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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ रद्द किए, भारतीय निर्यातकों को राहत

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ रद्द किए, भारतीय निर्यातकों को राहत
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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (IEEPA) के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ को रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति के पास राष्ट्रीय आपातकाल के नाम पर इस तरह के मनमाने शुल्क लगाने का संवैधानिक अधिकार नहीं है। यह फैसला मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले आया है, जिसे ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़े कानूनी झटके के रूप में देखा जा रहा है। भारत के लिए यह निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है और पिछले कुछ समय से व्यापारिक शुल्कों को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई थी।

आईईईपीए (IEEPA) के तहत लगाए गए शुल्कों की कानूनी वैधता

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आईईईपीए कानून का उद्देश्य राष्ट्रपति को आपातकालीन स्थितियों में आर्थिक शक्तियों का उपयोग करने की अनुमति देना था, न कि कांग्रेस की अनुमति के बिना स्थायी व्यापारिक टैरिफ लागू करना। अदालत के अनुसार, व्यापार और टैरिफ से जुड़े निर्णय लेने का प्राथमिक अधिकार अमेरिकी कांग्रेस के पास है। इस फैसले के बाद, ट्रंप द्वारा लगाए गए कई टैरिफ अब अवैध हो गए हैं। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस निर्णय से भविष्य में किसी भी राष्ट्रपति द्वारा व्यापारिक नीतियों में अचानक और एकतरफा बदलाव करने की शक्ति पर अंकुश लगेगा। यह फैसला 20 फरवरी को सुनाया गया, जिसमें अदालत ने स्पष्ट किया कि टैरिफ लगाने की प्रक्रिया में विधायी जांच और संतुलन अनिवार्य है।

भारतीय इंजीनियरिंग और कपड़ा निर्यातकों के लिए राहत के मायने

भारतीय निर्यातकों के लिए यह फैसला व्यापारिक स्थिरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, रसायन, कपड़े और रत्न एवं आभूषण जैसे क्षेत्रों को ट्रंप द्वारा लगाए गए अचानक टैरिफ से काफी अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा था। निर्यातकों के अनुसार, शुल्कों के डर से कई अमेरिकी खरीदार ऑर्डर देने में संकोच कर रहे थे। अब टैरिफ हटने से भारतीय उत्पादों की लागत अमेरिकी बाजार में कम होगी, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। इसके अतिरिक्त, जिन निर्यातकों ने पहले ही इन शुल्कों का भुगतान कर दिया है, उन्हें अब रिफंड मिलने की संभावना भी बढ़ गई है। इससे भारतीय कंपनियों की नकदी स्थिति में सुधार होगा और निर्यात के नए अवसर पैदा होंगे।

स्टील और एल्युमीनियम पर सेक्शन 232 टैरिफ की निरंतरता

हालांकि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आईईईपीए के तहत लगाए गए टैरिफ पर केंद्रित है, लेकिन यह ट्रेड एक्सपैंशन एक्ट 1962 के सेक्शन 232 के तहत लगाए गए शुल्कों को प्रभावित नहीं करेगा। इसका अर्थ है कि भारतीय स्टील और एल्युमीनियम निर्यात पर लगे मौजूदा टैरिफ फिलहाल जारी रहेंगे। भारत सरकार लंबे समय से इन शुल्कों को हटाने या कम करने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत कर रही है और अधिकारियों के अनुसार, सेक्शन 232 के तहत लगाए गए शुल्क राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर लगाए गए थे, जो आईईईपीए की कानूनी परिधि से अलग हैं। इसलिए, स्टील और एल्युमीनियम क्षेत्र के निर्यातकों को अभी भी मौजूदा व्यापारिक ढांचे के तहत ही काम करना होगा।

अमेरिकी व्यापार नीति में कांग्रेस की भूमिका का पुनरुद्धार

सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप के बाद अमेरिका की व्यापार नीति अब फिर से कांग्रेस की देखरेख वाले कानूनी ढांचे में वापस आ गई है। अब किसी भी नए टैरिफ को लागू करने से पहले विस्तृत जांच, सार्वजनिक सुनवाई और कांग्रेस में चर्चा की आवश्यकता होगी। भारत के लिए इसका लाभ यह है कि अब व्यापारिक वार्ताएं अधिक व्यवस्थित और पूर्वानुमानित होंगी। द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के लिए अब एक स्पष्ट समयसीमा और प्रक्रिया होगी, जिससे भारतीय वार्ताकारों को विशिष्ट उत्पादों पर छूट प्राप्त करने के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे व्यापारिक विवादों के समाधान के लिए एक पारदर्शी मंच उपलब्ध होगा।

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और भारत के लिए उभरते अवसर

इस फैसले का असर केवल भारत पर ही नहीं, बल्कि चीन, कनाडा और मैक्सिको जैसे देशों पर भी पड़ेगा, जो ट्रंप की टैरिफ नीतियों से बुरी तरह प्रभावित थे। आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाएं कम होने से वैश्विक व्यापार में तेजी आने की उम्मीद है। भारतीय निर्माताओं के लिए यह एक रणनीतिक अवसर हो सकता है क्योंकि अमेरिकी कंपनियां अब जोखिम कम करने के लिए अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता ला रही हैं और ट्रंप द्वारा हाल ही में भारत के प्रति नरम रुख अपनाते हुए टैरिफ को घटाकर 18% करने और एक अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा करने के बाद, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को और मजबूती प्रदान कर सकता है। मार्च में होने वाले संभावित व्यापार समझौते पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं।

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