इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में स्थित एरबिल में एक सैन्य ठिकाने पर हुए ड्रोन हमले में फ्रांस के एक सैनिक की मौत हो गई है, जबकि छह अन्य सैनिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह घटना उस समय हुई जब फ्रांसीसी सैनिक अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी गठबंधन के तहत इराकी सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण प्रदान कर रहे थे। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने आधिकारिक तौर पर इस हमले और इसमें हुए नुकसान की पुष्टि की है। मध्य पूर्व में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच इस हमले को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
हमले का विवरण और हताहतों की संख्या
अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हमला एरबिल शहर से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित 'माला कारा' (Mala Qara) सैन्य बेस पर हुआ। हमले में दो ड्रोनों का उपयोग किया गया था, जिन्हें सीधे सैन्य ठिकाने पर गिराया गया और इस विस्फोट की चपेट में आने से एक फ्रांसीसी सैनिक ने अपनी जान गंवा दी, जबकि छह अन्य सैनिकों को गंभीर चोटें आई हैं। घायल सैनिकों को तत्काल नजदीकी चिकित्सा केंद्र में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। एरबिल के गवर्नर ने पुष्टि की है कि हमला सुनियोजित था और इसका उद्देश्य प्रशिक्षण गतिविधियों को बाधित करना था।
राष्ट्रपति मैक्रों और फ्रांसीसी सेना का आधिकारिक बयान
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोशल मीडिया और आधिकारिक माध्यमों से इस घटना पर दुख व्यक्त किया है और उन्होंने बताया कि फ्रांसीसी सैनिक इराक की स्थिरता और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करने के लिए वहां तैनात थे। फ्रांसीसी सेना के जनरल स्टाफ ने गुरुवार को एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि उनके सैनिक इराकी सहयोगियों के साथ नियमित आतंकवाद-रोधी प्रशिक्षण अभ्यास में व्यस्त थे, तभी उन पर ड्रोन से हमला किया गया। सेना ने यह भी कहा कि वे अपने घायल सैनिकों को सर्वोत्तम चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहे हैं।
एरबिल में सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने का सामरिक कारण
एरबिल का क्षेत्र सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां कई देशों के सैनिक तैनात हैं। ये सैनिक मुख्य रूप से कुर्द सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण और रसद सहायता प्रदान करते हैं। यह मिशन अमेरिका के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी गठबंधन का एक प्रमुख हिस्सा है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, एरबिल में अंतरराष्ट्रीय बलों की मौजूदगी के कारण यह क्षेत्र अक्सर ईरान समर्थित समूहों के निशाने पर रहता है और हाल के दिनों में इस क्षेत्र में ड्रोन हमलों की आवृत्ति बढ़ी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय गठबंधन की सुरक्षा चिंताओं में इजाफा हुआ है।
क्षेत्र में बढ़ता तनाव और अंतरराष्ट्रीय गठबंधन की स्थिति
मध्य पूर्व में पिछले कुछ हफ्तों से स्थिति अस्थिर बनी हुई है। ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष ने पूरे क्षेत्र को युद्ध की कगार पर खड़ा कर दिया है और इस हमले से पहले एरबिल में ही इटली के एक सैन्य बेस को भी ड्रोन के जरिए निशाना बनाया गया था, हालांकि उस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ था। ईरान समर्थित गुटों पर इन हमलों का आरोप लगाया जा रहा है, जो क्षेत्र में विदेशी सैन्य उपस्थिति का विरोध करते रहे हैं। फ्रांस की सरकार ने स्पष्ट किया है कि वे इस हमले के बाद अपनी सुरक्षा नीतियों की समीक्षा कर रहे हैं, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ उनका मिशन जारी रहेगा।
