केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने राजस्व अनुमानों में महत्वपूर्ण वृद्धि की संभावना जताई है। 16 लाख करोड़ प्राप्त होने की उम्मीद है। 75% अधिक है। यह वृद्धि सरकार के गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue) ढांचे को सुदृढ़ करने में एक महत्वपूर्ण कारक मानी जा रही है।
05 लाख करोड़ मिलने की उम्मीद है। 56 लाख करोड़ निर्धारित किया गया था, जिसे अब संशोधित कर बढ़ा दिया गया है। इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और अन्य निवेशों से मिलने वाला लाभांश ₹75,000 करोड़ रहने का अनुमान है, जो पिछले बजट के ₹71,000 करोड़ के लक्ष्य से अधिक है।
गैर-कर राजस्व का ढांचा और महत्व
केंद्रीय बजट के राजस्व ढांचे में सरकारी प्राप्तियों को मुख्य रूप से कर राजस्व और गैर-कर राजस्व में विभाजित किया जाता है। कर राजस्व, जिसमें आयकर, निगम कर, जीएसटी, सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क शामिल हैं, कुल राजस्व का लगभग 80% हिस्सा होता है। हालांकि, गैर-कर राजस्व एक महत्वपूर्ण आवर्ती आय स्रोत है जो सरकार कराधान के अलावा अन्य गतिविधियों से अर्जित करती है। इसमें ऋणों पर प्राप्त ब्याज, लाइसेंस शुल्क, स्पेक्ट्रम नीलामी, और सरकारी उद्यमों व आरबीआई से प्राप्त लाभ शामिल होते हैं।
आरबीआई डिविडेंड में ऐतिहासिक वृद्धि के आंकड़े
पिछले कुछ वर्षों में आरबीआई से प्राप्त होने वाले लाभांश में उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव और वृद्धि देखी गई है और आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2022 में जहां यह राशि ₹30,307 करोड़ थी, वहीं वित्त वर्ष 2025 में यह बढ़कर ₹2,68,590 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। वित्त वर्ष 2024 में यह ₹2,10,874 करोड़ और वित्त वर्ष 2023 में ₹87,416 करोड़ रही थी। विश्लेषकों के अनुसार, आरबीआई के निवेश पोर्टफोलियो, विशेष रूप से विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों और सरकारी प्रतिभूतियों पर प्राप्त मजबूत अधिशेष आय ने इस वृद्धि में मुख्य भूमिका निभाई है।
राजकोषीय घाटे के प्रबंधन में रणनीतिक भूमिका
गैर-कर राजस्व का यह बढ़ा हुआ हिस्सा सरकार के राजकोषीय गणित को संतुलित करने में रणनीतिक भूमिका निभाता है। जब आरबीआई और बैंकों से प्राप्त लाभांश अधिक होता है, तो सरकार पर करों के माध्यम से राजस्व जुटाने या बाजार से अधिक ऋण लेने का दबाव कम हो जाता है। इससे राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को निर्धारित लक्ष्यों के भीतर रखने में मदद मिलती है। उदाहरण के लिए, वित्त वर्ष 2025 के दौरान आरबीआई द्वारा किए गए रिकॉर्ड हस्तांतरण ने सरकार को अतिरिक्त राजकोषीय गुंजाइश प्रदान की थी, जिससे बुनियादी ढांचे के विकास और अन्य सामाजिक योजनाओं के लिए धन की उपलब्धता सुनिश्चित हुई।
विश्लेषणात्मक परिप्रेक्ष्य और निष्कर्ष
आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, लाभांश प्राप्तियों में यह निरंतर वृद्धि बैंकिंग क्षेत्र की बेहतर लाभप्रदता और आरबीआई के कुशल परिसंपत्ति प्रबंधन का परिणाम है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बैलेंस शीट में सुधार और एनपीए में कमी ने भी लाभांश भुगतान की क्षमता को बढ़ाया है। 16 लाख करोड़ का यह लक्ष्य सरकार की वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने और विकास कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। यह गैर-कर राजस्व की बढ़ती निर्भरता और महत्व को भी रेखांकित करता है।
