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महिला आरक्षण: सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई, तुरंत लागू करने की मांग तेज

महिला आरक्षण: सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई, तुरंत लागू करने की मांग तेज
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उच्चतम न्यायालय आज, सोमवार 13 अप्रैल को संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित करने वाले 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को तुरंत लागू करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। कांग्रेस नेता जया ठाकुर द्वारा दायर इस याचिका में केंद्र सरकार के उस प्रावधान को चुनौती दी गई है, जिसके तहत आरक्षण को जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू करने की बात कही गई है।

याचिकाकर्ता की मुख्य दलीलें

जया ठाकुर ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से जोड़ना अनावश्यक है और याचिका में कहा गया है कि चूंकि निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या पहले से निर्धारित है, इसलिए महिलाओं को उनका संवैधानिक अधिकार देने के लिए किसी नई प्रक्रिया की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। याचिकाकर्ता के अनुसार, देश की लगभग आधी आबादी होने के बावजूद विधायी निकायों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अत्यंत कम है, जिसे तुरंत सुधारने की आवश्यकता है।

कानून के वर्तमान प्रावधान और विवाद

नारी शक्ति वंदन अधिनियम के मौजूदा स्वरूप के अनुसार, 33% महिला आरक्षण तभी प्रभावी होगा जब अधिनियम के लागू होने के बाद पहली जनगणना की जाएगी और उसके आधार पर सीटों का परिसीमन होगा। आलोचकों और याचिकाकर्ता का मानना है कि इन शर्तों के कारण आरक्षण के वास्तविक कार्यान्वयन में कई वर्षों का विलंब हो सकता है। याचिका में मांग की गई है कि इन शर्तों को हटाकर आरक्षण को आगामी चुनावों से ही प्रभावी बनाया जाए।

न्यायालय की पीठ और सुनवाई का महत्व

इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ द्वारा की जाएगी। इससे पहले 2023 में हुई सुनवाई के दौरान, सर्वोच्च न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि कानून के किसी विशेष प्रावधान को रद्द करना एक जटिल प्रक्रिया है। आज की सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र शुरू होने जा रहा है, जिसमें इस कानून से संबंधित संभावित संशोधनों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।

सरकार का रुख और प्रधानमंत्री की अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को पत्र लिखकर सर्वसम्मति बनाने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा है कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नीति निर्धारण में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। सरकार की ओर से संकेत मिले हैं कि विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण कानून को सुचारू रूप से लागू करने के लिए आवश्यक विधायी कदम उठाए जा सकते हैं।

विपक्ष की आपत्तियां और चुनावी संदर्भ

कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने संसद के विशेष सत्र के समय पर सवाल उठाए हैं और विपक्ष का तर्क है कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया जारी होने के कारण इस समय कोई भी बड़ा विधायी बदलाव चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन हो सकता है। इसके अतिरिक्त, विपक्षी दलों ने मांग की है कि महिला आरक्षण पर आगे बढ़ने से पहले परिसीमन के मुद्दे पर सभी दलों की एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जानी चाहिए ताकि व्यापक सहमति बन सके।

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