कमोडिटी बाजार में शुक्रवार 30 जनवरी को एक ऐसा मंजर देखने को मिला जिसने अनुभवी निवेशकों के भी होश उड़ा दिए। चांदी की कीमतों में आई इस सुनामी ने पिछले कई महीनों की बढ़त को महज कुछ घंटों में स्वाहा कर दिया। जो चांदी कुछ समय पहले तक रॉकेट की रफ्तार से भाग रही थी, वह अचानक औंधे मुंह गिर गई। इस गिरावट ने न केवल निवेशकों की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि बाजार में एक डर का माहौल पैदा कर दिया है कि क्या हम एक बार फिर 1980 जैसे किसी बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहे हैं।
एक दिन में ₹96,000 की महा-गिरावट
शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमतों में जो गिरावट दर्ज की गई, वह इतिहास के पन्नों में काले अक्षरों में दर्ज होगी। मार्च एक्सपायरी वाली चांदी अपने उच्चतम स्तर से करीब 24 फीसदी यानी 96,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक टूट गई और भाव गिरकर 3,03,916 रुपये के स्तर पर आ गया। यह गिरावट इसलिए भी डरावनी है क्योंकि पिछले कुछ दिनों में चांदी ने जितनी तेजी दिखाई थी, उससे कहीं अधिक तेजी से यह नीचे गिरी है। सोने में भी इसका असर दिखा और गोल्ड फ्यूचर्स में 9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
1980 का 'हंट ब्रदर्स' कांड और आज का बाजार
बाजार के दिग्गज इस गिरावट की तुलना 1980 के उस दौर से कर रहे हैं, जिसने ग्लोबल अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया था और उस समय चांदी की कीमतों में आए असामान्य उछाल और फिर उसके औंधे मुंह गिरने के पीछे अमेरिका के दो अरबपति भाइयों 'हंट ब्रदर्स' (हर्बर्ट और बंकर हंट) का हाथ था। 1970 के दशक में जब गोल्ड स्टैंडर्ड खत्म हुआ, तो हंट भाइयों ने चांदी को 'सुरक्षित निवेश' मानकर भारी मात्रा में खरीदना शुरू किया।
क्या था 'सिल्वर थर्सडे' का खौफ?
1973 से 1979 के बीच हंट भाइयों ने दुनिया की कुल चांदी का एक-तिहाई हिस्सा अपने नियंत्रण में ले लिया था। नतीजा यह हुआ कि चांदी की कीमत 1. 95 डॉलर से बढ़कर 50 डॉलर पर पहुंच गई। लेकिन जब अमेरिकी नियामकों ने नियम कड़े किए, तो 27 मार्च 1980 को चांदी की कीमत एक ही दिन में 50 फीसदी गिर गई और इसे आज भी 'सिल्वर थर्सडे' के नाम से जाना जाता है। आज के हालात भी कुछ वैसे ही नजर आ रहे हैं,। जहां अत्यधिक सट्टेबाजी ने कीमतों को कृत्रिम रूप से बढ़ा दिया था।
क्यों आई चांदी में इतनी बड़ी गिरावट?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि चांदी हमेशा से एक 'हाई-बीटा' कमोडिटी रही है, जिसमें उतार-चढ़ाव बहुत तेज होता है और इस गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। पहला, निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर की गई मुनाफावसूली। दूसरा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन के नाम का ऐलान, जिससे डॉलर इंडेक्स में मजबूती आई है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोने और चांदी जैसी धातुओं की मांग और कीमत दोनों कम हो जाती हैं।
निवेशकों के लिए आगे की राह
विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी में आई यह गिरावट उन लोगों के लिए एक चेतावनी है जो बिना सोचे-समझे सट्टेबाजी में पैसा लगाते हैं और हालांकि इंडस्ट्रियल डिमांड और सोलर पैनल सेक्टर में चांदी की खपत बढ़ रही है, लेकिन बाजार की अस्थिरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी बड़े निवेश से पहले बाजार के रुख को समझें और स्टॉप-लॉस का अनिवार्य रूप से पालन करें।