रूस के आगे यूक्रेन पूरी तरह बेबस दिखाई दे रहा है। रूस ने यूक्रेन पर लगातार भीषण मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जिन्हें रोकने में यूक्रेन पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है और दूसरी ओर रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने चीन और अमेरिका पर युद्ध खत्म करने की पूरी जिम्मेदारी डाल दी है। रूस के इन अंधाधुंध हमलों ने पूरे यूक्रेन में अफरा-तफरी का माहौल मचा दिया है। रूस द्वारा किए जा रहे बड़े मिसाइल हमलों के कारण राजधानी कीव में बड़े मॉल, अस्पताल और दफ्तर जलकर खाक हो रहे हैं और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के पास रूसी मिसाइलों को रोकने के लिए पर्याप्त इंटरसेप्टर नहीं बचे हैं। अमेरिका ने इन्हें देना बंद कर दिया है और यूरोप ने भी इनकी सप्लाई अचानक पूरी तरह रोक दी है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर जेलेंस्की को रूस के साथ तुरंत डील करने की सख्त सलाह दी है, जबकि पुतिन ने इस बीच युद्ध खत्म करने की जिम्मेदारी सीधे तौर पर चीन और अमेरिका के कंधों पर डाल दी है।
आगामी महीने में दुनिया के इन तीन बड़े देशों के शीर्ष नेताओं के बीच एक बेहद अहम बैठक होने जा रही है। इस त्रिपक्षीय बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शामिल हो सकते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इस उच्चस्तरीय बैठक में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की को बिल्कुल नहीं बुलाया गया है और न ही यूरोप के किसी अन्य नेता को इसमें शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है। इस कूटनीतिक घटनाक्रम के सामने आने के बाद यूक्रेन के लिए टेंशन और चिंताएं बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। यूक्रेन को यह डर सता रहा है कि उसके भविष्य का फैसला उसकी पीठ पीछे और उसकी अनुपस्थिति में किया जा रहा है, जिससे उनकी स्थिति अंतरराष्ट्रीय मंच पर और अधिक कमजोर होती जा रही है।
रूस ने हाल ही में यूक्रेन को पूरी तरह दहलाने के लिए एक बहुत बड़ा सैन्य अभियान चलाया है। रूस ने यूक्रेन की दस बिजली कंपनियों पर एक ही समय पर एक साथ समन्वित हमले किए हैं और जेलेंस्की की राजधानी कीव पर आसमान से लगातार आफत बरस रही है। रूस की खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइलें आग के गोलों की तरह आसमान से नीचे जमीन पर गिर रही हैं और कीव के घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में लगातार होने वाले भीषण धमाकों के शोर से पूरी धरती हिल उठी है। रूस ने इस बार कीव के मेट्रो स्टेशन को भी अपने हमलों का मुख्य निशाना बनाया है। इस मेट्रो स्टेशन पर रूस ने ईरान निर्मित गेरान चार ड्रोन से सटीक हमले किए हैं। रूसी सेना ने रात के अंधेरे में कीव शहर पर सोलह बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं और इसके अलावा जेट इंजन वाले दो सौ انہتر ड्रोन भी यूक्रेन की तरफ दागे गए। हालांकि यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली ने इनमें से दो सौ तैंतालीस ड्रोनों को सफलतापूर्वक हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया, लेकिन यूक्रेनी सेना एक भी बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में रोकने में कामयाब नहीं हो पाई। इन भीषण हमलों के कारण जेलेंस्की के पच्चीस महत्वपूर्ण ठिकाने बुरी तरह बर्बाद हो चुके हैं।
