- भारत,
- 25-Jan-2026 09:08 AM IST
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन शनिवार को नई दिल्ली पहुंच गई हैं, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया और उनकी यह यात्रा केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं है, बल्कि इसे दुनिया के सबसे बड़े मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। विशेष बात यह है कि उर्सुला वॉन डेर लेयेन इस बार भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी।
ऐतिहासिक स्वागत और गणतंत्र दिवस की तैयारी
केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने हवाई अड्डे पर उर्सुला वॉन डेर लेयेन की आगवानी की। यह यात्रा भारत और यूरोपीय संघ के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक है। उर्सुला के साथ यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सांतोस दा कोस्टा भी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। यह इतिहास में पहली बार हो रहा है जब यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेता एक साथ गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होंगे। 25 से 27 जनवरी तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान कई उच्च स्तरीय बैठकें निर्धारित हैं।ट्रंप की टैरिफ नीतियों के बीच भारत का बड़ा दांव
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ा संदेश है और ट्रंप प्रशासन द्वारा भारतीय उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाने की धमकियों के बीच, भारत ने यूरोप के साथ अपने व्यापारिक गठबंधन को मजबूत करने का फैसला किया है। यदि भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह 'मदर ऑफ ऑल डील्स' सफल होती है, तो यह वैश्विक व्यापार संतुलन को बदल कर रख देगी। यह समझौता न केवल व्यापार बल्कि भू-राजनीतिक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।FTA: दुनिया का सबसे बड़ा व्यापार समझौता
इस यात्रा का मुख्य आकर्षण 16वां भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन है। इस दौरान मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत को अंतिम रूप देने की कोशिश की जाएगी। इस समझौते से भारतीय कपड़ा, कृषि उत्पाद और आईटी सेवाओं को यूरोपीय बाजार में सीधी और आसान पहुंच मिलेगी। वहीं, यूरोप को भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार का लाभ मिलेगा। यह डील दोनों क्षेत्रों के बीच टैरिफ बाधाओं को कम करने और निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की जा रही है।रक्षा और तकनीक पर भी होगी चर्चा
व्यापार के अलावा, दोनों पक्ष जलवायु परिवर्तन, डिजिटल अर्थव्यवस्था, रक्षा और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा करेंगे। भारत सरकार ने इस यात्रा को साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की पुष्टि बताया है और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते भारत के लिए यूरोपीय तकनीक और निवेश काफी मददगार साबित हो सकते हैं।वैश्विक छवि और भविष्य की राह
गणतंत्र दिवस पर राजपथ पर यूरोपीय नेताओं की मौजूदगी भारत की बढ़ती वैश्विक साख को दर्शाती है। यह दौरा न केवल व्यापारिक लाभ के लिए है, बल्कि यह चीन और अमेरिका जैसे बड़े खिलाड़ियों के बीच भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का भी प्रमाण है। आने वाले तीन दिन भारत और यूरोप के भविष्य के रिश्तों की दिशा तय। करेंगे, जिससे करोड़ों लोगों के लिए रोजगार और विकास के नए अवसर पैदा होंगे।Charting the next phase of the India–EU Strategic partnership.
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) January 24, 2026
A warm welcome to the President of the European Commission Ursula von der Leyen @vonderleyen, on her State Visit to India. Received by Minister of State for Commerce and Industry; and Electronics and Information… pic.twitter.com/HR9d7XLdYE
