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ईरान युद्ध: ट्रंप की 'धमकी और बातचीत' की दोहरी नीति, तेहरान ने ठुकराया प्रस्ताव

ईरान युद्ध: ट्रंप की 'धमकी और बातचीत' की दोहरी नीति, तेहरान ने ठुकराया प्रस्ताव
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ट्रंप की विरोधाभासी रणनीतियां और ईरान का रुख

ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया फैसले उनकी बेचैनी को दर्शा रहे हैं। ट्रंप एक तरफ ईरान से बातचीत के संकेत दे रहे हैं और युद्ध जल्द खत्म होने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वे ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दे रहे हैं। सुलह की उम्मीदों के बीच ट्रंप की इस 'बेलगामी' नीति ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। ट्रंप ने बातचीत की पेशकश तो की है, लेकिन होर्मुज के आसपास अमेरिकी नाकाबंदी को हटाने से इनकार कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप ईरान ने वार्ता की मेज पर आने से मना कर दिया है।

अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई और इस्लामाबाद डेलीगेशन

तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिकी नौसेना ने एक ईरानी कार्गो जहाज पर गोलीबारी की और उसे रोक दिया और यह घटना ट्रंप द्वारा ईरान से बातचीत के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भेजने की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद हुई। ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट कर जानकारी दी थी कि उनका डेलीगेशन इस्लामाबाद जा रहा है और वे बातचीत के लिए कल शाम वहां पहुंचेंगे और हालांकि, जमीनी हकीकत और सैन्य कार्रवाइयां कूटनीतिक प्रयासों के विपरीत नजर आ रही हैं।

ट्रंप की खुली धमकी: 'पावर प्लांट और पुलों को कर देंगे तबाह'

बातचीत के संकेतों के साथ ट्रंप ने ईरान को कड़ा अल्टीमेटम भी दिया है। उन्होंने कहा, "हम एक बहुत ही निष्पक्ष और सही डील पेश कर रहे हैं और मुझे उम्मीद है कि वे इसे मान लेंगे। " ट्रंप ने आगे कहा कि अब 'अच्छा आदमी' बनकर रहने का समय खत्म हो गया है और यदि डील नहीं मानी गई, तो ईरान का वह हश्र होगा जो पिछले 47 वर्षों में दूसरे राष्ट्रपतियों को करना चाहिए था। उन्होंने इसे 'ईरान की हत्यारी मशीन' को खत्म करने का समय बताया है।

ईरान का इनकार और होर्मुज की नाकाबंदी

ईरान ने ट्रंप की धमकियों और बातचीत के प्रस्ताव पर कड़ा रुख अपनाया है और ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी और सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, तेहरान ने फिलहाल पाकिस्तान में बातचीत के लिए कोई प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला नहीं लिया है। ईरान का स्पष्ट कहना है कि जब तक ईरानी पोर्ट पर अमेरिकी नाकाबंदी जारी रहेगी, तब तक कोई बातचीत संभव नहीं है और ईरान इस नाकाबंदी को सीजफायर का उल्लंघन मानता है और उसका आरोप है कि अमेरिका 'बहुत ज्यादा' मांग रहा है।

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