इंडिया ब्लॉक का प्रदर्शन: राहुल और प्रियंका गांधी का चुनाव आयोग के खिलाफ मार्च, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में गड़बड़ी के खिलाफ दिल्ली में बड़ा मार्च निकाला। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को हिरासत में लेने के बाद रिहा किया गया।

दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में मंगलवार, 6 अक्टूबर को भारी गहमागहमी देखने को मिली जब 'इंडिया' ब्लॉक के नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने संसद भवन से चुनाव आयोग मुख्यालय तक एक विशाल मार्च निकाला। इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य कारण मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल हैं। इस मार्च में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव सहित 19 विपक्षी दलों के दिग्गज नेता शामिल हुए।

संसद से सड़क तक संग्राम

विरोध प्रदर्शन की शुरुआत सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर हुई जब विपक्षी सांसद संसद भवन के मकर द्वार पर एकत्रित हुए। यहां से सभी नेताओं ने चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर कूच किया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में 'सेव माय वोट' लिखे स्लोगन और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले पोस्टर थे। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

राहुल गांधी का बैरिकेड पर चढ़ना और तिरंगा फहराना

मार्च के दौरान जब पुलिस ने विपक्षी सांसदों को आगे बढ़ने से रोका, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कई स्तरों की बैरिकेडिंग की थी। इस बीच राहुल गांधी बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और वहां तिरंगा फहराया और इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प भी हुई। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त को संबोधित किया और लिखा, "ज्ञानेश, इट्स डन, ब्रो।

हिरासत और रिहाई का घटनाक्रम

प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया। हालांकि, कुछ देर बाद ही उन्हें रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और दीपेंद्र हुड्डा आकाशवाणी भवन के अंदर दाखिल हुए। विपक्षी नेता लगातार चुनाव आयोग के दफ्तर तक पहुंचने की कोशिश करते रहे और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

विपक्ष के इस बड़े प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए थे। नई दिल्ली जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 3000 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। सुरक्षा बलों की कुल 31 कंपनियां तैनात की गई थीं, जिनमें 27 पुरुष कंपनियां और 4 महिला कंपनियां शामिल थीं। एक कंपनी में आमतौर पर 100 से 115 जवान होते हैं। संसद मार्ग, चुनाव आयोग कार्यालय और जंतर-मंतर जैसे संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल की मौजूदगी रही।

19 दलों की एकजुटता और कुछ की दूरी

इस 'सेव डेमोक्रेसी मार्च' में कुल 19 विपक्षी दल शामिल हुए। इनमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी (शरद चंद्र पवार), शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और राष्ट्रीय जनता दल जैसी प्रमुख पार्टियां शामिल थीं। वामपंथी दलों में सीपीएम, सीपीआई, सीपीआई-एमएल, आरएसपी और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। जम्मू-कश्मीर से नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के नेता भी पहुंचे। अन्य सहयोगी दलों में जेएमएम, आईयूएमएल, केरल कांग्रेस (एम), केरल कांग्रेस (जे), एमडीएमके और वीसीके शामिल रहे। हालांकि, आम आदमी पार्टी (AAP) और डीएमके ने इस मार्च से दूरी बनाए रखी। आम आदमी पार्टी का कहना था कि वह अपनी लड़ाई खुद लड़ रही है।

आगामी विरोध प्रदर्शनों की रूपरेखा

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस आंदोलन के भविष्य के कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह मार्च कथित 'वोट चोरी' के खिलाफ इंडिया ब्लॉक के नियोजित कार्यक्रमों का हिस्सा है। 8 अक्टूबर तक गठबंधन की पार्टियां जिला स्तर पर पदयात्राएं और बैठकें आयोजित करेंगी। इसके बाद 10 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक ब्लॉक स्तर पर बैठकें होंगी। 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक राज्य और जिला स्तर के साथ-साथ हर गांव में चौपालों के माध्यम से 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैलियां निकाली जाएंगी। इस पूरे अभियान का लक्ष्य उन 13 करोड़ 50 लाख मतदाताओं की जानकारी जुटाना है, जिनके नाम कथित तौर पर मतदाता सूची से गायब हैं।