रूस का भारत को तेल आपूर्ति बढ़ाने का आश्वासन, होर्मुज तनाव जारी

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के नियंत्रण के बीच, रूस ने भारत और चीन को कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाने की घोषणा की है। रूसी उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा कि उनका देश संकट के समय में आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तैयार है।

मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच रूस ने भारत के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। इंटरफैक्स समाचार एजेंसी के अनुसार, रूसी उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने बुधवार को स्पष्ट किया कि रूस, चीन और भारत जैसे प्रमुख सहयोगियों को तेल की अतिरिक्त आपूर्ति करने के लिए पूरी तरह तैयार है और यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर पूर्ण नियंत्रण का दावा किया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान की आशंका बढ़ गई है। अधिकारियों के अनुसार, रूस का यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार में संभावित तेल संकट के बीच भारत के लिए एक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य कर सकता है।

रूस की आपूर्ति और अलेक्जेंडर नोवाक का आधिकारिक बयान

रूसी उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा है कि रूस अपने ऊर्जा संसाधनों के माध्यम से भारत और चीन की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए सक्षम है और नोवाक के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण उत्पन्न होने वाले किसी भी व्यवधान की स्थिति में रूस एक वैकल्पिक और विश्वसनीय स्रोत के रूप में खड़ा रहेगा। फरवरी के आंकड़ों के अनुसार, रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है और केप्लर (Kpler) के आंकड़ों से पता चलता है कि फरवरी में रूस से भारत का आयात 1mbd से थोड़ा अधिक था। 1mbd के स्तर से मामूली कम है, लेकिन रूस ने अपनी शीर्ष स्थिति बरकरार रखी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का दावा और सुरक्षा चिंताएं

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस रणनीतिक जलमार्ग पर पूर्ण नियंत्रण होने का दावा किया है। यह क्षेत्र दुनिया भर में तेल और गैस शिपमेंट के लिए एक अनिवार्य चोकपॉइंट माना जाता है। गार्ड्स नेवी के अधिकारी मोहम्मद अकबरज़ादेह ने फार्स न्यूज़ एजेंसी को बताया कि वर्तमान में होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से ईरानी नौसेना के नियंत्रण में है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को मिसाइलों या ड्रोन जैसे खतरों का सामना करना पड़ सकता है। इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के कारण कार्गो की आवाजाही में बाधा उत्पन्न हुई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

भारत के तेल आयात पर भौगोलिक प्रभाव और चुनौतियां

7mbd कच्चा तेल आयात इसी मार्ग से होकर गुजरता है। यह आपूर्ति मुख्य रूप से इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत जैसे देशों से आती है। इस क्षेत्र में चल रहे सैन्य हमलों और तनाव ने कार्गो आवाजाही को जोखिम में डाल दिया है। अधिकारियों के अनुसार, भारतीय रिफाइनर अब वैकल्पिक स्रोतों की तलाश कर रहे हैं ताकि घरेलू आपूर्ति में कोई कमी न आए। रूस द्वारा आपूर्ति बढ़ाने का प्रस्ताव इसी संदर्भ में भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सऊदी अरब की बढ़ती हिस्सेदारी और बाजार की स्थिति

फरवरी के दौरान जहां रूस शीर्ष पर रहा, वहीं सऊदी अरब ने भी भारत को किए जाने वाले शिपमेंट में उल्लेखनीय वृद्धि की है। केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, सऊदी अरब ने महीने-दर-महीने आधार पर अपनी आपूर्ति की मात्रा में लगभग 30% की बढ़ोतरी की है, जो 1mbd से अधिक हो गई है। इससे रूस और सऊदी अरब के बीच आपूर्ति के अंतर में कमी आई है। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय रिफाइनर अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न देशों से तेल खरीद रहे हैं। सऊदी अरब की इस आक्रामक आपूर्ति रणनीति ने बाजार में प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा दिया है, विशेषकर तब जब मध्य पूर्व के अन्य मार्गों पर सुरक्षा जोखिम बने हुए हैं।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और अमेरिका का सुरक्षा रुख

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती शत्रुता के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि अमेरिकी नौसेना इस कॉरिडोर से तेल टैंकरों को एस्कॉर्ट करने के लिए तैयार है। यह बयान वाशिंगटन की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिसके तहत नेविगेशन की स्वतंत्रता बनाए रखने पर जोर दिया गया है और अमेरिका का यह कदम उन जहाजों को सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से है जो ईरानी खतरों के साये में इस मार्ग का उपयोग कर रहे हैं। वैश्विक शक्तियों के इस हस्तक्षेप का उद्देश्य तेल की कीमतों में अचानक होने वाले उछाल को रोकना और वैश्विक अर्थव्यवस्था को ऊर्जा संकट से बचाना है।