ममता बनर्जी के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश से सरकार का इनकार, तुषार मेहता ने बताई वजह

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सरकार ममता बनर्जी के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश नहीं करना चाहती ताकि इसे राजनीतिक मुद्दा न बनाया जा सके। यह मामला आई-पेक पर ईडी की छापेमारी में हस्तक्षेप से जुड़ा है।

केंद्र सरकार ने ममता बनर्जी के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश करने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि सरकार इस मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश नहीं करना चाहती क्योंकि इससे यह एक राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान आई-पेक (I-PAC) पर हुई प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी और उसमें कथित हस्तक्षेप से जुड़ा हुआ है।

राजनीतिक विवाद से बचने की दलील

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के समक्ष अपनी दलीलें पेश करते हुए कहा कि अगर सरकार अब इस जांच की सिफारिश करती है, तो समाज में यह संदेश जाएगा कि सरकार बदलने के बाद राजनीतिक प्रतिशोध के तहत ममता बनर्जी के खिलाफ सीबीआई जांच बिठाई गई है। मेहता ने कहा, "मैं इस जाल में नहीं फंसना चाहता कि राज्य में सरकार बदलने के बाद जांच सीबीआई को सौंप दी गई। " उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से आग्रह किया कि वह इस मामले के गुणों (मेरिट) को देखकर अपना फैसला सुनाए और मेहता ने कोर्ट से यह भी कहा कि आप इसे बड़े मामलों की तरह देखिए और सरकार पर आरोप लगने की स्थिति पैदा न होने दें।

अदालत में हुई बहस और जजों की टिप्पणी

इस मामले की सुनवाई जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारी की बेंच कर रही थी। सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने सरकार के रुख पर सवाल उठाए। गुरुस्वामी ने कहा कि अब तो सरकार बदल गई है, तो आप पूरे मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश क्यों नहीं करते? उन्होंने तर्क दिया कि अब यह आसानी से किया जा सकता है। सुनवाई कर रही बेंच ने भी इस बात पर अपनी सहमति जताई। हालांकि, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने एक महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु उठाया। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय को यह तय करना होगा कि क्या सीबीआई किसी मौजूदा मुख्यमंत्री द्वारा अपराध किए जाने की स्थिति में जांच कर सकती है।

क्या है पूरा मामला और आई-पेक रेड का सच

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दाखिल की है, जिसमें ममता बनर्जी और बंगाल के कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और सीबीआई से जांच कराने की मांग की गई है। यह मामला 8 जनवरी 2026 को हुई एक घटना से जुड़ा है। ईडी का आरोप है कि उस दिन जब उनकी टीम ने आई-पेक और उसके संस्थापकों के ठिकानों पर छापेमारी की थी, तब ममता बनर्जी ने सरकारी काम में दखल दिया था। याचिका के अनुसार, ममता बनर्जी उस वक्त बंगाल की मुख्यमंत्री थीं और उनके इशारे पर पुलिस अधिकारियों ने ईडी को अपना काम नहीं करने दिया। 8 जनवरी 2026 को ममता बनर्जी पहले आई-पेक के कोफाउंडर प्रतीक जैन के घर पहुंचीं और फिर वहां से साल्ट लेक स्थित ऑफिस गईं। ममता का आरोप था कि बीजेपी के कहने पर ईडी अधिकारी चुनाव से संबंधित दस्तावेज लेने आए थे। उस दौरान ममता बनर्जी को प्रतीक जैन के घर से कुछ कागजात लेकर निकलते हुए भी देखा गया था।

अगली सुनवाई और वरिष्ठ वकीलों की मौजूदगी

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई तत्काल आदेश जारी नहीं किया है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 2 सितंबर की तारीख तय की है। आगामी सुनवाई में ममता बनर्जी की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और वरिष्ठ वकील श्याम दीवान भी शामिल होंगे। ईडी अपनी इस मांग पर अड़ी है कि मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए ममता बनर्जी ने जांच एजेंसी के काम में बाधा डाली, इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच सीबीआई से होनी चाहिए। अब 2 सितंबर को होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है।