इन विनाशकारी हमलों के तुरंत बाद राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अपने पश्चिमी सहयोगियों, विशेष तौर पर यूरोप और अमेरिका के पार्टनर्स पर अपनी भड़ास जमकर निकाली है। जेलेंस्की का गुस्सा इस बात पर था कि इन साझेदार देशों ने रात में हुए रूसी बैलिस्टिक मिसाइल हमलों की कोई भी अर्ली वॉर्निंग यानी पूर्व चेतावनी यूक्रेन को समय पर नहीं दी थी और जेलेंस्की ने सीधे तौर पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को टारगेट करते हुए कहा कि पश्चिमी पार्टनर देशों में केवल अमेरिका के पास ही ऐसा अत्याधुनिक अर्ली वॉर्निंग सिस्टम मौजूद है जो रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों की आवाजाही और उनके निशाने की जानकारी बहुत पहले ही दे सकता है। मगर इसके बावजूद ट्रंप ने जेलेंस्की को पुतिन के इन घातक बैलिस्टिक प्रहारों की भनक तक नहीं लगने दी और इस भीषण लापरवाही और जानकारी के अभाव की वजह से कीव में एक बहुत बड़ा डेटा सेंटर रूस के सटीक निशाने पर आ गया और तबाह हो गया।
रूसी हमलों का शिकार केवल डेटा सेंटर ही नहीं बना, बल्कि फायर पॉइंट लॉजिस्टिक हब पर भी सीधा हमला किया गया। यह वही रणनीतिक हब था जहां यूक्रेन की अपनी स्वदेशी फ्लेमिंगो क्रूज मिसाइल के विभिन्न कंपोनेंट्स और पुर्जे तैयार किए जाते थे। इतना ही नहीं, इस स्थान पर कई आधुनिक ड्रोन्स को असेंबल भी किया जाता था और इसके अलावा रूस ने एक महत्वपूर्ण लोकोमोटिव सेंटर को भी पूरी तरह उड़ा दिया है। इस लोकोमोटिव सेंटर का इस्तेमाल मिसाइलों को असेंबल किए जाने के बाद उन्हें सुरक्षित रूप से स्टोर करने के लिए किया जाता था। रूस के इन सुनियोजित हमलों ने यूक्रेन के रक्षा उत्पादन और उसकी रसद श्रृंखला को गहरी चोट पहुंचाई है, जिससे यूक्रेन की युद्ध लड़ने की क्षमता को भारी आघात लगा है।
अब बड़ा सवाल यह उठता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच यह बहुप्रतीक्षित बैठक कब और कहां आयोजित होगी। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार यह अहम बैठक आगामी एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग शिखर सम्मेलन के दौरान हो सकती है। चीन के शेन्जेन शहर में अठारह और उन्नीस नवंबर को एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग सम्मेलन का आयोजन निर्धारित किया गया है और अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की अमेरिका और चीन द्वारा लिए जाने वाले किसी भी फैसले को चुपचाप मान लेंगे। वह भी ऐसी स्थिति में जब उनके अपने देश के भाग्य का फैसला करने वाली इस बेहद महत्वपूर्ण समिट में खुद यूक्रेन को ही आमंत्रित नहीं किया गया है।
फिलहाल यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की की सबसे पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता स्टारशील्ड के सैटेलाइट नेटवर्क को दोबारा हासिल करने पर टिकी हुई है। आपको बता दें कि ट्रंप के तीखे गुस्से और नाराजगी के बाद इस स्टारशील्ड नेटवर्क को अचानक सस्पेंड कर दिया गया था। यूक्रेन को स्टारशील्ड का महत्वपूर्ण नेटवर्क नहीं मिलने की वजह से जेलेंस्की के लिए रूसी सेना के खिलाफ यह युद्ध लड़ना करीब करीब असंभव सा होता जा रहा है और इसके अलावा पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम में इस्तेमाल होने वाली जरूरी इंटरसेप्टर मिसाइलें समय पर नहीं मिलने के कारण यूक्रेन रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों के हमलों को रोकने में पूरी तरह असमर्थ साबित हो रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप ऐसा कड़ा रुख अपनाकर जेलेंस्की पर रूस के साथ किसी शांति समझौते या डील को स्वीकार करने के लिए अधिकतम दबाव बना रहे हैं। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अमेरिका और रूस का यह संयुक्त दबाव यूक्रेन पर कितना असर डालता है और क्या यह युद्ध किसी अंत की ओर बढ़ पाता है।