रुपये में ऐतिहासिक गिरावट: डॉलर के मुकाबले 96 के पार पहुंचा भाव, कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता

Add as Preferred Source on Google News →
विज्ञापन
रुपये में ऐतिहासिक गिरावट: डॉलर के मुकाबले 96 के पार पहुंचा भाव, कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता
विज्ञापन

भारतीय मुद्रा के लिए मंगलवार का दिन एक बड़ा झटका लेकर आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मची उथल-पुथल के बीच डॉलर के मुकाबले रुपया लुढ़ककर 96 के स्तर को पार कर गया है। यह पिछले दो महीनों में रुपये का सबसे कमजोर स्तर माना जा रहा है। आज के कारोबारी दिन में रुपये में लगभग 0 दशमलव 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद यह 96 रुपये 1450 पैसे प्रति डॉलर के स्तर पर आ गया है। यह गिरावट कोई सामान्य घटना नहीं है, बल्कि इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से बदलते वैश्विक हालात जिम्मेदार हैं। दुनिया भर के निवेशक इस समय भारी दबाव में हैं और इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। भारत एक नेट एनर्जी-इम्पोर्टिंग देश है, जिसका अर्थ है कि हम अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करते हैं और ऐसी स्थिति में जब डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो हमें आयात के लिए पहले की तुलना में कहीं अधिक कीमत चुकानी पड़ती है।

कच्चे तेल की कीमतों ने बिगाड़ा खेल

रुपये की इस मौजूदा दुर्दशा के पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी है। ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में 1 दशमलव 5 प्रतिशत से ज्यादा का उछाल देखा गया है। इस जबरदस्त तेजी के बाद कच्चे तेल के दाम 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। असल में मध्य पूर्व यानी मिडिल ईस्ट के हालात लगातार चिंताजनक बने हुए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा टकराव अब ग्लोबल इकॉनमी के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन चुका है। बाजार को इस बात की गहरी चिंता सता रही है कि इस तनाव की वजह से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई ठप पड़ सकती है और हालांकि बीच में ऐसे संकेत मिले थे कि मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल का निर्यात पटरी पर लौट रहा है, लेकिन वर्तमान तनावपूर्ण हालातों ने इन सभी उम्मीदों को लगभग खत्म कर दिया है।

शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों का पलायन

इस वैश्विक तनाव की आंच सिर्फ करंसी मार्केट तक ही सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय शेयर बाजार से लेकर बॉन्ड मार्केट तक इसका गहरा असर पड़ा है। विदेशी निवेशकों में घबराहट का माहौल साफ देखा जा सकता है और वे तेजी से अपना पैसा भारतीय बाजारों से बाहर निकाल रहे हैं। अगर हम सिर्फ सितंबर महीने के आंकड़ों पर नजर डालें, तो अब तक विदेशी निवेशक 3 अरब 70 करोड़ डॉलर की एक बड़ी रकम भारतीय बाजार से निकाल चुके हैं। बाजार से इतनी बड़ी मात्रा में डॉलर के बाहर जाने से रुपये पर भारी दबाव बना है। जब डॉलर की निकासी बढ़ती है, तो रुपये की वैल्यू अपने आप कम होने लगती है और यह स्थिति भारतीय वित्तीय बाजारों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है।

अर्थव्यवस्था पर मंडराते संकट के बादल

कच्चा तेल महंगा होने से देश का इंपोर्ट बिल यानी आयात खर्च सीधे तौर पर बढ़ जाएगा। इसका असर अंततः महंगाई के रूप में आम जनता के सामने आएगा, क्योंकि ट्रांसपोर्टेशन से लेकर उत्पादन तक सब कुछ महंगा हो जाएगा। इसके साथ ही शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली ने बाजार के सेंटिमेंट को पूरी तरह से बिगाड़ दिया है। रुपये का 96 रुपये के स्तर के पार जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि ग्लोबल मार्केट का दबाव अब भारत पर हावी हो रहा है। आने वाले दिनों में अगर अमेरिका और ईरान के बीच हालात में सुधार नहीं हुआ, तो कच्चे तेल की यह बढ़ती कीमतें रुपये की स्थिति को और अधिक खराब कर सकती हैं।

विज्ञापन