पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के साथ ही राज्य में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान नाम काटे जाने के मुद्दे पर बुधवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन सदन में चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की। इस बैठक के बाद टीएमसी सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर बेहद गंभीर और अपमानजनक व्यवहार करने के आरोप लगाए हैं। प्रतिनिधिमंडल में सांसद डेरेक ओ’ब्रायन, सागरिका घोष, साकेत गोखले और मेनका गुरुस्वामी शामिल थे।
7 मिनट की बैठक और 'गेट लॉस्ट' का दावा
टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ यह मुलाकात केवल सात मिनट तक चली। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सांसदों ने अपनी बात रखनी चाही, तो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उन्हें 'गेट लॉस्ट' (Get Lost) कहकर बाहर जाने को कह दिया। ओ’ब्रायन ने इसे लोकतंत्र और संसदीय मर्यादा का अपमान बताते हुए कहा कि उन्होंने चुनाव प्रक्रिया से संबंधित चिंताओं को लेकर आयोग को 9 पत्र लिखे थे और 6 स्पष्ट उदाहरण दिए थे, लेकिन आयोग की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। टीएमसी ने मांग की है कि चुनाव आयोग इस बैठक का ऑडियो या वीडियो फुटेज सार्वजनिक करे ताकि सच्चाई सामने आ सके।
चुनाव आयोग के सूत्रों का पलटवार
दूसरी ओर, चुनाव आयोग के सूत्रों ने टीएमसी के दावों को सिरे से खारिज करते हुए सांसदों के आचरण पर सवाल उठाए हैं। सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने चिल्लाना शुरू कर दिया था और आयोग की गरिमा के विपरीत व्यवहार किया। बताया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने सांसदों से केवल मर्यादा बनाए रखने का अनुरोध किया था और कहा था कि आयोग कक्ष में चिल्लाना और अभद्र व्यवहार करना उचित नहीं है। आयोग के सूत्रों का कहना है कि सांसदों को बाहर जाने के लिए नहीं कहा गया, बल्कि उन्हें शालीनता से अपनी बात रखने की सलाह दी गई थी।
साकेत गोखले की चुनौती और राजनीतिक नोटिस
टीएमसी नेता साकेत गोखले ने सोशल मीडिया के माध्यम से आयोग के दावों को 'झूठा और बेबुनियाद' करार दिया है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं बैठक में उपस्थित थे और ऐसी कोई चिल्ला-चोट नहीं हुई थी। गोखले ने चुनाव आयोग को चुनौती दी कि वे बैठक का लिखित विवरण या रिकॉर्डिंग जारी करें, अन्यथा पार्टी स्वयं विवरण सार्वजनिक करेगी और इसके साथ ही, टीएमसी ने घोषणा की है कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों की एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी बुलाई गई है।
मतदाता सूची और अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल
तृणमूल कांग्रेस द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान जानबूझकर कुछ वर्गों के नाम हटाए जा रहे हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि राज्य में तैनात कुछ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी निष्पक्ष रूप से कार्य नहीं कर रहे हैं और एक विशेष राजनीतिक दल के पक्ष में झुकाव रख रहे हैं। टीएमसी ने मांग की है कि संदिग्ध अधिकारियों का तत्काल स्थानांतरण किया जाए और चुनाव प्रक्रिया में मतदाताओं का भरोसा बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
चुनाव आयोग की 'भयमुक्त चुनाव' की प्रतिबद्धता
विवादों के बीच चुनाव आयोग ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव पूरी तरह से भयमुक्त, हिंसा मुक्त और प्रलोभन मुक्त वातावरण में संपन्न कराए जाएंगे। आयोग ने स्पष्ट किया कि बूथ जाम करने, मतदाताओं को धमकाने या किसी भी प्रकार के बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने के लिए सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल 2026 को मतदान होना निर्धारित है, जिसके परिणाम 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे।