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विनोद जाखड़ बने एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष, राजस्थान को मिला पहला मौका

विनोद जाखड़ बने एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष, राजस्थान को मिला पहला मौका
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कांग्रेस पार्टी ने छात्र संगठन भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के नेतृत्व में बड़ा बदलाव करते हुए विनोद जाखड़ को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणुगोपाल द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने तत्काल प्रभाव से जाखड़ की नियुक्ति को मंजूरी दी है। यह पहली बार है जब राजस्थान से आने वाले किसी छात्र नेता को एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विनोद जाखड़ इससे पहले राजस्थान एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे और लंबे समय से छात्र राजनीति में सक्रिय रहे हैं।

चयन प्रक्रिया और राहुल गांधी का साक्षात्कार

एनएसयूआई के नए अध्यक्ष के चयन के लिए इस सप्ताह नई दिल्ली में दो दिवसीय गहन प्रक्रिया अपनाई गई थी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, देशभर से लगभग 15 प्रमुख छात्र नेताओं को इस पद के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था। चयन प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सभी उम्मीदवारों के साथ समूह चर्चा (Group Discussion) की और उसके बाद व्यक्तिगत साक्षात्कार लिए। विनोद जाखड़ इससे पहले भी राष्ट्रीय अध्यक्ष की दौड़ में शामिल रहे थे और उन्होंने पूर्व में भी राहुल गांधी के समक्ष अपनी कार्ययोजना प्रस्तुत की थी। इस बार उनके संगठनात्मक अनुभव और जमीनी पकड़ को देखते हुए शीर्ष नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताया है।

राजस्थान विश्वविद्यालय से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर

विनोद जाखड़ की राजनीतिक यात्रा राजस्थान विश्वविद्यालय से शुरू हुई थी, जहां उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई। साल 2018 के राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में जब एनएसयूआई ने उन्हें टिकट नहीं दिया था, तब उन्होंने बागी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और अध्यक्ष पद पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। वह राजस्थान विश्वविद्यालय के इतिहास में अध्यक्ष पद जीतने वाले दलित वर्ग के पहले छात्र नेता बने थे। इस जीत के बाद उनकी संगठनात्मक क्षमता को देखते हुए उन्हें राजस्थान एनएसयूआई का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था और पिछले 8 वर्षों से छात्र राजनीति में निरंतर सक्रियता का परिणाम अब उन्हें राष्ट्रीय नेतृत्व के रूप में मिला है।

हालिया संघर्ष और वैचारिक सक्रियता

विनोद जाखड़ हाल के महीनों में अपनी वैचारिक सक्रियता और विरोध प्रदर्शनों के कारण चर्चा में रहे हैं। कुछ समय पूर्व राजस्थान विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक कार्यक्रम के विरोध में उन्होंने बड़ा प्रदर्शन किया था। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए उन्हें हिरासत में लिया गया और जेल भी जाना पड़ा था। कांग्रेस नेतृत्व ने उनके इस संघर्ष और छात्र हितों के लिए उनकी प्रतिबद्धता को नियुक्ति के मुख्य आधारों में से एक माना है। जाखड़ को संगठन के भीतर एक आक्रामक और वैचारिक रूप से स्पष्ट नेता के रूप में देखा जाता है।

संगठनात्मक चुनौतियां और आंतरिक समीकरण

विनोद जाखड़ की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब संगठन के भीतर आंतरिक बदलावों की चर्चाएं तेज थीं। निवर्तमान अध्यक्ष वरुण चौधरी और संगठन प्रभारी कन्हैया कुमार के बीच समन्वय को लेकर राजनीतिक गलियारों में विभिन्न खबरें सामने आती रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कन्हैया कुमार ने पिछले साल सितंबर में ही नए अध्यक्ष के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे, लेकिन प्रक्रिया अब जाकर पूरी हुई है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि इस नियुक्ति में शीर्ष नेतृत्व ने सभी पक्षों के सुझावों और संगठन की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्वतंत्र निर्णय लिया है। जाखड़ के सामने अब देशभर के विश्वविद्यालयों में एनएसयूआई की उपस्थिति को मजबूत करने की चुनौती होगी।

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