भारत में पेट्रोल डीजल की कीमतों में दुनिया के मुकाबले कम बढ़ोतरी, देखें पूरी लिस्ट

वैश्विक तेल संकट और ईरान तनाव के बीच भारत ने अपनी रणनीतिक नीतियों के जरिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखने में सफलता हासिल की है। दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल के बावजूद भारत में यह बढ़ोतरी वैश्विक औसत से काफी कम रही है, जिससे आम जनता को बड़ी राहत मिली है।

जब ईरान संकट और वैश्विक तनावों के कारण दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ उछाल आया, तब भारत ने कच्चे तेल के अपने आयात स्रोतों जैसे रूस से रियायती दरों पर क्रूड ऑयल खरीदना और डोमेस्टिक टैक्स एडजस्टमेंट्स के जरिए रिटेल कीमतों को काफी हद तक स्थिर रखा। सरकार और तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने मिलकर अंतरराष्ट्रीय तेल की उतार-चढ़ाव भरी कीमतों के झटके को सीधे आम जनता की जेब पर ट्रांसफर होने से रोका।

भारत में हालिया कीमतों में बदलाव

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें 25 मई को 11 दिनों में चौथी बार बढ़ीं। इस दौरान देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत में 7 रुपये 35 पैसे और डीजल के दाम में 7 रुपये 53 पैसे प्रति लीटर का इजाफा देखने को मिला। इसका मतलब है कि इस दौरान पेट्रोल में 7 पॉइंट 7 प्रतिशत और डीजल की कीमत में 8 पॉइंट 6 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी देखने को मिली। अगर इस बढ़ोतरी की तुलना दुनिया के बाकी देशों से करें तो यह काफी कम है। खाड़ी देशों को छोड़ दिया जाए तो दुनिया के बाकी बड़े और छोटे देशों के मुकाबले में भारत में फ्यूल की कीमत में काफी कम इजाफा किया गया है।

बढ़ोतरी के पीछे के वैश्विक कारण

28 फरवरी 2026 को ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर देने से वैश्विक तेल बाजारों में कीमतों में तेजी से उछाल आया। ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। दुनिया की हर बड़ी तेल-आयात करने वाली इकोनॉमी के सामने एक ही विकल्प था कि या तो बढ़ी हुई कॉस्ट का बोझ सरकारी खजाने पर डालें, या फिर इसे पंप के माध्यम से कंज्यूमर्स पर डाल दें। ज़्यादातर देशों ने बढ़ी हुई कॉस्ट का बोझ कंज्यूमर्स पर ही डाला। भारत ने ऐसा तुरंत नहीं किया। 28 फरवरी से 15 मई तक, यानी 78 दिनों तक, सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई खास बदलाव नहीं किया। ऑयल मार्केटिंग कंपनियां रोजाना लगभग 1000 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही थीं। मई के मध्य में जाकर ही, चार चरणों में हुई बढ़ोतरी—15, 19, 23 और 25 तारीख को—ने इस घाटे को कुछ हद तक कम करना शुरू किया।

दुनिया के बाकी देशों से तुलना

भारत में पेट्रोल की कीमतों में हुई 7 पॉइंट 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी जापान की 9 पॉइंट 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी से कम है। यह हर यूरोपीय अर्थव्यवस्था और हर दक्षिण एशियाई पड़ोसी देश से कम है और अमेरिका में यह बढ़ोतरी 44 पॉइंट 5 प्रतिशत रही। म्यांमार ने पंप की कीमतों में लगभग 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी की और पाकिस्तान ने 55 प्रतिशत की। वैश्विक औसत बढ़ोतरी 22 पॉइंट 4 प्रतिशत है, जो भारत के आंकड़े से लगभग तीन गुना ज्यादा है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत बढ़ोतरी के बाद भी 102 रुपये 10 पैसे प्रति लीटर है, जो दुनिया की उन सभी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम है जो पेट्रोल पर सब्सिडी नहीं देतीं। हर बड़ी विकसित इकोनॉमी में अब पेट्रोल 150 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा कीमत पर बिक रहा है और यूरोपीय संघ का औसत 179 रुपये है। पाकिस्तान और नेपाल जैसे पड़ोसी देश भी 135 रुपये का आंकड़ा पार कर चुके हैं।

राज्यों में कीमतों का अंतर और VAT का प्रभाव

पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी हर राज्य में एक जैसी होती है, लेकिन वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) हर राज्य सरकार अपनी तरफ से अलग-अलग लगाती है और पेट्रोल पंप की कीमतों में ज़्यादातर अंतर इसी वजह से आता है। तेलंगाना में पेट्रोल 118 रुपये 30 पैसे प्रति लीटर बिकता है, केरल में 114 रुपये 90 पैसे, और कर्नाटक में 110 रुपये 30 पैसे। दूसरी तरफ, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात और हरियाणा में यह 102 रुपये 10 पैसे या उससे कम कीमत पर है। डीजल पर यह अंतर और भी ज्यादा है। तेलंगाना में डीजल की कीमत 106 रुपये 70 पैसे प्रति लीटर है, जबकि हरियाणा में यह 90 रुपये 50 पैसे है। यह 16 रुपये का अंतर हर दिन ट्रक ड्राइवरों और किसानों को प्रभावित करता है। जब 27 मार्च 2026 को केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी, तो कुछ राज्यों ने इसका पूरा फ़ायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचाया, जबकि कुछ ने VAT में कोई बदलाव नहीं किया।

ऐतिहासिक संदर्भ और सरकारी खजाने पर बोझ

मई 2026 में हुई बढ़ोतरी को पिछले चार सालों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। रूस-यूक्रेन वॉर और होर्मुज संकट के बीच सरकार ने खुदरा कीमतें चार बार कम कीं। रूस-यूक्रेन वॉर के दौरान भारत G20 देशों में अकेली ऐसी इकोनॉमी थी जिसने पंप की कीमतें कम कीं। नवंबर 2021 और मई 2022 में एक्साइज ड्यूटी में कटौती करके पेट्रोल की कीमत 18 रुपये और डीजल की कीमत 16 रुपये कम की गई थी। होर्मुज संकट के समय 27 मार्च 2026 को पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये की कटौती की गई, जिससे डीजल पर उत्पाद शुल्क शून्य हो गया। सरकार ने राजस्व में हुई लगभग 30000 करोड़ रुपये की कमी का बोझ खुद उठाया। 34 लाख करोड़ रुपये और उस पर हज़ारों करोड़ रुपये का ब्याज शामिल है। मौजूदा सरकार इन देनदारियों का भुगतान पारदर्शी तरीके से कर रही है बिना भविष्य के करदाताओं पर बोझ डाले।