय और बाजार की स्थितियों का आकलन कर रही है ताकि निवेशकों को अधिकतम लाभ मिल सके।

ब्रोकरेज फर्मों की अलग-अलग राय

जियो की वैल्यूएशन को लेकर अलग-अलग ब्रोकरेज फर्मों के अपने अनुमान हैं और जेफरीज ने इसे 180 अरब डॉलर का आंका है, जबकि मोतीलाल ओसवाल ने 148 अरब डॉलर की वैल्यूएशन दी है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने इसे 11. 59 लाख करोड़ रुपये के आसपास बताया है। इन आंकड़ों से साफ है कि जियो का आईपीओ बाजार में एक नया तूफान लाने वाला है और यह रिलायंस के भविष्य की दिशा तय करेगा।

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