- भारत,
- 06-Jan-2026 10:32 AM IST
सकट चौथ का पावन व्रत 6 जनवरी 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। यह व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है और मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि तथा संकटों से रक्षा के लिए इसे निर्जला या फलाहार के साथ रखती हैं। इस दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है, क्योंकि वे विघ्नहर्ता हैं और जीवन के सभी कष्ट दूर करते हैं।
इस व्रत को संकष्टी चतुर्थी, तिल चौथ, तिलकुट चौथ, माघी चौथ और महाराष्ट्र में लंबोदर संकष्टी के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष सकट चौथ मंगलवार को पड़ रही है, इसलिए इसे अंगारकी चतुर्थी भी कहा जा रहा है, जो अत्यंत शुभ मानी जाती है।
सकट चौथ 2026 की तिथि और मुहूर्त
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 6 जनवरी 2026 को सुबह 08:01 बजे
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 7 जनवरी 2026 को सुबह 06:52 बजे
- चंद्रोदय समय: लगभग रात 8:54 बजे (स्थानीय समय के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है, जैसे जयपुर या दिल्ली में 8:50 से 9:00 बजे के बीच)
- पूजा का शुभ मुहूर्त: संध्या काल में गोधूलि बेला (सूर्यास्त के समय)
व्रत सूर्योदय से शुरू होता है और चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर समाप्त किया जाता है।
सकट चौथ पूजा की सामग्री लिस्ट
पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री तैयार रखें:
- भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र
- लाल या पीला कपड़ा (चौकी पर बिछाने हेतु)
- दूर्वा घास (21 गांठें)
- रोली, अक्षत, सिंदूर, चंदन
- तिल-गुड़ के लड्डू (तिलकुट), मोदक
- गन्ना, काली गाजर, शकरकंद (सर्दियों का विशेष भोग)
- फल, फूल, पान-सुपारी
- धूप, दीप, कपूर
- दूध, दही, घी, शहद (पंचामृत हेतु)
- कलश, अर्घ्य के लिए जल, दूध और अक्षत
- व्रत कथा पुस्तक
सकट चौथ 2026 पूजा विधि (स्टेप बाय स्टेप)
- सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
- शाम को स्नान के बाद चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें।
- गणेश जी को दूर्वा, रोली, सिंदूर, अक्षत चढ़ाएं।
- तिल-गुड़ के लड्डू, गन्ना, काली गाजर और शकरकंद का भोग लगाएं।
- धूप-दीप जलाकर मंत्रों का जाप करें।
- सकट चौथ व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- आरती करें।
- रात में चंद्रोदय होने पर छत या खुले स्थान पर जाएं, चंद्रमा को दूध-जल मिश्रित अर्घ्य दें।
- चंद्रमा की पूजा के बाद तिलकुट प्रसाद ग्रहण कर व्रत पूर्ण करें।
सकट चौथ व्रत कथा
एक समय की बात है, एक बुढ़िया रोज मिट्टी के गणेश जी बनाकर उनकी पूजा करती थी, लेकिन वे गल जाते थे। पास में सेठ का मकान बन रहा था। बुढ़िया ने मिस्त्री से पत्थर का गणेश बनाने को कहा। मिस्त्री ने मना कर दिया कि इतने पैसों में हम दीवार नहीं चिनेंगे।
बुढ़िया क्रोधित होकर बोली, "राम करे तुम्हारी दीवार टेढ़ी हो जाए!" इसके बाद दीवार बार-बार टेढ़ी हो जाती। मिस्त्री परेशान हो गए। सेठ ने बुढ़िया को बुलाया और सोने का गणेश बनवाने का वादा किया। बुढ़िया ने आशीर्वाद दिया और दीवार सीधी हो गई।
इस कथा से पता चलता है कि गणेश जी की भक्ति से बड़े से बड़ा संकट दूर हो जाता है। हे गणेश जी, जैसे सेठ की दीवार सीधी की, वैसे सभी के संकट दूर करो।
सकट चौथ की आरती
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी। माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया। बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी। कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
महत्वपूर्ण मंत्र
- ॐ गं गणपतये नमः
- वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
इस व्रत से संतान सुख, आरोग्य और परिवार में सुख-शांति प्राप्त होती है। भगवान गणेश की कृपा से सभी संकट दूर हों! जय गणेश जी!
