Nuclear Energy Bill: भारत के न्यूक्लियर एनर्जी बिल में अमेरिका की गहरी दिलचस्पी, जयशंकर-रूबियो वार्ता से चीन को लगेगी मिर्ची

Nuclear Energy Bill - भारत के न्यूक्लियर एनर्जी बिल में अमेरिका की गहरी दिलचस्पी, जयशंकर-रूबियो वार्ता से चीन को लगेगी मिर्ची
| Updated on: 14-Jan-2026 08:48 AM IST
भारत की संसद द्वारा हाल ही में पारित न्यूक्लियर एनर्जी बिल, 2025 में संयुक्त राज्य अमेरिका ने महत्वपूर्ण रुचि व्यक्त की है। यह महत्वपूर्ण विधायी विकास अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और भारत के विदेश मंत्री एस और जयशंकर के बीच हुई व्यापक बातचीत का एक केंद्रीय बिंदु था। उनकी विस्तृत चर्चाओं में न केवल असैन्य परमाणु सहयोग को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर भी बात हुई, एक ऐसा विषय जिससे बीजिंग में काफी बेचैनी बढ़ने की उम्मीद है। यह जुड़ाव वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच, विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के क्षेत्रों में, गहरी होती रणनीतिक साझेदारी को रेखांकित करता है।

न्यूक्लियर एनर्जी बिल में अमेरिका की रुचि

प्रधान उप प्रवक्ता टॉमी पिगोट के बयान के अनुसार, विदेश मंत्री रूबियो ने मंत्री जयशंकर को नए साल की शुभकामनाएं दीं और भारत को "सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया बिल, 2025" पारित करने पर बधाई दी। इस बिल ने अमेरिका का महत्वपूर्ण ध्यान आकर्षित किया है, जो इसे एक महत्वपूर्ण कदम मानता है। विदेश मंत्री रूबियो ने विशेष रूप से अमेरिका-भारत असैन्य परमाणु सहयोग को मजबूत करने, भारत के परमाणु क्षेत्र के भीतर अमेरिकी कंपनियों के लिए अवसरों का विस्तार करने, साझा ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने और महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं की लचीलापन और सुरक्षा सुनिश्चित करने में अमेरिका की रुचि व्यक्त की। यह रुचि भारत के बढ़ते परमाणु ऊर्जा परिदृश्य में पर्याप्त सहयोग और निवेश की संभावनाओं को उजागर करती है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर चर्चा

परमाणु ऊर्जा से परे, विदेश मंत्री रूबियो और मंत्री जयशंकर के बीच उच्च-स्तरीय चर्चा में क्षेत्रीय घटनाक्रम भी शामिल थे, जिसमें दोनों नेताओं ने विकसित हो रहे भू-राजनीतिक परिदृश्य पर अपने विचार साझा किए। उनकी बातचीत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत दोनों की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि के लिए समर्पित था। खुले नेविगेशन, अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की विशेषता वाले क्षेत्र के लिए यह साझा दृष्टिकोण, क्षेत्र में देखी गई कुछ विस्तारवादी प्रवृत्तियों के लिए एक सीधा प्रतिवाद है और एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत पर जोर एक स्पष्ट संकेत है जिससे चीन से कड़ी प्रतिक्रिया आने की उम्मीद है, जो ऐसी चर्चाओं को संदेह की दृष्टि से देखता है और अक्सर उन्हें अपने प्रभाव को रोकने के प्रयासों के रूप में व्याख्या करता है।

द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को मजबूत करना

दोनों विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत में द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को बढ़ाने के रास्ते भी तलाशे गए। विदेश मंत्री रूबियो और जयशंकर ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते की चल रही बातचीत पर चर्चा की, जो आर्थिक जुड़ाव को गहरा करने की आपसी इच्छा का संकेत है। इसके अलावा, उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के व्यापक अवसरों का पता लगाया। व्यापार और आर्थिक साझेदारी पर यह ध्यान रणनीतिक और ऊर्जा संबंधी चर्चाओं का पूरक है, जिसका उद्देश्य एक मजबूत और बहुआयामी संबंध बनाना है जो दोनों देशों को लाभ पहुंचाता है और वैश्विक आर्थिक स्थिरता में योगदान देता है।

भारत के न्यूक्लियर एनर्जी बिल, 2025 को समझना

न्यूक्लियर एनर्जी बिल, 2025, जिसे अक्सर "शांति बिल" के नाम से जाना जाता है,। भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक परिवर्तनकारी विधायी सुधार का प्रतिनिधित्व करता है। भारतीय संसद द्वारा पारित, इसका प्राथमिक उद्देश्य परमाणु ऊर्जा उत्पादन में निजी कंपनियों की भागीदारी को सुविधाजनक बनाना है। यह रणनीतिक कदम इस क्षेत्र में निजी और विदेशी निवेश दोनों को आकर्षित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो भारत के महत्वाकांक्षी स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है। परमाणु ऊर्जा परिदृश्य को निजी भागीदारी के लिए खोलकर, भारत का लक्ष्य स्थायी ऊर्जा स्रोतों में अपने संक्रमण को तेज करना, अपने कार्बन पदचिह्न को कम करना और अपनी ऊर्जा स्वतंत्रता को बढ़ाना है, जबकि नए आर्थिक अवसर भी पैदा करना है। यह बिल भारत की भविष्य की ऊर्जा मिश्रण के एक प्रमुख घटक के रूप में परमाणु ऊर्जा का लाभ उठाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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