ईरान के बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट के पास अमेरिकी मिसाइल हमलों की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। शुरुआती जानकारी में यह बताया गया था कि मिसाइलों के टुकड़े न्यूक्लियर फैसिलिटी पर गिरे थे, जिससे परमाणु सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं। हालांकि, ईरान ने आधिकारिक तौर पर इन खबरों का खंडन किया है और स्पष्ट किया है कि उसकी परमाणु सुविधा पूरी तरह सुरक्षित है।
धमाकों की रिपोर्ट और आधिकारिक खंडन
मेहर न्यूज़ एजेंसी ने बुशहर के पास तेज़ धमाकों की आवाज़ सुनी जाने की रिपोर्ट दी है। ऐसी खबरें सामने आई थीं कि कल रात अमेरिका ने बुशहर पावर प्लांट पर हमला किया था और मिसाइलों के मलबे न्यूक्लियर फैसिलिटी के अंदर गिरे थे और इन खबरों के बीच ईरानी अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट की है। बुशहर के गवर्नर मोहम्मद मुज़फ़्फ़री ने कहा कि आज सुबह शहर पर अमेरिका ने फिर से हमला किया, लेकिन उन्होंने उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि न्यूक्लियर पावर प्लांट को निशाना बनाया गया है या उसे कोई नुकसान पहुंचा है।
ईरानी मीडिया के मुताबिक, मुज़फ़्फ़री ने खारग द्वीप पर हमले की खबरों को भी गलत बताया। बुशहर प्रांत में ईरान के तट के पास स्थित यह द्वीप बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ से ईरान के कच्चे तेल के निर्यात का 90 प्रतिशत हिस्सा प्रोसेस किया जाता है। ISNA न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, मुज़फ़्फ़री ने पुष्टि की कि इन दोनों ही संवेदनशील जगहों पर कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है।
बुशहर परमाणु संयंत्र का महत्व
बुशहर का न्यूक्लियर पावर प्लांट ईरान के लिए रणनीतिक रूप से बहुत खास है और इसे 20 साल पहले रूसी कर्मचारियों और इंजीनियरों द्वारा बनाया गया था। अमेरिका और इज़राइल के साथ बढ़ते तनाव और युद्धों के दौरान भी बुशहर उन चुनिंदा जगहों में शामिल रहा है जिन पर कभी बमबारी नहीं की गई। इसके विपरीत, नतांज़, फोर्डो और इस्फ़हान जैसी न्यूक्लियर फैसिलिटीज़ को अमेरिकी B-2 बॉम्बर से निशाना बनाया गया था, लेकिन बुशहर को इन हमलों से बाहर रखा गया था। युद्ध की स्थितियों में भी बुशहर में रूसी तकनीकी कर्मचारी हमेशा मौजूद रहे हैं। तेहरान के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान हमलों में भी बुशहर शहर के न्यूक्लियर पावर प्लांट को कोई क्षति नहीं पहुंची है।
चीन-ईरान रेल कॉरिडोर और बुनियादी ढांचे पर हमला
फार्स न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी हवाई हमलों में ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया है। उत्तरी प्रांत गोलेस्तान में स्थित 'अक ताक़ेह खान' रेलवे पुल इन हमलों में क्षतिग्रस्त हो गया है। यह पुल ईरान की राजधानी तेहरान और उसके सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार चीन के बीच व्यापार का एक मुख्य मार्ग है। जब अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी की जाती है, तब रूस को माल भेजने के लिए भी इसी रास्ते का उपयोग किया जाता है। यह रेल मार्ग तुर्कमेनिस्तान और कज़ाकिस्तान से होते हुए चीन तक जाता है। फार्स न्यूज़ ने बताया कि पुल की मरम्मत का काम जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा ताकि व्यापारिक गतिविधियां फिर से शुरू हो सकें।
ईरान ने हमलों को बताया 'गंभीर युद्ध अपराध'
ईरान ने अपने क्षेत्र पर हुए इन अमेरिकी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है और इन्हें "युद्ध अपराध" करार दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने वॉशिंगटन पर युद्ध खत्म करने के मकसद से हुए अंतरिम समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया है। मंत्रालय ने अमेरिकी सेना द्वारा दक्षिणी तटीय प्रांतों और उत्तर-पूर्वी शहर मशहद की ओर जाने वाली रेलवे लाइन पर बने दो पुलों पर किए गए हमलों को "आक्रामक" बताया।
ईरान द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि ये हमले "एक गंभीर युद्ध अपराध" की श्रेणी में आते हैं। मंत्रालय ने अमेरिका पर युद्ध खत्म करने के समझौते (MoU) की धारा 1 और 5 का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। गौरतलब है कि बुधवार को ही राष्ट्रपति ट्रंप ने यह घोषणा की थी कि यह MoU अब "खत्म" हो चुका है, जिसके बाद से दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव और तेज़ हो गया है।