ईरान पर हमले के लिए अमेरिका का बड़ा कदम, UK बेस से तैनात हुआ B1 बॉम्बर

Add as Preferred Source on Google News
विज्ञापन
ईरान पर हमले के लिए अमेरिका का बड़ा कदम, UK बेस से तैनात हुआ B1 बॉम्बर
विज्ञापन

ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने एक बहुत बड़ा सैन्य कदम उठाया है और ताजा रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड एयरबेस से लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम B 1 बॉम्बर तैनात किया है। इस विमान का मुख्य उद्देश्य ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों पर हमला करना बताया जा रहा है। इस सैन्य कार्रवाई के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है और ईरान ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उसके खिलाफ कोई और हमला हुआ, तो वह आंख के बदले आंख की नीति के तहत इसका करारा जवाब देगा।

ब्रिटिश एयरबेस का रणनीतिक उपयोग

अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड एयरबेस से B 1 बॉम्बर उड़ाकर ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को और अधिक तेज कर दिया है। इसे ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम के कार्यकाल में यूनाइटेड किंगडम से शुरू हुआ पहला बड़ा अमेरिकी मिशन माना जा रहा है। Axios की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि इस B 1 बॉम्बर का इस्तेमाल विशेष रूप से ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया गया था। B 1 बॉम्बर अमेरिकी वायुसेना का एक अत्यंत शक्तिशाली विमान है जो एक साथ 24 तक 2000 पाउंड के भारी भरकम बम ले जाने की क्षमता रखता है।

रक्षात्मक हमलों के लिए मिली अनुमति

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन ने अमेरिका को RAF फेयरफोर्ड और हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया एयरबेस का उपयोग रक्षात्मक हमलों के लिए जारी रखने की अनुमति दे दी है। हालांकि, इस फैसले को लेकर ब्रिटिश सरकार के भीतर कुछ मतभेद भी उभर कर सामने आए हैं। इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सीधी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी जहाज पर हमला किया गया, तो अमेरिका ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, जैसे कि पुलों और बिजली संयंत्रों को अपना निशाना बना सकता है।

सीमा पर हमला और ईरान की जवाबी धमकी

इराक के शालमचेह बॉर्डर क्रॉसिंग पर हुए एक अमेरिकी हमले में 2 लोगों की मौत और 11 लोगों के घायल होने की दुखद खबर सामने आई है। इस घटना के बाद ईरान का रुख और भी सख्त हो गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ईरान का सिद्धांत आंख के बदले आंख है और किसी भी हमले का पूरी ताकत के साथ जवाब दिया जाएगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जो देश इन हमलों में अमेरिका की मदद करेंगे, उन्हें भी वैध सैन्य लक्ष्य माना जाएगा।

हाई अलर्ट और भारी रक्षा बजट

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए पूरे मिडिल ईस्ट में लड़ाकू विमानों और बॉम्बर्स को हाई अलर्ट पर रखा गया है। इसी दौरान, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 1 ट्रिलियन और 150 अरब डॉलर का रक्षा नीति विधेयक भी पारित कर दिया है। इस भारी भरकम फंड से पेंटागन और खुफिया एजेंसियों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिलेगी। दूसरी ओर, न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि ईरान द्वारा किए गए जवाबी हमलों में अमेरिकी ठिकानों को भी नुकसान पहुंचा है और इन घटनाओं से यह साफ जाहिर होता है कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय लगातार एक खतरनाक मोड़ ले रहा है।

विज्ञापन