शेख हसीना की यूएन में बड़ी याचिका, चुनाव रद्द करने और बैन हटाने की मांग

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शेख हसीना की यूएन में बड़ी याचिका, चुनाव रद्द करने और बैन हटाने की मांग
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बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर से बड़ा भूचाल आ गया है और देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने ढाका वापसी से पहले संयुक्त राष्ट्र का दरवाजा खटखटाया है। शेख हसीना की तरफ से संयुक्त राष्ट्र संघ में एक बहुत ही महत्वपूर्ण याचिका दाखिल की गई है जिसके माध्यम से उन्होंने कई कड़े कदम उठाने की मांग की है और इस याचिका के सामने आने के बाद बांग्लादेश की राजनीति और सरकार में हड़कंप मच गया है। शेख हसीना का कहना है कि वर्ष 2026 में जो बांग्लादेश में चुनाव हुए थे, वे पूरी तरह से अवैध थे और उन्हें तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में अपनी पार्टी आवामी लीग पर से प्रतिबंध हटाने की भी पुरजोर मांग की है ताकि राजनीतिक गतिविधियों को दोबारा शुरू किया जा सके।

बांग्लादेश जाने से पहले शेख हसीना द्वारा खेला गया यह एक बहुत बड़ा राजनीतिक दांव माना जा रहा है और हसीना ने अपनी पार्टी अवामी लीग पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ सीधे संयुक्त राष्ट्र में याचिका दाखिल की है। पार्टी का यह स्पष्ट कहना है कि इस समय बांग्लादेश की अदालतों में किसी भी प्रकार से न्याय मिल पाना बेहद मुश्किल और असंभव है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र के मंच पर इसकी सुनवाई होनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से ही आवामी लीग पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए गए थे। इसके बाद वर्ष 2026 के चुनाव में तमाम तरह की राजनीतिक कवायदों और कोशिशों के बावजूद आवामी लीग को चुनाव मैदान में उतरने की बिल्कुल भी इजाजत नहीं दी गई थी, जिससे पार्टी के अस्तित्व पर बड़ा संकट खड़ा हो गया था।

बांग्लादेश के प्रतिष्ठित अखबार मानवजीवन के मुताबिक शेख हसीना की इस उच्च स्तरीय याचिका से वर्तमान तारिक रहमान सरकार की मुश्किलें और टेंशन काफी ज्यादा बढ़ सकती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि हसीना ने अपनी याचिका में सीधे तौर पर तारिक रहमान की सरकार को पूरी तरह से अवैध करार दिया है। याचिका में विस्तार से उन तर्कों को रखा गया है जिनके आधार पर इस सरकार के गठन और वैधानिकता पर सवालिया निशान लगाए गए हैं। शेख हसीना की तरफ से दाखिल की गई इस याचिका में कहा गया है कि बांग्लादेश की वर्तमान सरकार नागरिकों के बुनियादी अधिकारों का खुलेआम उल्लंघन कर रही है।

याचिका में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से संबंधित अनुच्छेद 19, शांतिपूर्ण सभा करने के अधिकार से संबंधित अनुच्छेद 21, संगठन बनाने की स्वतंत्रता से संबंधित अनुच्छेद 22 और नागरिकों के राजनीतिक अधिकारों से संबंधित अनुच्छेद 25 का गंभीर उल्लंघन कर रही है। हसीना का यह भी कहना है कि उनकी पार्टी अवामी लीग बांग्लादेश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी है, लेकिन इसके बावजूद उसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लेने और चुनाव ही नहीं लड़ने दिया जा रहा है। उनका साफ तौर पर मानना है कि यह सीधे तौर पर उनके और उनके समर्थकों के राजनीतिक अधिकारों का घोर हनन है।

इसके अलावा शेख हसीना ने एक बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि तारिक रहमान की सरकार आज इसलिए बांग्लादेश की सत्ता में आ पाई है, क्योंकि वहां पर आवामी लीग के उम्मीदवार मैदान में उतरने की तैयारी में थे और चुनावी समीकरण अलग थे और हसीना का दावा है कि यदि आवामी लीग को स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की पूरी अनुमति मिल जाती, तो तारिक रहमान कभी भी प्रधानमंत्री की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाते। इस प्रकार उन्होंने वर्तमान सरकार के जनादेश की वैधता को ही पूरी तरह से चुनौती दे डाली है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए शेख हसीना की तरफ से संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रसिद्ध वकील स्टीवन पॉवेल्स केसी (किंग्स काउंसल) ने यह याचिका दाखिल की है। याचिका में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि तारिक रहमान की सरकार सत्ता में आने के बाद से हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि बांग्लादेश में कोई भी स्थानीय वकील आवामी लीग के कार्यकर्ताओं या नेताओं का केस लड़ने के लिए तैयार नहीं हो रहा है। याचिका में यह भी बताया गया है कि जो भी वकील या मानवाधिकार कार्यकर्ता इस मामले में आगे आने की हिम्मत दिखाते हैं, उन पर तुरंत जानलेवा हमले किए जाते हैं।

इन तमाम वजहों से हसीना का यह कहना है कि इस वक्त बांग्लादेश के भीतर उन्हें और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को किसी भी सूरत में न्याय मिल पाना संभव नहीं है। यही कारण है कि उन्हें मजबूरन संयुक्त राष्ट्र का सहारा लेना पड़ा है। अपनी इस याचिका के माध्यम से हसीना ने मुख्य रूप से दो बड़ी मांगें रखी हैं और पहली मांग यह है कि बांग्लादेश में आवामी लीग को दोबारा चुनाव लड़ने की आधिकारिक परमिशन दिलाई जाए और दूसरी मांग यह है कि देश में फिर से निष्पक्ष चुनाव कराए जाएं ताकि सही मायने में लोकतंत्र की बहाली हो सके।

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