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UGC के नए नियमों पर बवाल: यूपी में सांसदों को भेजीं चूड़ियां, SC पहुंचा मामला

UGC के नए नियमों पर बवाल: यूपी में सांसदों को भेजीं चूड़ियां, SC पहुंचा मामला
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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी किए गए नए नियमों 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026' ने देशभर में एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और दिल्ली में सवर्ण समाज और जनरल कैटेगरी के छात्रों का विरोध प्रदर्शन उग्र होता जा रहा है। नई दिल्ली में यूजीसी मुख्यालय के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। है और प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कई स्तरों की बैरिकेडिंग की गई है।

उत्तर प्रदेश में विरोध की लहर और अनोखा प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों जैसे लखनऊ, रायबरेली, वाराणसी, मेरठ और प्रयागराज में। छात्रों और युवा संगठनों ने सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराया है। रायबरेली में विरोध का एक अनोखा तरीका देखने को मिला, जहां भाजपा किसान नेता रमेश बहादुर सिंह और गौरक्षा दल के अध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने सवर्ण सांसदों को चूड़ियां भेजकर अपना विरोध जताया और उनका कहना है कि ये नियम सवर्णों के अधिकारों का हनन करते हैं और सांसदों को इस पर चुप्पी तोड़नी चाहिए।

बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा और कुमार विश्वास का तंज

इस विवाद का असर प्रशासनिक स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इन नए नियमों के विरोध में अपने। पद से इस्तीफा दे दिया है, जिससे सरकार के भीतर भी हलचल मच गई है। वहीं, मशहूर कवि डॉ और कुमार विश्वास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक कविता के जरिए तीखा तंज कसा है। उन्होंने लिखा, 'चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा सवर्ण हूं... मेरा रोंया-रोंया उखाड़ लो राजा। ' उनकी यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और सवर्ण युवाओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका और कानूनी चुनौतियां

यूजीसी के इन नियमों को अब कानूनी चुनौती भी मिल गई है। एडवोकेट विनीत जिंदल ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें रेगुलेशन 3(सी) के कार्यान्वयन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है। याचिका में तर्क दिया गया है कि ये नियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता। का अधिकार) का उल्लंघन करते हैं और जनरल कैटेगरी के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि नियमों का मौजूदा ढांचा केवल कुछ विशेष वर्गों को सुरक्षा प्रदान। करता है, जबकि सभी छात्रों के लिए समान अवसर और इक्विटी हेल्पलाइन की सुविधा होनी चाहिए।

यूजीसी के नए नियमों में क्या है खास?

यूजीसी ने 13 जनवरी को जो नियम नोटिफाई किए हैं, उनका मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकना है और इसके तहत कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने का निर्देश दिया गया है। ये टीमें मुख्य रूप से SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों का निवारण करेंगी। हालांकि, विरोध का मुख्य कारण नियमों में किए गए तीन बड़े बदलाव हैं।

विवाद की जड़: तीन बड़े बदलाव

पहला बदलाव जातीय भेदभाव की परिभाषा को लेकर है। नए नियमों में स्पष्ट किया गया है कि जाति, धर्म, नस्ल या लिंग के आधार पर कोई भी पक्षपाती व्यवहार जो पढ़ाई में बाधा बने, वह दंडनीय होगा और दूसरा बड़ा बदलाव यह है कि अब इस परिभाषा में OBC छात्रों को भी शामिल कर लिया गया है, जो पहले के ड्राफ्ट में नहीं था। तीसरा और सबसे विवादित बदलाव यह है कि झूठी शिकायत करने पर सजा का प्रावधान हटा दिया गया है। आलोचकों का कहना है कि इससे नियमों का दुरुपयोग बढ़ेगा और सवर्ण छात्रों को बिना किसी आधार के निशाना बनाया जा सकता है।

सरकार का पक्ष और जगतगुरु की चेतावनी

बढ़ते विरोध के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया है कि सरकार किसी के भी साथ भेदभाव नहीं होने देगी और उन्होंने कहा कि इन नियमों का गलत इस्तेमाल करने का अधिकार किसी को नहीं होगा और उच्च शिक्षा में निष्पक्षता सुनिश्चित की जाएगी। दूसरी ओर, जगतगुरु परमहंस आचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इन नियमों को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि नियम वापस नहीं लिए गए, तो वे इच्छा मृत्यु की मांग करेंगे।

छात्रों और संगठनों की मांग

लखनऊ यूनिवर्सिटी के बाहर छात्रों ने 'काला कानून वापस लो' के नारे लगाए और संभल में केमिस्ट ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने काली पट्टी बांधकर बाइक रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि झूठी शिकायत पर सजा का प्रावधान हटाना शिक्षण संस्थानों में अराजकता पैदा करेगा। उनका कहना है कि यदि कोई छात्र किसी के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण शिकायत करता है, तो उस पर भी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि न्याय का संतुलन बना रहे। फिलहाल, सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं।

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