अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया, तो दुनिया का नक्शा कैसा दिखेगा? तेल की कीमतें, खाड़ी के मुल्क, भारत की जेब, और तीसरे विश्वयुद्ध का डर आखिर दांव पर क्या लगा है और दुनिया बारूद के ढेर पर बैठी है और माचिस किसी के भी हाथ में हो सकती है। आइए जानते हैं कि एक सुपरपावर और एक जिद्दी मुल्क की जंग के वो 8 नतीजे, जिनके बारे में सोचकर दुनिया के बड़े-बड़े एक्सपर्ट्स की रूह कांप जाती है।
सर्जिकल स्ट्राइक और लोकतंत्र का सपना?
सबसे पहला और अमेरिकी रणनीतिकारों का सबसे पसंदीदा सिनेरियो है – एक सटीक सर्जिकल स्ट्राइक। 2 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ़ कहा था कि अमेरिका ‘Locked and loaded and ready to go’ है और प्लान ये हो सकता है कि अमेरिकी वायुसेना ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ (IRGC) और उनके मिसाइल ठिकानों को तबाह कर दे। उम्मीद यह लगाई जाती है कि इससे ईरान की कट्टरपंथी सरकार गिर जाएगी और वहां ‘असली लोकतंत्र’ आएगा। लेकिन इतिहास कुछ और कहता है और मशहूर लेखक Stephen Kinzer अपनी किताब ‘All the Shahs Men’ में बताते हैं कि कैसे 1953 में भी अमेरिका ने ईरान में तख्तापलट किया था, जिसका नतीजा दशकों की नफरत के रूप में निकला। इराक और लीबिया के उदाहरण हमारे सामने हैं और पश्चिमी ताकतों ने सद्दाम और गद्दाफी को तो हटा दिया, लेकिन उसके बाद जो अराजकता और खून-खराबा हुआ, वो आज तक नहीं थमा।
‘वेनेज़ुएला मॉडल’: हुकूमत बची, पर तेवर नरम?
दूसरा नतीजा, जिसे एक्सपर्ट्स “वेनेज़ुएला मॉडल” कहते हैं। यानी अमेरिकी हमले से ईरानी सरकार तो न गिरे, लेकिन उनकी कमर टूट जाए। इस सिनेरियो में, ईरान का इस्लामिक रिपब्लिक बच जाएगा, लेकिन उसे मजबूरन अपनी नीतियां बदलनी पड़ेंगी और ईरान को अपने प्रॉक्सी ग्रुप्स – जैसे हिजबुल्लाह और हूतियों को पैसा देना बंद करना होगा और अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर ताला लगाना होगा। वरिष्ठ पत्रकार Jay Solomon अपनी किताब ‘The Iran Wars’ में तर्क देते हैं कि बाहरी। दबाव अक्सर ईरान के हार्डलाइनर्स को झुकने के बजाय और ज्यादा कट्टर बना देता है।
सिविलियन सरकार का अंत, मिलिट्री राज की शुरुआत
तीसरा और सबसे खतरनाक नतीजा – ईरान में पूर्ण सैन्य शासन और भले ही ईरान की जनता अपनी सरकार से नाराज हो, लेकिन सत्ता पलटना आसान नहीं है। अगर अमेरिका हमला करता है, तो ईरान में जो बचा-कुचा सिविलियन ढांचा है, वो भी खत्म हो सकता है। उसकी जगह लेगी – IRGC यानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की मिलिट्री हुकूमत। एक ऐसी सरकार जो सिर्फ बंदूक की भाषा समझेगी। सत्ता में बैठे लोग अपनी कुर्सी बचाने के लिए किसी भी हद तक, जी हां, असीमित क्रूरता तक जा सकते हैं। एक घायल शेर ज्यादा खतरनाक होता है, और एक घायल मिलिट्री हुकूमत पूरे मिडिल ईस्ट के लिए सिरदर्द बन सकती है।
अमेरिकी बेस और पड़ोसी देशों पर ‘मिसाइल बारिश’
