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IPO News : भारत की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी SBI फंड्स मैनेजमेंट जल्द ही IPO के लिए दाखिल करेगी अर्जी

IPO News : भारत की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी SBI फंड्स मैनेजमेंट जल्द ही IPO के लिए दाखिल करेगी अर्जी
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भारत की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी, SBI फंड्स मैनेजमेंट लिमिटेड (SBIFML), अपने इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) के लिए जल्द ही मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल करने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) के रूप में पेश किया जाएगा। SBIFML देश के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और यूरोप की प्रमुख एसेट मैनेजमेंट कंपनी अमुंडी (Amundi) का एक संयुक्त उद्यम है।

ऑफर फॉर सेल और हिस्सेदारी का विवरण

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस आईपीओ के माध्यम से मौजूदा प्रमोटर अपनी कुल 10% हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रहे हैं। 40% हिस्सेदारी है। 7% हिस्सेदारी कम कर सकता है। यह पूरी प्रक्रिया द्वितीयक बाजार बिक्री के माध्यम से संपन्न होगी, जिसका अर्थ है कि कंपनी को कोई नई पूंजी प्राप्त नहीं होगी और सारा पैसा बेचने वाले शेयरधारकों के पास जाएगा।

एसेट अंडर मैनेजमेंट और बाजार में स्थिति

6 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति (AUM) का प्रबंधन कर रहा है। यह इसे भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग में सबसे बड़ा खिलाड़ी बनाता है। कंपनी की बाजार में मजबूत पकड़ और व्यापक वितरण नेटवर्क इसे प्रतिस्पर्धियों से आगे रखता है और इस लिस्टिंग को एसेट मैनेजमेंट सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है, क्योंकि यह बाजार में एक बड़े मार्केट लीडर की प्रविष्टि को चिह्नित करेगा।

इन्वेस्टमेंट बैंकिंग सिंडिकेट और समयसीमा

इस मेगा आईपीओ के प्रबंधन के लिए 9 प्रमुख इन्वेस्टमेंट बैंकों का एक सिंडिकेट बनाया गया है। इसमें कोटक महिंद्रा कैपिटल, एक्सिस कैपिटल, जेफरीज, SBI कैपिटल, ICICI सिक्योरिटीज, मोतीलाल ओसवाल, HSBC सिक्योरिटीज, JM फाइनेंशियल और BofA सिक्योरिटीज शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि ड्राफ्ट पेपर अगले एक या दो दिनों में जमा किए जा सकते हैं। हालांकि, सेबी से मंजूरी मिलने के बाद कंपनी के पास इश्यू लॉन्च करने के लिए एक साल का समय होगा, और वास्तविक लॉन्च बाजार की स्थितियों पर निर्भर करेगा।

बड़ी लिस्टिंग के लिए नियामक ढांचा

केंद्र सरकार ने हाल ही में स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होने वाली बड़ी कंपनियों के लिए न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (MPS) के नियमों में संशोधन किया है। नए बहुस्तरीय ढांचे के तहत, बहुत बड़े बाजार पूंजीकरण वाली कंपनियों को आईपीओ के समय जनता को शेयरों का एक छोटा हिस्सा (जैसे 5% या 10%) पेश करने की अनुमति दी गई है, जिसे बाद में निर्धारित समय सीमा के भीतर बढ़ाकर 25% करना होता है। यह बदलाव SBIFML जैसी बड़ी कंपनियों के लिए लिस्टिंग प्रक्रिया को अधिक सुलभ बनाने के उद्देश्य से किया गया है।

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