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टीएमसी में बड़ी फूट: 20 बागी सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला से की मुलाकात, एनसीपीआई में विलय का ऐलान

टीएमसी में बड़ी फूट: 20 बागी सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला से की मुलाकात, एनसीपीआई में विलय का ऐलान
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रही अंदरूनी कलह अब एक बड़े राजनीतिक संकट में बदल गई है। रविवार शाम को टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने नई दिल्ली में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की और आधिकारिक तौर पर नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में अपने विलय की घोषणा कर दी। यह घटनाक्रम टीएमसी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि बागी सांसदों की यह संख्या पार्टी के कुल सांसदों के दो-तिहाई से भी अधिक है, जिससे उन पर दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई का खतरा कम हो गया है।

भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई महत्वपूर्ण बैठक

इस बड़े राजनीतिक उलटफेर की पटकथा रविवार को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर लिखी गई। वहां टीएमसी के बागी सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें भाजपा सांसद निशिकांत दुबे भी उपस्थित थे। इस बैठक में आगे की रणनीति और कानूनी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के बाद सांसद काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय और शताब्दी रॉय के नेतृत्व में सभी बागी सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलने उनके आवास पर पहुंचे।

एनसीपीआई में विलय और एनडीए को समर्थन

सूत्रों के अनुसार, बागी गुट ने नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया में विलय का निर्णय लिया है, जिसकी उपस्थिति असम, त्रिपुरा, बंगाल और उत्तर-पूर्व के राज्यों में है। स्पीकर से मुलाकात के बाद काकोली घोष दस्तीदार ने मीडिया से कहा, "हम टीएमसी से चुने गए 20 सांसद स्पीकर से मिले और अलग बैठने का अनुरोध करते हुए एक पत्र सौंपा है। ये 20 सांसद हमारी कुल संख्या का दो-तिहाई से ज्यादा हैं। हम नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी के साथ विलय कर रहे हैं।

कानूनी लड़ाई और भविष्य की रणनीति

बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने जानकारी दी कि विलय के लिए हस्ताक्षर सहित आवेदन पत्र स्पीकर को सौंप दिया गया है। उन्होंने बताया कि 20 जुलाई को लोकसभा का सत्र शुरू होने से पहले उन्हें अलग ब्लॉक और दफ्तर आवंटित किए जाने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि असली तृणमूल कौन है, इसका फैसला अंततः अदालत में होगा और वे अदालत के फैसले का सम्मान करेंगे। स्पीकर से मिलने वाले सांसदों में काकली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, सुदीप बनर्जी, सयानी घोष, माला रॉय, अरूप चक्रवर्ती, घाटल के सांसद दीपक अधिकारी (देव), यूसुफ पठान, जून माल्या, प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, मिताली बाग, अबू ताहिर और खलिलुर्कहमान प्रमुख रूप से शामिल थे।

अभिषेक बनर्जी और सौगत रॉय की प्रतिक्रिया

दूसरी ओर, टीएमसी नेतृत्व ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है। सांसद अभिषेक बनर्जी की ओर से सांसद कीर्ति झा आजाद और सागरिका घोष ने स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर एक पत्र सौंपा, जिसमें बागी गुट को मान्यता न देने की अपील की गई है। उन्होंने इसे संविधान और कानून के खिलाफ बताया। वहीं, वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "ये लोग हमारी पार्टी छोड़ चुके हैं। अगर वे पश्चिम बंगाल में ऑपरेशन लोटस के प्रभारी भाजपा नेताओं से मिलते हैं, तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं है। " जानकारों का मानना है कि कानूनी पेचीदगियों से बचने के लिए ही बागी सांसदों ने अलग गुट बनाने के बजाय एक स्थापित पार्टी में विलय का रास्ता चुना है।

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