पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर का राग अलापा है और इस विवाद की ओर दुनिया का ध्यान खींचने की कोशिश की है। शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को संबोधित करते हुए शहबाज शरीफ ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि दक्षिण एशिया कभी भी 2025 जैसी टकराव की स्थिति में न पहुंचे, कश्मीर मुद्दे का एक न्यायपूर्ण और निष्पक्ष समाधान होना अत्यंत आवश्यक है। अपने 23 मिनट के लंबे भाषण के दौरान, शरीफ ने कश्मीर विवाद और इंडस वॉटर ट्रीटी (सिंधु जल संधि) को लेकर भारत के खिलाफ जमकर जहर उगला। उनके संबोधन में भारत के खिलाफ प्रोपेगैंडा फैलाने की कोशिश की गई और साथ ही गीदड़भभकी भी दी गई।
यूएनजीए में कश्मीर का मुद्दा
शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर विवाद के न्यायपूर्ण और निष्पक्ष समाधान की पुरजोर मांग की। उन्होंने कहा कि कश्मीरी लोग पिछले आठ दशकों से संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनी देखरेख में स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह कराने के वादे को पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। शरीफ ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कश्मीरियों की कई पीढ़ियों ने अवैध कब्ज़े, मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने, बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्याओं, जबरदस्ती गायब किए जाने, यौन हिंसा और सामूहिक सजा जैसी स्थितियों का सामना किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक इस मुद्दे का समाधान नहीं होता, तब तक क्षेत्र में स्थिरता नहीं आ सकती और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर ध्यान देना चाहिए।
जनसांख्यिकीय बदलाव और मानवाधिकारों के दावे
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने आगे दावा किया कि हाल के समय में जनसांख्यिकीय बदलावों और अन्य अवैध उपायों के माध्यम से जम्मू-कश्मीर की कानूनी स्थिति को बदलने के प्रयास किए गए हैं। उन्होंने भावुक कार्ड खेलते हुए कहा कि बेबस कश्मीरी माता-पिता अपने उन बच्चों के लिए तड़पते हैं जो कभी घर वापस नहीं लौटते। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां के घर कर्फ्यू और गहरे दुख के साये में खामोश पड़े हैं। शरीफ ने कहा कि बहुत से लोगों के लिए कोई समाधान नहीं बचा है और उनकी पूरी ज़िंदगी उन कब्रों को खोजने में बीत जाती है जिन पर कोई नाम तक नहीं होता। इस मंच से उन्होंने कश्मीरी भाई-बहनों को भरोसा दिलाया कि पाकिस्तान उन्हें तब तक अपना पूरा राजनयिक, राजनीतिक और नैतिक समर्थन देता रहेगा जब तक उन्हें आत्मनिर्णय का अधिकार नहीं मिल जाता। उन्होंने कश्मीर को पाकिस्तान की जीवन-रेखा (जुगुलर वेन) करार दिया।
सिंधु जल संधि पर गीदड़भभकी
कश्मीर के अलावा शहबाज शरीफ ने सिंधु नदी प्रणाली के पानी को लेकर भी भारत को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया में स्थिरता का एक और आधार अब दबाव में है और सिंधु नदी का साझा पानी न केवल पाकिस्तान के लोगों के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए जीवन-रेखा के समान है। उन्होंने भारत द्वारा मौजूदा संधि को लेकर लिए गए फैसलों को एकतरफा और पूरी तरह से गैर-कानूनी बताया। शरीफ ने दावा किया कि भारत के दावों और कामों को संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों और हाल ही में कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने भी खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान का पक्ष यह है कि संधि अभी भी मान्य, बाध्यकारी और पूरी तरह से लागू है। उन्होंने सीधी धमकी देते हुए कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, उसमें बाधा डालने या उसका रास्ता बदलने की किसी भी कोशिश को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत को इस बारे में कोई गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए कि पानी का इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया जा सकता है।