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अमेरिका-ईरान तनाव: 6 घंटे की चेतावनी और फायरिंग के बाद ईरानी जहाज 'टुस्का' जब्त

अमेरिका-ईरान तनाव: 6 घंटे की चेतावनी और फायरिंग के बाद ईरानी जहाज 'टुस्का' जब्त
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होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने रविवार को ईरान के एक विशाल कंटेनर जहाज 'टुस्का' (Touska) को अपने कब्जे में ले लिया है। अमेरिकी सेना के अनुसार, यह कार्रवाई उनकी समुद्री नाकेबंदी के तहत की गई है और इससे पहले भी अमेरिका अपनी नाकेबंदी के दौरान करीब 25 ईरानी जहाजों को रोककर वापस भेज चुका है, जो ईरान के विभिन्न बंदरगाहों में प्रवेश करने या वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे।

ऑपरेशन की पूरी कहानी और फायरिंग की घटना

ईरानी जहाज टुस्का को रोकने के लिए अमेरिकी नौसेना का युद्धपोत 'USS स्प्रुअंस' (USS Spruance) तैनात किया गया था। अमेरिकी नेवी के क्रू ने टुस्का के चालक दल को करीब 6 घंटे तक लगातार चेतावनी दी कि वे अपना रास्ता बदल लें और आगे न बढ़ें। हालांकि, जहाज ने इन आदेशों को अनसुना कर दिया और ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह की ओर बढ़ना जारी रखा। इसके बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अंतिम चेतावनी जारी करते हुए जहाज के कर्मचारियों को इंजन रूम खाली करने का निर्देश दिया।

इंजन रूम पर हमला और मरीन कमांडो का कब्जा

चेतावनी का पालन न होने पर USS स्प्रुअंस ने अपनी 5-इंच MK 45 गन से टुस्का के इंजन रूम पर फायरिंग शुरू कर दी। कई राउंड की फायरिंग के बाद जहाज का इंजन बंद हो गया और वह समुद्र में ही रुक गया। इसके तुरंत बाद अमेरिकी मरीन कमांडो जहाज पर चढ़ गए और उसे पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया। हालांकि इस घटना में किसी के घायल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अमेरिका ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।

जहाज 'टुस्का' की विशेषताएं और मार्ग

5 मीटर (107 फीट) है। यह जहाज 8 दिन पहले मलेशिया के पोर्ट क्लांग (Port Klang) से रवाना हुआ था और ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह की ओर जा रहा था। अमेरिका का दावा है कि यह जहाज उसकी नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहा था, जिसके कारण यह सैन्य कार्रवाई आवश्यक हो गई थी।

युद्धविराम पर संकट और कूटनीतिक गतिरोध

ईरान ने इस पूरी कार्रवाई का कड़ा विरोध करते हुए इसे 'समुद्री डकैती' और युद्धविराम का उल्लंघन करार दिया है और गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल को दो सप्ताह का सीजफायर हुआ था, जो 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। इस घटना ने 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में शुरू हुई शांति वार्ता के भविष्य पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिका ने दूसरे दौर की वार्ता के लिए इस्लामाबाद में प्रतिनिधिमंडल भेजने की बात कही है, लेकिन ईरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक समुद्री नाकेबंदी नहीं हटाई जाती, वह किसी भी बातचीत में शामिल नहीं होगा।

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