वर्तमान में ईरान वैश्विक राजनीतिक और रणनीतिक चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है, लेकिन भारतीय फिल्म उद्योग यानी बॉलीवुड के साथ इसका रिश्ता दशकों पुराना और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध रहा है। फिल्म निर्माताओं के लिए ईरान की भौगोलिक विविधता और ऐतिहासिक वास्तुकला हमेशा से आकर्षण का केंद्र रही है। भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी महत्वपूर्ण फिल्में दर्ज हैं, जिनकी शूटिंग ईरान की धरती पर की गई है। यह सिलसिला 1970 के दशक में शुरू हुआ था और हाल के वर्षों तक जारी रहा है, जो दोनों देशों के बीच कलात्मक आदान-प्रदान को दर्शाता है।
ऐतिहासिक शुरुआत: फिल्म 'सुबह-ओ-शाम' और सांस्कृतिक सेतु
ईरान में शूट होने वाली पहली प्रमुख हिंदी फिल्म 'सुबह-ओ-शाम' थी, जो साल 1972 में बड़े पर्दे पर रिलीज हुई थी। इस फिल्म में भारतीय सिनेमा के दिग्गज कलाकार वहीदा रहमान और संजीव कुमार मुख्य भूमिकाओं में थे। इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसे हिंदी और फारसी दोनों भाषाओं में एक साथ बनाया गया था और ईरान में इसे 'होमे सादात' के नाम से प्रदर्शित किया गया था। फिल्म के निर्माण में भारतीय और ईरानी तकनीशियनों ने मिलकर काम किया था, जिसे उस दौर में भारत-ईरान के बीच एक मजबूत सांस्कृतिक पुल के रूप में देखा गया। इस फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सह-निर्माण की संभावनाओं के द्वार खोले थे।
'इंटरनेशनल क्रूक' और तेहरान की लोकेशन्स का उपयोग
साल 1974 में रिलीज हुई फिल्म 'इंटरनेशनल क्रूक' बॉलीवुड की उन शुरुआती फिल्मों में शामिल है, जिन्होंने विदेशी लोकेशन्स का व्यापक स्तर पर उपयोग किया। इस फिल्म की शूटिंग ईरान की राजधानी तेहरान और उसके आसपास के इलाकों में की गई थी। फिल्म में धर्मेंद्र, सायरा बानो और फिरोज खान जैसे बड़े सितारों ने काम किया था। तेहरान के शहरी परिदृश्य और वहां की वास्तुकला को फिल्म में प्रमुखता से दिखाया गया था और उस समय के फिल्म निर्माताओं के अनुसार, ईरान की लोकेशन्स भारतीय दर्शकों के लिए एक नया और अनूठा अनुभव प्रदान करती थीं, जिससे फिल्म की दृश्य गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ था।
'सलाम मुंबई' और आधुनिक ईरानी कलाकारों का बॉलीवुड डेब्यू
एक लंबे अंतराल के बाद, साल 2016 में फिल्म 'सलाम मुंबई' के जरिए भारत और ईरान के सिनेमाई रिश्ते फिर से चर्चा में आए। घोरबन मोहम्मदपुर के निर्देशन में बनी इस फिल्म की शूटिंग ईरान और मुंबई दोनों जगहों पर की गई थी। इस फिल्म की खास बात यह थी कि इसमें ईरानी सुपरस्टार मोहम्मद रजा गुलजार ने मुख्य भूमिका निभाई थी। यह फिल्म न केवल ईरान में शूट हुई, बल्कि इसने वहां के बॉक्स ऑफिस पर भी शानदार प्रदर्शन किया। इस परियोजना ने यह साबित किया कि भाषाई बाधाओं के बावजूद, दोनों देशों की कहानियों और कलाकारों में वैश्विक अपील है।
फिल्म 'तेहरान' और समकालीन सिनेमाई चित्रण
ईरान की पृष्ठभूमि पर आधारित हालिया प्रमुख फिल्म 'तेहरान' है, जो साल 2025 में चर्चा का विषय रही। इस फिल्म में जॉन अब्राहम, मानुषी छिल्लर और नीरू बाजवा ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। फिल्म की कहानी एक स्पेशल सेल ऑफिसर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो ईरान-इजराइल संघर्ष से जुड़ी खुफिया जानकारी की तलाश में वहां जाता है और फिल्म के कई महत्वपूर्ण हिस्सों को ईरान की वास्तविक लोकेशन्स पर फिल्माया गया है, ताकि दर्शकों को कहानी में वास्तविकता का अनुभव हो सके। फिल्म निर्माताओं के अनुसार, ईरान की भौगोलिक स्थिति फिल्म की थ्रिलर और एक्शन शैली के लिए पूरी तरह उपयुक्त थी।
सिनेमाई लोकेशन्स के रूप में ईरान का महत्व
फिल्म निर्माताओं के लिए ईरान हमेशा से एक चुनौतीपूर्ण लेकिन आकर्षक गंतव्य रहा है। वहां के रेगिस्तान, पहाड़ और प्राचीन शहर फिल्मों को एक विशेष विजुअल टोन प्रदान करते हैं। बॉलीवुड फिल्मों में ईरान का चित्रण केवल एक बैकड्रॉप के रूप में नहीं, बल्कि कहानी के एक अभिन्न अंग के रूप में किया गया है। अधिकारियों और फिल्म समीक्षकों के अनुसार, इन फिल्मों ने दोनों देशों के बीच पर्यटन और सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि वर्तमान भू-राजनीतिक स्थितियों के कारण अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माण प्रभावित हुआ है, लेकिन सिनेमाई इतिहास में ईरान का स्थान एक प्रमुख शूटिंग डेस्टिनेशन के रूप में सुरक्षित है।