अभी 13 जनवरी 2026 को ही ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि ‘Help is on its way’ और अमेरिकी बेड़ा ईरान की तरफ बढ़ रहा है। इसके जवाब में ईरान के डिप्लोमेट सैयद अब्बास अराघची ने साफ़ कहा था कि उनकी ‘Finger on the trigger’ है। तो चौथा नतीजा यही है – भीषण जवाबी कार्रवाई। ईरान के पास हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन हैं, जो पहाड़ों और सुरंगों में छिपे हैं। जिसके निशाने पर बहरीन, कतर और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी बेस होंगे और याद कीजिये 2019 का सऊदी अरामको हमला। ईरान ने दिखाया था कि वो कैसे मिनटों में तेल के कुओं को आग लगा सकता है।
होर्मुज़ में ‘माइन्स’: दुनिया की नस पर हमला
पांचवां नतीजा सीधा आपकी और हमारी जेब पर असर डालेगा। ईरान और ओमान के बीच ‘होर्मुज़ स्ट्रेट’ दुनिया की सबसे जरूरी नस है। दुनिया का 20% लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) और करीब 25% तेल इसी रास्ते से गुजरता है और अगर ईरान ने 1980 के दशक की तरह, इस संकरे रास्ते में समंदर के अंदर ‘माइन्स’ यानी बारूदी सुरंगें बिछा दीं, तो क्या होगा? जवाब डरावना है, तेल के टैंकर निकल नहीं पाएंगे और ग्लोबल सप्लाई चेन ठप हो जाएगी। कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी और भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इंपोर्ट पर निर्भर हैं, वहां महंगाई का ऐसा तूफ़ान आएगा जो संभाले नहीं संभलेगा।
अगर डूब गया एक अमेरिकी जंगी जहाज़?
छठा सिनेरियो, जो अमेरिका के लिए एक बुरे सपने जैसा है। एक अमेरिकी नेवी कैप्टन ने एक बार कहा था कि उन्हें सबसे ज्यादा डर ‘Swarm Attack’ से लगता है। यानी जब दुश्मन एक साथ सैकड़ों छोटे ड्रोन्स और तेज रफ्तार टॉरपीडो बोट्स से एक बड़े जहाज पर हमला कर दे। ईरान की नेवी ने इसी ‘असममित युद्ध’ (Asymmetric Warfare) की ट्रेनिंग ली है। सोचिए, अगर ईरान एक अमेरिकी युद्धपोत को डुबोने में कामयाब हो गया? या अमेरिकी नाविकों को बंधक बना लिया? तो यह अमेरिका के लिए 1987 के USS Stark या 2000 के USS Cole हादसे से भी बड़ी शर्मिंदगी होगी।
अराजकता और गृहयुद्ध का खतरा
सातवां, सबसे दुखद नतीजा और लेखक Trita Parsi अपनी किताब ‘Treacherous Alliance’ में समझाते हैं कि कैसे मिडिल ईस्ट के देश ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम से तो डरते हैं, लेकिन वो ईरान के टूटने से और भी ज्यादा डरते हैं। अगर केंद्रीय सत्ता खत्म हो गई, तो 9 करोड़ की आबादी वाला ईरान, सीरिया या यमन की तरह गृहयुद्ध में फंस सकता है। कुर्द, बलूच और दूसरे कई गुट अपनी-अपनी आजादी के लिए हथियार उठा लेंगे। एक बहुत बड़ा मानवीय संकट (Refugee Crisis) खड़ा हो जाएगा, जिसका बोझ पूरी दुनिया को उठाना पड़ेगा।
साइबर वर्ल्ड वॉर: अदृश्य मोर्चे पर तबाही
आठवां और शायद सबसे ‘साइलेंट’ लेकिन घातक नतीजा – ग्लोबल साइबर वॉर और ईरान की साइबर आर्मी दुनिया की सबसे खतरनाक हैकिंग फोर्स में से एक मानी जाती है। थिंक टैंक CSIS की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अमेरिका ने हमला किया, तो ईरान जवाब में अमेरिकी बैंकों, पावर ग्रिड्स और वाटर सप्लाई सिस्टम्स पर भीषण ‘मालवेयर’ अटैक कर सकता है। सोचिए अगर न्यूयॉर्क या लंदन में बिजली गुल हो जाए, या बैंकिंग सर्वर ठप पड़ जाएं? इसमें रूस और चीन परदे के पीछे से ईरान को तकनीकी मदद दे सकते हैं और यह एक ऐसा हमला होगा जिसमें कोई गोली नहीं चलेगी, लेकिन नुकसान परमाणु बम जितना गहरा हो सकता है।