अमेरिका ने अपनी वीजा नीति में अभूतपूर्व सख्ती दिखाते हुए पिछले एक साल में रिकॉर्ड 1 लाख से अधिक वीजा रद्द कर दिए हैं और अमेरिकी विदेश विभाग (US State Department) के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के बाद से यह आंकड़ा एक नया रिकॉर्ड स्थापित करता है, जो प्रशासन की कड़ी इमिग्रेशन पॉलिसी को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। इस व्यापक कार्रवाई में विभिन्न श्रेणियों के वीजा शामिल हैं, जिनमें छात्र, पेशेवर और सामान्य पर्यटक वीजा प्रमुख हैं। विशेष रूप से, H-1B, L-1B और O-1 जैसी विशेष वीजा श्रेणियों में भी बड़ी संख्या में वीजा रद्द किए गए हैं, जिससे इन श्रेणियों के धारकों में चिंता बढ़ गई है।
नीतिगत बदलाव और पृष्ठभूमि
अमेरिकी प्रशासन ने अपनी इमिग्रेशन नीतियों को लगातार कड़ा किया है, और यह नवीनतम कार्रवाई इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस में वापसी के बाद से, प्रशासन ने देश की सीमाओं को सुरक्षित करने और अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। इस नीतिगत बदलाव का उद्देश्य उन व्यक्तियों को अमेरिका से बाहर निकालना है जो वीजा नियमों का उल्लंघन करते हैं या आपराधिक गतिविधियों में शामिल होते हैं और यह कदम एक स्पष्ट संदेश देता है कि अमेरिका में प्रवेश और रहने के लिए सख्त नियमों का पालन करना अनिवार्य है, और किसी भी उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा।
वीजा रद्द होने के प्रमुख कारण
अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट के डिप्टी प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने वीजा रद्द होने के चार सबसे आम कारणों का खुलासा किया है। इनमें ओवरस्टे (वीजा अवधि से अधिक समय तक रुकना), शराब पीकर गाड़ी चलाना (DUI), हमला और चोरी शामिल हैं। ये कारण दर्शाते हैं कि अमेरिका न केवल इमिग्रेशन नियमों के उल्लंघन को लेकर सख्त है, बल्कि देश के भीतर किए गए अपराधों के प्रति भी उसकी नीति कठोर है। पिगॉट ने स्पष्ट किया कि प्रशासन इन अपराधियों को अमेरिका से बाहर भेजने का काम जारी रखेगा ताकि अमेरिकी नागरिक सुरक्षित रहें। यह बयान अमेरिकी सरकार की प्राथमिकता को रेखांकित करता है। कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानती है।
छात्र और विशेष वीजा पर प्रभाव
रद्द किए गए वीजा में लगभग 8000 छात्र वीजा और 2500 विशेष वीजा शामिल हैं। यह आंकड़ा उन छात्रों और पेशेवरों के लिए चिंता का विषय है जो अमेरिका में अध्ययन या काम करने की इच्छा रखते हैं और विशेष वीजा धारकों के मामलों में, लगभग आधे मामलों में शराब पीकर गाड़ी चलाने की घटनाएं सामने आईं, जबकि बाकी मामलों में हमला, चोरी, बाल शोषण, ड्रग्स से जुड़ी घटनाएं, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर अपराध शामिल थे। इन आंकड़ों से पता चलता है कि वीजा धारकों को न केवल इमिग्रेशन कानूनों का पालन करना होगा, बल्कि उन्हें अमेरिकी कानूनों और सामाजिक मानदंडों का भी सम्मान करना होगा। किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि वीजा रद्द होने का सीधा कारण बन सकती है।
भारतीयों पर बढ़ता असर
अमेरिका की इस कड़ी नीति का भारतीय छात्रों और पेशेवरों पर भी गहरा असर पड़ा है और भारतीय सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, 2025 में अब तक 3,155 भारतीय नागरिकों को अमेरिका से डिपोर्ट किया गया है। यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है, जहां। 2023 में 617 और 2024 में 1,368 मामले दर्ज किए गए थे। इसके अतिरिक्त, इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) ने 4736 SEVIS रिकॉर्ड्स समाप्त किए हैं और 300 से अधिक भारतीय छात्र वीजा रद्द किए गए हैं, जिससे भारतीय छात्रों में चिंता और अनिश्चितता का माहौल बढ़ गया है। यह स्थिति उन हजारों भारतीय परिवारों के लिए गंभीर चिंता का विषय। है जो अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका भेजते हैं।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि भारत किसी भी यात्रा प्रतिबंध सूची में शामिल नहीं हुआ है। हालांकि, अमेरिका ने भारतीयों के लिए कड़ी स्क्रीनिंग और निरंतर निगरानी का दायरा बढ़ा दिया है। विशेष रूप से, अमेरिका ने H-1B और H-4 वीजा स्टैम्पिंग में भारत में जांच बढ़ा दी है। इसके साथ ही, ऑनलाइन और सोशल मीडिया रिव्यू का दायरा भी बढ़ाया गया है, जिसका अर्थ है कि वीजा आवेदकों और धारकों की पृष्ठभूमि की अधिक गहनता से जांच की जा रही है। यह बढ़ी हुई निगरानी यह सुनिश्चित करने के लिए है कि केवल वे व्यक्ति ही अमेरिका में प्रवेश करें जो सभी नियमों और शर्तों का पालन करते हैं और देश के लिए कोई सुरक्षा जोखिम पैदा नहीं करते हैं।
वैश्विक वीजा समीक्षा पहल
अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने अगस्त 2025 तक लगभग 55 मिलियन विदेशी नागरिकों के वीजा की समीक्षा करने की घोषणा की है। यह एक विशाल पहल है जो दुनिया भर के लाखों वीजा धारकों और आवेदकों को प्रभावित करेगी। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बार-बार यह स्पष्ट किया है। कि अमेरिकी वीजा एक अधिकार नहीं, बल्कि एक विशेषाधिकार है। यह बयान अमेरिकी सरकार की संप्रभुता और उसके वीजा जारी करने के विवेक को रेखांकित करता है। इसका मतलब है कि वीजा प्राप्त करने वाले व्यक्तियों को यह समझना होगा कि उन्हें अमेरिका में रहने और काम करने की अनुमति सशर्त है और किसी भी समय रद्द की जा सकती है यदि वे नियमों का पालन नहीं करते हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी और भविष्य की चुनौतियां
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स को अब अपने वीजा नियमों का पालन बेहद सतर्कता से करना होगा। किसी भी नियम उल्लंघन की भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है, जिसमें वीजा रद्द होना और देश से डिपोर्ट किया जाना शामिल है। अमेरिका की कड़ी नीति ने वीजा धारकों के लिए नए दौर की चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। उन्हें न केवल इमिग्रेशन कानूनों का सख्ती से पालन करना होगा, बल्कि अमेरिकी समाज के कानूनों और मानदंडों का भी सम्मान करना होगा। यह स्थिति भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए एक महत्वपूर्ण अनुस्मारक है कि उन्हें अमेरिका में अपने प्रवास के दौरान अत्यधिक सावधानी और जिम्मेदारी दिखानी होगी और भविष्य में, वीजा आवेदन प्रक्रिया और भी जटिल हो सकती है, और आवेदकों को अधिक गहन जांच के लिए तैयार रहना होगा।
अमेरिका की यह सख्त वीजा नीति वैश्विक इमिग्रेशन परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती है, और इसका असर आने वाले समय में भी महसूस किया जाता रहेगा। भारतीय समुदाय को इन परिवर्तनों के प्रति जागरूक रहना होगा और तदनुसार अपनी योजनाओं को समायोजित करना होगा।