अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब अपने चरम पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बार-बार दी जा रही धमकियों के बीच अब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। रूबियो ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि ईरान पर सैन्य हमले का विकल्प खुला है और तेहरान का वर्तमान नेतृत्व पिछले कई दशकों में सबसे कमजोर स्थिति में है।
ईरान का नेतृत्व सबसे कमजोर दौर में
सीनेट की विदेश संबंध समिति के समक्ष बोलते हुए मार्को। रूबियो ने ईरान की आंतरिक और बाहरी स्थिति का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि तेहरान की स्थिति अब पहले से कहीं अधिक नाजुक है। रूबियो के अनुसार, ईरान के भीतर बढ़ता असंतोष और आर्थिक बदहाली ने वहां के शासन की नींव हिला दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सैन्य तैनाती को लगातार मजबूत कर रहा है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। रूबियो ने ट्रंप प्रशासन के इस कदम को बुद्धिमानी भरा बताया और कहा कि अमेरिकी संपत्तियों और सैनिकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मिसाइलों का जखीरा और अमेरिकी घेराबंदी
रूबियो ने ईरान की सैन्य ताकत पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भले ही ईरान ने अपनी चरमराती अर्थव्यवस्था के बावजूद हजारों लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें जमा कर ली हैं, लेकिन उसका समग्र शासन तंत्र अब बिखरने की कगार पर है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब यूएसएस अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट। कैरियर अपने स्ट्राइक ग्रुप के साथ ईरान के बेहद करीब पहुंच गया है। क्षेत्र में इस समय 30,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। अमेरिका का लक्ष्य ऐसी सैन्य क्षमता बनाए रखना है जो ईरानी हमलों को शुरू होने से पहले ही कुचल सके।
ट्रंप का 'मिडनाइट हैमर' और अंतिम चेतावनी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मामले में आक्रामक रुख अपना रखा है और उन्होंने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए ईरान को अंतिम चेतावनी दी है। ट्रंप ने लिखा कि ईरान को जल्द से जल्द बातचीत की मेज पर आना चाहिए और एक निष्पक्ष परमाणु समझौता करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। ट्रंप ने पिछले साल जून में हुए 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' का जिक्र करते हुए कहा कि उस हमले ने तेहरान को भारी नुकसान पहुंचाया था, और यदि अब हमला हुआ तो वह पहले से कहीं अधिक विनाशकारी होगा।
ईरान की जवाबी तैयारी और वैश्विक असर
ईरान ने अमेरिका की इन धमकियों का कड़ा जवाब दिया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के मिशन ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देंगे। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि उनकी सशस्त्र सेनाएं पूरी तरह तैयार हैं और किसी भी आक्रामकता का तुरंत और शक्तिशाली जवाब दिया जाएगा। इस बीच, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश भी इस तनाव को देखते हुए सतर्क हैं। उन्हें डर है कि यदि युद्ध छिड़ा तो पूरे क्षेत्र की स्थिरता खतरे में पड़ जाएगी।
क्या युद्ध टल सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि रूबियो का यह बयान मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा। भी हो सकता है ताकि ईरान को समझौते के लिए मजबूर किया जा सके। हालांकि, जिस तरह से सैन्य तैनाती बढ़ रही है, उसे देखते हुए किसी भी छोटी सी गलती से बड़ा युद्ध छिड़ सकता है और ट्रंप प्रशासन का 'मैक्सिमम प्रेशर' कैंपेन एक बार फिर सक्रिय हो गया है, जिसका उद्देश्य ईरान को आर्थिक और सैन्य रूप से पूरी तरह अलग-थलग करना है। अब देखना यह होगा कि क्या तेहरान झुकता है या फिर। मध्य पूर्व एक नए और भीषण संघर्ष की ओर बढ़ता है।