ईरान में जारी मानवाधिकारों के हनन और प्रदर्शनकारियों के दमन को लेकर अमेरिका ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान के गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। यह कदम ईरान में चल रहे नागरिक असंतोष को हिंसक तरीके से दबाने की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।
6000 प्रदर्शनकारियों की मौत का आरोप
अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि गृह मंत्री मोमेनी ने उन सुरक्षा बलों का। नेतृत्व किया जिन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को कुचलने के लिए हिंसक बल का प्रयोग किया। रिपोर्टों के अनुसार, इस दमनकारी कार्रवाई में 6,000 से अधिक निर्दोष लोगों की जान चली गई। अमेरिका का कहना है कि गृह मंत्री के रूप में मोमेनी कानून प्रवर्तन बलों। की देखरेख के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार थे, जिन्होंने निहत्थे नागरिकों पर गोलियां चलाईं।
यूरोपीय संघ का भी मिला साथ
सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि यूरोपीय संघ ने भी ईरान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यूरोपीय संघ ने मोमेनी के साथ-साथ ईरान की न्यायपालिका के कई सदस्यों और अन्य उच्च अधिकारियों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं और इन अधिकारियों पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं की मनमानी गिरफ्तारी और मानवाधिकार रक्षकों के क्रूर उत्पीड़न का आरोप है। यूरोपीय संघ के अनुसार, ये अधिकारी शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के हिंसक दमन में सक्रिय रूप से शामिल थे।
आर्थिक नेटवर्क पर प्रहार
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने ईरानी निवेशक बाबक मंजा जंजानी पर भी शिकंजा कसा है और जंजानी पर आरोप है कि उन्होंने ईरानी सरकार के लाभ के लिए अरबों डॉलर की तेल आय की हेराफेरी की। इसके साथ ही, मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल 18 व्यक्तियों और कंपनियों के एक बड़े नेटवर्क को भी प्रतिबंधित किया। गया है, जो प्रतिबंधित ईरानी वित्तीय संस्थानों के लिए एक 'छाया बैंकिंग नेटवर्क' के रूप में काम कर रहे थे।
ईरान की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय तनाव
ईरान ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और प्रदर्शनकारियों को 'आतंकवादी' करार दिया है। ईरानी राज्य मीडिया का दावा है कि यह पश्चिमी देशों की एक साजिश है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है। यूरोपीय संघ ने ईरान की अर्धसैनिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड को आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध करने। की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, जिससे तेहरान की वैश्विक स्तर पर मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
भविष्य के परिणाम
इन प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान के नेतृत्व पर दबाव बनाना है ताकि वे अपने नागरिकों के खिलाफ हिंसा बंद करें और अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह मानवाधिकारों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं करेगा। आने वाले समय में ईरान पर और भी कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ना तय है।