सकट चौथ का पावन व्रत 6 जनवरी 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। यह व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है और मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि तथा संकटों से रक्षा के लिए इसे निर्जला या फलाहार के साथ रखती हैं। इस दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है, क्योंकि वे विघ्नहर्ता हैं और जीवन के सभी कष्ट दूर करते हैं।
इस व्रत को संकष्टी चतुर्थी, तिल चौथ, तिलकुट चौथ, माघी चौथ और महाराष्ट्र में लंबोदर संकष्टी के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष सकट चौथ मंगलवार को पड़ रही है, इसलिए इसे अंगारकी चतुर्थी भी कहा जा रहा है, जो अत्यंत शुभ मानी जाती है।
व्रत सूर्योदय से शुरू होता है और चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर समाप्त किया जाता है।
पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री तैयार रखें:
एक समय की बात है, एक बुढ़िया रोज मिट्टी के गणेश जी बनाकर उनकी पूजा करती थी, लेकिन वे गल जाते थे। पास में सेठ का मकान बन रहा था। बुढ़िया ने मिस्त्री से पत्थर का गणेश बनाने को कहा। मिस्त्री ने मना कर दिया कि इतने पैसों में हम दीवार नहीं चिनेंगे।
बुढ़िया क्रोधित होकर बोली, "राम करे तुम्हारी दीवार टेढ़ी हो जाए!" इसके बाद दीवार बार-बार टेढ़ी हो जाती। मिस्त्री परेशान हो गए। सेठ ने बुढ़िया को बुलाया और सोने का गणेश बनवाने का वादा किया। बुढ़िया ने आशीर्वाद दिया और दीवार सीधी हो गई।
इस कथा से पता चलता है कि गणेश जी की भक्ति से बड़े से बड़ा संकट दूर हो जाता है। हे गणेश जी, जैसे सेठ की दीवार सीधी की, वैसे सभी के संकट दूर करो।
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी। माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया। बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी। कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
इस व्रत से संतान सुख, आरोग्य और परिवार में सुख-शांति प्राप्त होती है। भगवान गणेश की कृपा से सभी संकट दूर हों! जय गणेश जी!