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ईरान पर टिप्पणी के बाद ट्रंप के खिलाफ 25वें संशोधन की मांग

ईरान पर टिप्पणी के बाद ट्रंप के खिलाफ 25वें संशोधन की मांग
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विवाद कीDonald Trump


पृष्ठभूमि और सांसदों की प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के संदर्भ में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किए जाने के बाद अमेरिका में राजनीतिक विवाद गहरा गया है। रविवार, 4 अप्रैल को राष्ट्रपति द्वारा किए गए एक पोस्ट के बाद विपक्षी सांसदों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यूएस स्टेट रिप्रजेंटेटिव बेक्का बालिंट ने सार्वजनिक रूप से राष्ट्रपति के आचरण की आलोचना करते हुए कहा कि यदि इसी तरह की भाषा का प्रयोग पूर्व राष्ट्रपतियों द्वारा किया गया होता, तो रिपब्लिकन पार्टी उनके इस्तीफे की मांग करती। बालिंट ने स्पष्ट रूप से ट्रंप को पद से हटाने की वकालत की है।

25वां संशोधन: राष्ट्रपति को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया

अमेरिकी संविधान का 25वां संशोधन राष्ट्रपति को पद से हटाने या उनके कार्यभार को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया को परिभाषित करता है। इस कानून के अनुसार, यदि राष्ट्रपति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम पाए जाते हैं, तो उन्हें पद से हटाया जा सकता है। इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए राष्ट्रपति की कैबिनेट को एक प्रस्ताव लाना होता है। यदि राष्ट्रपति इस प्रस्ताव का विरोध करते हैं, तो मामला संसद (कांग्रेस) में जाता है। वहां सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स के दो-तिहाई सदस्यों की मंजूरी मिलने पर राष्ट्रपति को अनिवार्य रूप से पद छोड़ना पड़ता है।

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की संभावित भूमिका

संवैधानिक प्रावधानों के तहत, यदि 25वें संशोधन के माध्यम से राष्ट्रपति को हटाया जाता है, तो उपराष्ट्रपति तत्काल प्रभाव से कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभालते हैं। वर्तमान स्थिति में, यदि डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ यह कार्रवाई सफल होती है, तो उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शेष कार्यकाल के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति बन सकते हैं। सांसदों का तर्क है कि राष्ट्रपति की वर्तमान स्थिति वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है, इसलिए सत्ता का हस्तांतरण आवश्यक है।

सांसदों के गंभीर आरोप और सुरक्षा चिंताएं

सीनेटर क्रिस मर्फी और कांग्रेस सदस्य यास्मीन अंसारी ने राष्ट्रपति की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाए हैं। मर्फी के अनुसार, यदि वे कैबिनेट का हिस्सा होते, तो इस संशोधन को लागू करने के लिए कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श करते। वहीं, यास्मीन अंसारी ने राष्ट्रपति के व्यवहार को अनियंत्रित बताते हुए कहा कि उनके निर्णयों से पूरी दुनिया खतरे में पड़ सकती है। रिप्रजेंटेटिव मेलेनी स्टांसबेरी ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा है कि अब कार्रवाई का समय आ गया है, क्योंकि स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है।

वर्तमान स्थिति और प्रशासनिक अपडेट

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के खिलाफ दिए गए विवादास्पद बयान के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीन दिन का अवकाश लिया है। इस बीच, वाशिंगटन में उनके खिलाफ कानूनी और संवैधानिक विकल्पों पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, 25वें संशोधन को लागू करना एक जटिल प्रक्रिया है क्योंकि इसके लिए कैबिनेट के बहुमत और संसद में भारी समर्थन की आवश्यकता होती है। अभी तक कैबिनेट की ओर से इस दिशा में कोई आधिकारिक कदम नहीं उठाया गया है, लेकिन सांसदों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

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