ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच गया है और दोनों देशों के बीच चल रहा सीज़फायर अब आधिकारिक रूप से खत्म हो गया है और इसके साथ ही शांति समझौता भी रद्द कर दिया गया है। इस घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में अस्थिरता की स्थिति पैदा कर दी है और यह तनाव तब शुरू हुआ जब होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर ईरानी हमला हुआ, जिसके जवाब में अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाते हुए सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुना।
होर्मुज स्ट्रेट विवाद और अमेरिकी कार्रवाई
होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान द्वारा किए गए हमले के बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई की। अमेरिकी सेना ने मंगलवार और बुधवार को ईरान के अलग-अलग शहरों को निशाना बनाते हुए हमले किए। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को चोट पहुँचाना और जहाजों पर हुए हमलों का बदला लेना था। अमेरिकी प्रशासन ने इन हमलों को अपनी सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों की रक्षा के लिए उठाया गया कदम बताया है।
हताहतों का विवरण: 17 की मौत और 115 घायल
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार और बुधवार को हुए इन अमेरिकी हमलों में हुए नुकसान का आधिकारिक आंकड़ा जारी किया है। मंत्रालय के अनुसार, अमेरिकी सेना द्वारा दो दिनों तक किए गए इन हमलों में कुल 17 लोगों की मौत हो गई है। ये मौतें ईरान के 6 अलग-अलग शहरों में हुई हैं जहाँ अमेरिका ने बमबारी की थी। मौतों के अलावा, स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी है कि इन हमलों में 115 लोग घायल हुए हैं। घायलों में से कई की स्थिति गंभीर बताई जा रही है और उन्हें विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज जारी है।
ईरान का पलटवार: कुवैत और बहरीन में हमले
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाया है। ईरान ने कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए कई हमले किए। ईरान की इस जवाबी कार्रवाई ने क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों के लिए खतरा बढ़ा दिया है। दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य टकराव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि अब यह संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित न रहकर क्षेत्रीय स्तर पर फैलता दिख रहा है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का सिलसिला जारी रहेगा और वह पहले की तरह पूर्ण युद्ध शुरू करने के पक्ष में नहीं हैं और हालांकि, ट्रंप ने ईरान के साथ किसी भी तरह की डील करने को समय की बर्बादी करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हालांकि वह युद्ध नहीं चाहते, लेकिन भविष्य में और हमलों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ट्रंप का यह बयान दर्शाता है कि अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई को जरूरत पड़ने पर जारी रख सकता है।
यूएई पर ईरान के गंभीर आरोप
इस सैन्य संघर्ष के बीच एक नया कूटनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है और ईरान के उप-विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने अमेरिका की इस आक्रामकता का समर्थन करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। ग़रीबाबादी ने सोशल मीडिया पर एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साझा किया है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी वाणिज्य विभाग द्वारा जारी इस नए दस्तावेज़ में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में समर्थन देने के बदले यूएई के लिए निर्यात नियंत्रण नियमों में ढील देने और उसके निर्यात दर्जे को बढ़ाने का उल्लेख है। ग़रीबाबादी ने इसे वॉशिंगटन की आधिकारिक स्वीकारोक्ति और अबू धाबी की विवादास्पद भूमिका बताया है। उन्होंने मांग की है कि इस अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी और कानूनी परिणामों के लिए यूएई को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।