उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपने दो उम्मीदवारों के नामों का औपचारिक ऐलान कर दिया है और बुधवार को प्रोफेसर रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी ने अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया है और हालांकि, इन सबके बीच सबसे बड़ा सस्पेंस अब भी यही बना हुआ है कि सपा का तीसरा उम्मीदवार कौन होगा? नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी अखिलेश यादव ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है और सपा के विधायक लगातार यह दावा कर रहे हैं कि उनका तीसरा उम्मीदवार हर हाल में चुनाव जीतेगा।
चौथी सीट जीतने का बड़ा दावा
सपा विधायक आशु मलिक ने इस मामले में एक कदम आगे बढ़ते हुए दावा किया कि अगर चौथी सीट भी होती, तो समाजवादी पार्टी उसे जीत लेती। उन्होंने कहा कि हमारे पास पर्याप्त विधायक हैं और भारतीय जनता पार्टी के भीतर जबरदस्त भगदड़ मची हुई है। मलिक के अनुसार, भाजपा के कई विधायक सपा के संपर्क में हैं और तीसरे प्रत्याशी की घोषणा जल्द ही अखिलेश यादव करेंगे और वहीं, सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने स्पष्ट किया कि तीसरे उम्मीदवार का अंतिम फैसला अखिलेश यादव ही लेंगे। विधायक सचिन यादव ने संकेत दिया कि उन्हें नाम पता है और उम्मीदवार ऐसा होगा जो PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की मदद करने वाला हो और इसी क्रम में विधायक कमाल अख्तर ने कहा कि तीसरा कैंडिडेट या तो दलित हो सकता है या फिर मुस्लिम चेहरा।
अखिलेश यादव की रणनीति और संकेत
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने खुद दावा किया है कि भाजपा के बहुत से लोग समाजवादी पार्टी के संपर्क में हैं। पार्टी ने पहले ही इस बात के संकेत दे दिए थे कि वह मैदान में तीन उम्मीदवार उतार सकती है। बुधवार को नामांकन के बाद अखिलेश यादव ने संख्या पूरी होने की स्थिति में तीसरा उम्मीदवार उतारने का स्पष्ट संकेत दिया और जब उनसे तीसरे उम्मीदवार के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने साफ किया कि सपा पीछे हटने वाली नहीं है। पार्टी के भीतर उम्मीदवार के नाम को लेकर गहन मंथन जारी है। चर्चाओं में तीन मुख्य विकल्प सामने आ रहे हैं: पहला- पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन, दूसरा- सलीम इकबाल शेरवानी और तीसरा- कोई दलित या PDA चेहरा।
आलोक रंजन और सलीम शेरवानी की दावेदारी
तीसरे उम्मीदवार के रूप में आलोक रंजन का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। वह अखिलेश यादव के करीबी प्रशासनिक और नीतिगत रणनीतिकार माने जाते हैं। गौरतलब है कि 2024 के राज्यसभा चुनाव में भी सपा ने उन्हें तीसरा उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उस समय वह जीत हासिल नहीं कर सके थे। उस चुनाव में सपा विधायकों की क्रॉस वोटिंग ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं और दूसरा प्रमुख नाम सलीम इकबाल शेरवानी का है। पूर्व सांसद शेरवानी ने हाल ही में अखिलेश यादव से मुलाकात कर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। अगर सपा मुस्लिम कार्ड खेलती है, तो शेरवानी का नाम सबसे आगे है। इसके अलावा, PDA समीकरण को साधने के लिए किसी दलित चेहरे को आगे बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि एक बड़ा सामाजिक संदेश दिया जा सके।
जीत का गणित और चुनौतियां
नामांकन के बाद प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने भी तीसरे प्रत्याशी के सवाल पर गेंद अखिलेश यादव के पाले में डाल दी। वहीं, सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने दावा किया कि भाजपा के कई विधायक अपनी ही पार्टी से असंतुष्ट हैं और जरूरत पड़ने पर इसका खुलासा किया जाएगा और राज्यसभा चुनाव के गणित की बात करें तो एक उम्मीदवार को जीत के लिए 37 प्रथम वरीयता वोट की जरूरत होती है। सपा के पास अपने विधायकों की संख्या के आधार पर दो सीटें आसानी से निकालने का बहुमत है, लेकिन तीसरी सीट के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा और यही सपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। दूसरी ओर, भाजपा और उसके सहयोगी दल भी अपनी आठवीं सीट के लिए अतिरिक्त वोटों की जुगत में लगे हुए हैं, जिससे मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।
