पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक परिदृश्य एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई 60 दिनों की समयसीमा अब समाप्त हो गई है। अल अरबिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, कूटनीति का अवसर प्रभावी रूप से बंद हो गया है और तेहरान को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि बातचीत को अब और आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। जैसे-जैसे यह समयसीमा अपने अंतिम घंटों के करीब पहुंची, क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों में भारी वृद्धि देखी गई, जो इस बात का संकेत है कि स्थिति एक नाजुक मोड़ पर है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, इस बढ़ते तनाव का केंद्र बन गया है, जहां ईरानी स्पीडबोट्स, अमेरिकी सैन्य निगरानी और ड्रोन को मार गिराए जाने की घटनाओं ने एक विस्फोटक माहौल बना दिया है। सवाल यह है कि क्या दो महीने की गहन कूटनीति किसी अंतिम समझौते तक पहुंचेगी या अगले 24 घंटों के भीतर युद्ध के मैदान में फैसला होगा।
होर्मुज में ईरान की मॉस्किटो फ्लीट का शक्ति प्रदर्शन
0 की चिंगारी होर्मुज जलडमरूमध्य से उठ चुकी है और इस बार पहल ईरान की ओर से होती दिख रही है। हालिया सैटेलाइट तस्वीरों और जमीनी रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अटैक बोट्स का एक विशाल बेड़ा तैनात किया है, जो उच्च स्तर की युद्ध तैयारी को दर्शाता है। होर्मुज जलडमरूमध्य के भीतर और आसपास IRGC नौसेना से जुड़ी लगभग 80 स्पीडबोट्स को गश्त करते हुए देखा गया है। यह तैनाती डोनाल्ड ट्रंप के उन पिछले दावों का सीधा जवाब मानी जा रही है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिकी हमलों में ईरानी नौसेना 100 प्रतिशत तबाह हो गई है। इस बेड़े की उपस्थिति, जिसे ईरान अपनी मॉस्किटो फ्लीट कहता है, उस विमर्श को चुनौती देती है और एक महत्वपूर्ण नौसैनिक क्षमता का प्रदर्शन करती है।
ईरानी नौसैनिक संपत्तियों की तकनीकी क्षमताएं
मॉस्किटो फ्लीट केवल छोटी नावों का समूह नहीं है; यह असममित युद्ध के लिए डिज़ाइन किया गया एक परिष्कृत नौसैनिक बल है। ये नावें फाइटर जेट, ड्रोन और यहां तक कि हेलीकॉप्टरों को निशाना बनाने में सक्षम हैं। विशेष रूप से, रजब मॉडल की नावें 185 किलोमीटर प्रति घंटा की गति तक पहुँच सकती हैं और 2 क्रूज मिसाइलें ले जा सकती हैं। अपने छोटे आकार के बावजूद, वे 700 किलोमीटर की रेंज वाली मिसाइलों को लॉन्च करने में सक्षम हैं। यह बेड़ा नस्र, कोसार, गादिर और जाफर मिसाइलों सहित विभिन्न मिसाइल प्रणालियों से लैस है। हाल ही में, ईरान ने इन नावों को अबू महदी मिसाइलों से लैस किया है, जिनकी मारक क्षमता 1000 किलोमीटर है। इसके अलावा, IRGC शाहिद सोलेमानी जहाज का उपयोग करता है, जो चार इंजनों की मदद से 59 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से चलता है। इस जहाज में एक विशेष क्रेन प्रणाली है जो एक साथ दर्जनों स्पीडबोट लॉन्च कर सकती है, जिससे कई मोर्चों पर हमले संभव हो जाते हैं जो अमेरिकी नौसैनिक सुरक्षा को चुनौती दे सकते हैं।
अमेरिकी सैन्य प्रतिक्रिया और CENTCOM के दावे
बढ़ती ईरानी गतिविधि के जवाब में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपनी निगरानी और रक्षात्मक उपायों को तेज कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर कम से कम 2 ईरानी वन-वे अटैक ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। CENTCOM के अनुसार, ये ड्रोन अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात के लिए सीधा खतरा पैदा कर रहे थे और आत्मरक्षा में उन्हें निशाना बनाया गया। पश्चिम एशिया के आसमान की निगरानी अमेरिकी वायु सेना के F-35A स्टील्थ फाइटर जेट्स द्वारा की जा रही है, जबकि युद्धपोत समुद्र में तैनात हैं। 80 ईरानी अटैक बोट्स की उपस्थिति, जो सभी युद्ध के लिए तैयार हैं, वाशिंगटन द्वारा एक गंभीर उकसावे के रूप में देखी जा रही है, विशेष रूप से तब जब कूटनीतिक समयसीमा समाप्त हो रही है। अमेरिकी सेना हाई अलर्ट पर है और वैश्विक व्यापार मार्गों में किसी भी व्यवधान को रोकने के लिए जलडमरूमध्य में हर हलचल पर नजर रख रही है।
तनाव का घटनाक्रम: फरवरी से जून तक का सफर
वर्तमान संकट पिछले दो महीनों के गहन सैन्य और कूटनीतिक घर्षण का परिणाम है। तनाव की शुरुआत 28 फरवरी को ऑपरेशन एपिक फ्युरी के दौरान हुई, जिसमें ईरानी ठिकानों पर 900 से अधिक बड़े हवाई हमले हुए, जिससे क्षेत्रीय तनाव अपने चरम पर पहुंच गया। 7 अप्रैल को, दो सप्ताह के लिए एक अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी। इसके बाद 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में कूटनीतिक समाधान का प्रयास किया गया। 12-13 अप्रैल की रात को 21 घंटे की निरंतर बातचीत के बावजूद, कोई बड़ा समझौता नहीं हो सका। 14 अप्रैल तक, अमेरिका ने नौसैनिक नाकेबंदी शुरू करके समुद्री दबाव बढ़ा दिया। पूरे मई के दौरान, एक समझौते का मसौदा तैयार करने के प्रयास किए गए, लेकिन ईरान की 24 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों का मुद्दा एक बड़ी बाधा बन गया। 1 जून से 5 जून के बीच, सैन्य टकराव फिर से शुरू हुआ, जिसमें कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले हुए और अमेरिका ने केश्म द्वीप और सिरिक में ईरानी रडार प्रतिष्ठानों को नष्ट करके जवाबी कार्रवाई की। अब, 7 जून 2026 तक, 60 दिनों की समयसीमा अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है।
पाकिस्तान की भूमिका और अंतिम चेतावनी
इस उच्च-स्तरीय तनाव के बीच, पाकिस्तान के एक अचानक कूटनीतिक कदम ने अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ईरानी गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी से मिलने तेहरान पहुंचे। नकवी कथित तौर पर पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का एक विशेष संदेश लेकर आए थे। हालांकि संदेश की सटीक सामग्री का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन व्यापक रूप से माना जाता है कि यह वर्तमान संकट से संबंधित है। अटकलें बताती हैं कि पाकिस्तान ट्रंप के लिए एक संदेशवाहक के रूप में काम कर रहा होगा, जो ईरान को बड़े पैमाने पर सैन्य हमलों से बचने के लिए समझौते की शर्तों को स्वीकार करने का आग्रह कर रहा है। जैसे-जैसे समयसीमा के अंतिम 24 घंटे बीत रहे हैं, दुनिया यह देखने के लिए इंतजार कर रही है कि क्या यह अंतिम कूटनीतिक प्रयास पूर्ण पैमाने पर युद्ध के प्रकोप को रोक सकता है।