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संभल मस्जिद ध्वस्तीकरण: 'आई लव मोहम्मद' के पोस्टर मिलने पर जामिया कमेटी पर FIR दर्ज

संभल मस्जिद ध्वस्तीकरण: 'आई लव मोहम्मद' के पोस्टर मिलने पर जामिया कमेटी पर FIR दर्ज
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उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रशासन ने सरकारी भूमि पर किए गए अवैध कब्जे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। नखासा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कसेरुआ गांव में कब्रिस्तान की सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद मुस्तफा कादरी को जमींदोज कर दिया गया है और इस ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान मस्जिद परिसर से 'आई लव मोहम्मद' के पोस्टर और कुछ अन्य सामग्री बरामद हुई है, जिसे पुलिस ने आपत्तिजनक माना है। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस ने जामिया कमेटी के सदस्यों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

आपत्तिजनक सामग्री की बरामदगी और पुलिस का बयान

अवैध कब्जे को हटाने की प्रक्रिया के दौरान जब प्रशासनिक टीम परिसर के अंदर पहुंची, तो वहां से 'आई लव मोहम्मद' लिखे हुए पोस्टर और कुछ अन्य सामग्री मिली। संभल के एएसपी कुलदीप सिंह ने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि कसेरुआ गांव में अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई की जा रही थी और इसी दौरान यह सामग्री बरामद हुई है। उन्होंने जानकारी दी कि इस मामले में सुसंगत धाराओं के तहत जामिया कमेटी के सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि यह सामग्री वहां किस उद्देश्य से रखी गई थी।

1200 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर था कब्जा

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, मस्जिद मुस्तफा कादरी का निर्माण लगभग 1200 वर्ग मीटर सरकारी भूमि पर किया गया था। राजस्व अभिलेखों में यह भूमि गाटा संख्या 409 के तहत कब्रिस्तान की जमीन के रूप में दर्ज है। तहसीलदार कोर्ट से बेदखली का आदेश जारी होने के बाद पुलिस और प्रशासन ने इस अवैध ढांचे को गिराने का निर्णय लिया। कार्रवाई से पहले ही प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे ताकि किसी भी प्रकार का विरोध या अप्रिय स्थिति पैदा न हो।

दो दिनों तक चला बुलडोजर एक्शन

कसेरुआ गांव में यह ध्वस्तीकरण अभियान दो दिनों तक चला। शनिवार को कार्रवाई की शुरुआत हुई थी, जिसमें मस्जिद के अगले हिस्से, बाहरी ढांचे, पिलरों और लगभग 55 फीट ऊंची मीनार को गिराया गया था। इसके बाद रविवार को प्रशासनिक टीम एक बार फिर बुलडोजर के साथ मौके पर पहुंची और मस्जिद के बचे हुए शेष ढांचे को भी पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। कई घंटों तक चले इस अभियान के बाद विवादित निर्माण को पूरी तरह हटा दिया गया है। इस दौरान पूरा गांव छावनी में तब्दील रहा और चप्पे-चप्पे पर पुलिस और पीएसी के जवानों की तैनाती की गई थी और गौरतलब है कि इस मामले में जनवरी 2026 में 7 लोगों के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज की जा चुकी थी।

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