सरकारी पैसे से ट्रंप का पुराना चुनावी विज्ञापन हुआ ऑन एयर, अमेरिका में विवाद शुरू

Add as Preferred Source on Google News →
विज्ञापन
सरकारी पैसे से ट्रंप का पुराना चुनावी विज्ञापन हुआ ऑन एयर, अमेरिका में विवाद शुरू
विज्ञापन

अमेरिका में इन दिनों डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा सरकारी विज्ञापनों के लिए करदाताओं के पैसे का उपयोग करने को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जानकारी के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 2024 के चुनाव अभियान में इस्तेमाल किए गए एक विज्ञापन से मिलता-जुलता वीडियो अब अमेरिकी सरकार के खर्च पर टीवी पर प्रसारित किया जा रहा है। इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है और कई सांसदों ने सरकारी धन के इस तरह के उपयोग पर कड़े सवाल उठाए हैं।

विज्ञापन की सामग्री और ट्रंप का संदेश

विवाद के केंद्र में मौजूद यह विज्ञापन 30 सेकंड का है। इस वीडियो में डोनाल्ड ट्रंप को एक गलियारे में चलते हुए दिखाया गया है। विज्ञापन के बैकग्राउंड में उनकी आवाज सुनाई देती है, जिसमें वह एक विशेष संदेश दे रहे हैं। अपने इस संदेश में वह ‘ग्लोबलिस्ट्स’ और ‘वॉरमॉन्गर्स’ के खिलाफ अपनी लड़ाई का जिक्र करते हैं। विज्ञापन का फिल्मांकन और उसमें इस्तेमाल की गई भाषा काफी प्रभावशाली रखी गई है, जो दर्शकों का ध्यान आकर्षित करती है।

इस विज्ञापन के अंत में एक महत्वपूर्ण डिस्क्लेमर दिखाई देता है, जिस पर लिखा है- “Paid for by the US Government”। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस विज्ञापन को बनाने और इसे टीवी चैनलों पर दिखाने का पूरा खर्च अमेरिकी सरकार ने वहन किया है। यही वह मुख्य बिंदु है जिसने आलोचकों और विपक्षी सांसदों को सरकार पर निशाना साधने का मौका दिया है, क्योंकि वे इसे सरकारी धन का अनुचित उपयोग मान रहे हैं।

लाखों डॉलर का खर्च और आंकड़ों का विश्लेषण

विज्ञापन खर्च पर पैनी नजर रखने वाली कंपनी AdImpact के आंकड़ों से इस विज्ञापन पर हुए कुल खर्च का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस विज्ञापन पर अब तक लगभग 3 लाख 19 हजार डॉलर खर्च किए जा चुके हैं। अमेरिकी राजनीति में विज्ञापन पर होने वाला यह खर्च काफी चर्चा में है। आलोचकों का कहना है कि 3 लाख 19 हजार डॉलर जैसी बड़ी रकम का उपयोग राजनीतिक संदेश फैलाने के बजाय जनहित के अन्य आवश्यक कार्यों में किया जाना चाहिए था।

चुनावी अभियान से समानता

यह नया विज्ञापन काफी हद तक उस विज्ञापन के समान है जो 2024 में ट्रंप के चुनाव अभियान के दौरान प्रसारित किया गया था। उस समय के विज्ञापनों में भी ट्रंप को इसी तरह के अंदाज में दिखाया गया था और लोगों से उनकी ‘अमेरिका के लिए लड़ाई’ में शामिल होने की भावुक अपील की गई थी। वर्तमान विज्ञापन की शैली, दृश्य और ट्रंप का संबोधन पुराने चुनावी विज्ञापनों की हूबहू नकल जैसा प्रतीत होता है, जिससे यह विवाद और गहरा गया है कि क्या सरकार चुनावी प्रचार को ही सरकारी विज्ञापन के रूप में चला रही है।

