अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को एक बड़ा कानूनी झटका देते हुए इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के माध्यम से व्यापक आयात शुल्क लगाने पर रोक लगा दी है। 6-3 के बहुमत से आए इस फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति इस कानून का उपयोग राजस्व जुटाने के उद्देश्य से नहीं कर सकते। इस न्यायिक आदेश के तुरंत बाद, राष्ट्रपति ट्रंप ने फैसले की आलोचना करते हुए इसे एक "बहुत बुरा फैसला" करार दिया और तत्काल प्रभाव से 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत 10% वैश्विक टैरिफ लागू करने के लिए एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करने की घोषणा की।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और न्यायिक सीमाएं
सुप्रीम कोर्ट के छह न्यायाधीशों ने बहुमत से यह निर्णय सुनाया कि 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का उपयोग करके बड़े पैमाने पर आयात शुल्क लगाना राष्ट्रपति के कानूनी अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन है। अदालत के अनुसार, इस कानून के तहत दी गई शक्तियों का उपयोग 1 अमेरिकी डॉलर का भी राजस्व जुटाने के लिए नहीं किया जा सकता है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि यद्यपि राष्ट्रपति के पास राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान आर्थिक लेनदेन को विनियमित करने की शक्तियां हैं, लेकिन टैरिफ के माध्यम से कर संग्रह करना इस दायरे में नहीं आता है। इस फैसले ने ट्रंप प्रशासन की उस रणनीति को बाधित कर दिया है जिसके तहत वे विदेशी वस्तुओं पर भारी शुल्क लगाने की योजना बना रहे थे।
धारा 122 और वैकल्पिक कानूनी शक्तियों का उपयोग
सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के बाद, राष्ट्रपति ट्रंप ने व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 122 का सहारा लिया है। यह कानूनी प्रावधान राष्ट्रपति को भुगतान संतुलन (Balance of Payments) की समस्याओं को दूर करने के लिए 150 दिनों के लिए 15% तक का अस्थायी आयात अधिभार (Surcharge) लगाने की अनुमति देता है। ट्रंप ने घोषणा की है कि वे इस धारा के तहत 10% वैश्विक टैरिफ लागू करेंगे। इसके अतिरिक्त, प्रशासन ने संकेत दिया है कि वे धारा 232 और धारा 301 जैसी अन्य कानूनी शक्तियों का भी उपयोग करेंगे। धारा 232 राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर आयात को सीमित करने की शक्ति देती है, जबकि धारा 301 अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुमति देती है।
राजस्व प्रभाव पर वित्त मंत्रालय का स्पष्टीकरण
डलास इकोनॉमिक क्लब में बोलते हुए, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद सरकार के टैरिफ राजस्व में कोई कमी नहीं आएगी। बेसेंट के अनुसार, प्रशासन वैकल्पिक कानूनी प्राधिकरणों जैसे धारा 232 और धारा 301 का लाभ उठाएगा, जिन्हें पहले भी हजारों कानूनी मामलों के माध्यम से मान्य किया गया है। वित्त मंत्रालय के अनुमानों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 2026 में टैरिफ राजस्व लगभग अपरिवर्तित रहेगा। उन्होंने तर्क दिया कि धारा 122 और अन्य प्रावधानों का संयुक्त उपयोग राजस्व के उन लक्ष्यों को पूरा करने में सक्षम होगा जो पहले IEEPA के माध्यम से प्राप्त करने की योजना बनाई गई थी।
क्या है IEEPA और इसके तहत राष्ट्रपति के अधिकार
इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) 1977 में बनाया गया एक अमेरिकी संघीय कानून है। यह कानून राष्ट्रपति को 'राष्ट्रीय आपातकाल' घोषित होने की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक लेनदेन को विनियमित करने के असाधारण अधिकार प्रदान करता है। लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस के दस्तावेजों के अनुसार, यह कानून कांग्रेस द्वारा राष्ट्रपति को दी गई आपातकालीन शक्तियों को व्यवस्थित करने और उन पर कुछ सीमाएं लगाने के लिए पारित किया गया था। IEEPA राष्ट्रपति को विदेशी संपत्तियों को फ्रीज करने, आर्थिक प्रतिबंध लगाने और उन संस्थाओं या देशों के साथ व्यापार को रोकने की अनुमति देता है जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति या अर्थव्यवस्था के लिए खतरा माना जाता है।
IEEPA का इतिहास और राष्ट्रीय आपातकाल का संदर्भ
ऐतिहासिक रूप से, IEEPA का उपयोग विभिन्न अमेरिकी राष्ट्रपतियों द्वारा विदेशी सरकारों और आतंकवादी संगठनों पर अंकुश लगाने के लिए किया गया है। इस कानून का पहला महत्वपूर्ण उपयोग तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने ईरान बंधक संकट के दौरान किया था, जब उन्होंने अमेरिका में स्थित ईरानी सरकारी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया था। आंकड़ों के अनुसार, पिछले सितंबर तक अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने इस कानून के तहत 77 राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किए हैं। हालांकि, ट्रंप प्रशासन द्वारा इसका उपयोग व्यापक व्यापार शुल्कों के लिए किया जाना एक नया कानूनी प्रयोग था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने सीमित कर दिया है। अब प्रशासन को अपने व्यापारिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए पुराने व्यापार कानूनों और विशिष्ट धाराओं पर निर्भर रहना होगा।