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ईरान-अमेरिका युद्ध: ट्रंप ने 10 सूत्री प्रस्ताव को बताया फर्जी, दी भीषण बमबारी की चेतावनी

ईरान-अमेरिका युद्ध: ट्रंप ने 10 सूत्री प्रस्ताव को बताया फर्जी, दी भीषण बमबारी की चेतावनी
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ 10 शर्तों पर युद्धविराम (सीजफायर) घोषित होने की खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। ट्रंप ने इन खबरों को 'फेक न्यूज' और मनगढ़ंत बताते हुए कहा कि ईरान के साथ किसी भी प्रकार का 10 सूत्री समझौता नहीं हुआ है। राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी सेना और उसके एयरबेस अपनी वर्तमान स्थिति में बने रहेंगे और किसी भी सैन्य वापसी की योजना नहीं है और उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कूटनीतिक स्तर पर कोई ठोस समझौता नहीं होता है, तो ईरान पर फिर से बमबारी शुरू की जाएगी, जो पहले के हमलों की तुलना में कहीं अधिक घातक और विनाशकारी होगी।

ट्रंप ने मीडिया रिपोर्ट्स को बताया 'होक्स'

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी एक कड़े बयान में न्यूयॉर्क टाइम्स और सीएनएन जैसी मीडिया संस्थाओं पर निशाना साधा और उन्होंने आरोप लगाया कि इन मीडिया घरानों ने ईरान वार्ता को लेकर पूरी तरह से झूठा 10 सूत्री प्लान पेश किया है। ट्रंप के अनुसार, इस भ्रामक जानकारी का एकमात्र उद्देश्य शांति प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों को बदनाम करना और वार्ता को पटरी से उतारना है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को एक 'घिनौना होक्स' करार दिया और कहा कि अमेरिकी प्रशासन किसी भी ऐसी शर्त पर सहमत नहीं हुआ है जो देश के हितों के खिलाफ हो।

अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और 'घातक' चेतावनी

सैन्य रणनीति पर बात करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया कि सभी अमेरिकी सैन्य संपत्तियां, जिनमें जहाज, लड़ाकू विमान और सैन्य कर्मी शामिल हैं, अपनी जगह पर तैनात रहेंगे। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त गोला-बारूद और हथियार ईरान के आसपास के क्षेत्रों में मौजूद हैं ताकि जरूरत पड़ने पर दुश्मन का पूरी तरह से विनाश किया जा सके और ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर किसी कारण से समझौता विफल होता है, तो गोलाबारी फिर से शुरू होगी। उन्होंने दावा किया कि यह हमला इतना शक्तिशाली होगा जैसा दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा होगा। ट्रंप ने यह भी दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना और होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रखना उनकी प्राथमिकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की जवाबी कार्रवाई

ट्रंप के कड़े रुख के बाद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा बंद कर दिया है। इस कदम के कारण विभिन्न देशों के सैकड़ों व्यापारिक जहाज बीच समुद्र में फंस गए हैं। ईरान ने आधिकारिक तौर पर धमकी दी है कि उसकी अनुमति के बिना यदि कोई भी जहाज इस मार्ग से गुजरने की कोशिश करेगा, तो उसे निशाना बनाया जाएगा। ईरान का दावा है कि अमेरिका ने लेबनान को सीजफायर प्रक्रिया में शामिल करने का वादा किया था, जिससे वह अब पीछे हट रहा है।

लेबनान संकट और इजरायली हमले

क्षेत्रीय तनाव के बीच लेबनान का मुद्दा भी गरमा गया है। ईरान ने अमेरिका पर लेबनान के संदर्भ में झूठ बोलने का आरोप लगाया है। ईरान के अनुसार, प्रारंभिक चर्चाओं में लेबनान को भी सुरक्षा गारंटी के दायरे में रखा गया था, लेकिन अब अमेरिका इस बात से इनकार कर रहा है। इसी दौरान, इजरायली सेना ने लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए हैं और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन हमलों में अब तक 182 लोगों की मौत हो चुकी है। ईरान ने इन हमलों की निंदा करते हुए इसे अमेरिकी शह पर की गई कार्रवाई बताया है, जिससे शांति वार्ता के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

विवादित 10 सूत्री प्रस्ताव की प्रमुख शर्तें

मीडिया में प्रसारित जिस 10 सूत्री प्रस्ताव को ट्रंप ने फर्जी बताया है, उसमें ईरान की ओर से कई कड़ी शर्तें रखी गई थीं। इन शर्तों में ईरान पर भविष्य में किसी भी हमले न होने की गारंटी, होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का निरंतर नियंत्रण और यूरेनियम संवर्धन को अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति देने जैसी मांगें शामिल थीं। इसके अलावा, प्रस्ताव में ईरान पर लगे सभी प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिबंधों को हटाने, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को समाप्त करने और युद्ध में हुए नुकसान के लिए अमेरिका द्वारा मुआवजे के भुगतान की बात कही गई थी। प्रस्ताव में मध्य-पूर्व से अमेरिकी सेना की वापसी और हिजबुल्लाह के खिलाफ युद्ध को समाप्त करने की शर्त भी शामिल थी, जिसे ट्रंप प्रशासन ने पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है।

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