विज्ञापनों की एक पूरी श्रृंखला

यह केवल एक अकेला विज्ञापन नहीं है जिसे सरकार वर्तमान में चला रही है। ट्रंप प्रशासन पिछले कुछ दिनों से टीवी पर विज्ञापनों की एक पूरी सीरीज चला रहा है। एक अन्य विज्ञापन में माउंट रशमोर के रात के समय के शानदार वीडियो दिखाए गए हैं और इस विज्ञापन में 4 जुलाई के अवसर पर ट्रंप द्वारा दिए गए भाषण के कुछ चुनिंदा हिस्सों को शामिल किया गया है। राष्ट्रीय स्मारकों और देशभक्ति से जुड़े प्रतीकों का उपयोग इन विज्ञापनों में प्रमुखता से किया गया है।

इसके अलावा, एक और विज्ञापन में ट्रंप के बयानों के माध्यम से टैक्स में कटौती, अमेरिका में विनिर्माण यानी ज्यादा सामान बनाने और पुलिस एवं कानून-व्यवस्था की रक्षा जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया है। ये सभी मुद्दे ट्रंप की राजनीतिक विचारधारा और उनके चुनावी वादों के मुख्य स्तंभ रहे हैं। इन्हें सरकारी विज्ञापन में शामिल करना सांसदों की चिंता का विषय बना हुआ है क्योंकि वे इसे नीति प्रचार के बजाय राजनीतिक प्रचार मान रहे हैं।

व्हाइट हाउस का पक्ष और बचाव

व्हाइट हाउस ने इन विज्ञापनों पर उठ रहे सभी सवालों का पुरजोर बचाव किया है। प्रशासन का कहना है कि ये विज्ञापन चुनावी नहीं हैं, बल्कि इन्हें ‘पब्लिक सर्विस अनाउंसमेंट’ यानी जनसेवा घोषणाओं की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। व्हाइट हाउस के प्रवक्ताओं के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप वर्तमान में किसी भी चुनाव के लिए आधिकारिक उम्मीदवार नहीं हैं, इसलिए इन विज्ञापनों को चुनावी प्रचार नहीं माना जा सकता।

व्हाइट हाउस ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन विज्ञापनों में कहीं भी लोगों से वोट देने या किसी विशेष राजनीतिक अभियान का हिस्सा बनने के लिए सीधे तौर पर नहीं कहा जा रहा है। उनके अनुसार, राष्ट्रपति का संवैधानिक काम अपनी नीतियों और देश के प्रति अपने दृष्टिकोण को जनता तक पहुँचाना है, और ये विज्ञापन उसी सूचनात्मक प्रक्रिया का एक हिस्सा हैं। प्रशासन का मानना है कि जनता को सरकार के कार्यों के बारे में जानने का पूरा अधिकार है।

आलोचना और ऐतिहासिक उदाहरण

विज्ञापनों के आलोचकों का तर्क है कि सरकारी पैसे का उपयोग राष्ट्रपति की व्यक्तिगत छवि चमकाने और उनके विशिष्ट राजनीतिक एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए करना नैतिक रूप से गलत है। उनका कहना है कि भले ही तकनीकी रूप से ट्रंप अभी उम्मीदवार न हों, लेकिन इन विज्ञापनों का प्रभाव और संदेश पूरी तरह से राजनीतिक है। सांसदों ने इस पर चिंता जताई है कि यह करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग है।

इस आलोचना के जवाब में व्हाइट हाउस ने पूर्व राष्ट्रपतियों के कार्यकाल का हवाला दिया है ताकि यह साबित किया जा सके कि यह कोई नई बात नहीं है और उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश और वर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन के दौरान चलाए गए विभिन्न विज्ञापनों का उदाहरण दिया। व्हाइट हाउस का दावा है कि पिछली सरकारों ने भी अपनी नीतियों, सरकारी कार्यक्रमों और राष्ट्रीय उपलब्धियों को जनता तक पहुँचाने के लिए टीवी विज्ञापनों का सहारा लिया है। प्रशासन का मानना है कि वे केवल उसी स्थापित परंपरा का पालन कर रहे हैं जो अमेरिका में लंबे समय से चली आ रही है, जहाँ सरकार अपनी योजनाओं का प्रचार करती है।

विज्ञापन