वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच व्यापारिक संबंधों में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ एक व्यापक व्यापार समझौते की घोषणा की है, जिसके तहत भारत पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर दिया गया है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई एक महत्वपूर्ण टेलीफोनिक बातचीत के बाद लिया गया है। इस समझौते का उद्देश्य न केवल द्विपक्षीय व्यापार को सुगम बनाना है, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरणों, विशेष रूप से रूस-यूक्रेन संघर्ष को प्रभावित करना भी है।
व्हाइट हाउस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, भारत पर लगा प्रभावी टैरिफ जो पहले कुल 50% तक पहुंच गया था, अब उसमें भारी कटौती की जाएगी। इसमें 25% का मूल टैरिफ और रूस से तेल खरीदने के कारण लगाया गया 25% का अतिरिक्त पेनाल्टी टैरिफ शामिल था। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि भारत अब रूस से तेल की खरीद को पूरी तरह बंद करने और इसके विकल्प के रूप में अमेरिका और संभवतः वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाने पर सहमत हो गया है।
टैरिफ संरचना में बदलाव और पेनाल्टी हटाने का निर्णय
व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि अमेरिका भारत पर लगाए गए 25% के अतिरिक्त पेनाल्टी टैरिफ को हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा। यह पेनाल्टी भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल के आयात को जारी रखने के कारण लगाई गई थी। अब जबकि भारत ने रूसी तेल खरीद को शून्य पर लाने की प्रतिबद्धता जताई है, अमेरिकी प्रशासन ने इस दंडात्मक शुल्क को वापस लेने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, सामान्य व्यापारिक वस्तुओं पर लगने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ को भी 25% से घटाकर 18% कर दिया गया है। विश्लेषकों के अनुसार, इस कदम से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बड़ी राहत मिलेगी और 'मेड इन इंडिया' उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
ऊर्जा सुरक्षा और रूसी तेल पर भारत का रुख
इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू भारत की ऊर्जा रणनीति में बदलाव है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर साझा किया कि प्रधानमंत्री मोदी रूस से तेल की खरीद बंद करने पर राजी हो गए हैं। ट्रंप के अनुसार, यह कदम यूक्रेन में चल रहे युद्ध के वित्तपोषण को रोकने के अमेरिकी प्रयासों का हिस्सा है। भारत अब अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अमेरिका से अधिक तेल खरीदेगा और इसके अतिरिक्त, यदि आवश्यक हुआ, तो भारत वेनेजुएला से भी तेल आयात कर सकता है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यह समझौता रूसी तेल खरीद को केवल कम करने के बारे में नहीं, बल्कि इसे पूरी तरह समाप्त करने के बारे में है।
500 अरब डॉलर का 'बाय अमेरिकन' समझौता
आर्थिक मोर्चे पर, राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि भारत 'बाय अमेरिकन' नीति के तहत अमेरिका से 500 अरब डॉलर (लगभग ₹46 लाख करोड़) से अधिक मूल्य के सामान और सेवाएं खरीदेगा। यह विशाल व्यापारिक प्रतिबद्धता अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने और दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन को सुधारने के उद्देश्य से की गई है। 4 अरब लोगों के लिए एक बड़ी जीत बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर राष्ट्रपति ट्रंप का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि टैरिफ में कटौती से भारतीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
द्विपक्षीय संबंधों का नया अध्याय और वैश्विक प्रभाव
राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना 'करीबी दोस्त' और एक 'शक्तिशाली नेता' बताया है। उन्होंने कहा कि दोनों नेता ऐसे व्यक्ति हैं जो केवल वादे नहीं करते, बल्कि काम करके दिखाते हैं और विश्लेषकों के अनुसार, यह समझौता रूस के लिए एक बड़ा आर्थिक झटका हो सकता है, क्योंकि भारत उसके तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका और भारत के बीच यह रणनीतिक साझेदारी रक्षा, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करेगी। व्हाइट हाउस का मानना है कि इस समझौते से न केवल व्यापार बढ़ेगा, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता की दिशा में भी एक बड़ा कदम उठाया गया है।
निष्कर्ष के तौर पर, यह व्यापार समझौता भारत-अमेरिका संबंधों में एक नए युग की शुरुआत का संकेत देता है। जहां भारत को कम टैरिफ और पेनाल्टी से राहत मिली है, वहीं अमेरिका ने अपनी ऊर्जा निर्यात क्षमता और भू-राजनीतिक लक्ष्यों को साधने में सफलता प्राप्त की है और आने वाले समय में इस समझौते के कार्यान्वयन और इसके वैश्विक बाजार पर पड़ने वाले प्रभावों पर विशेषज्ञों की पैनी नजर रहेगी।