बड़ा खुलासा: भारत-US ट्रेड डील पर लगेगी मुहर, ट्रंप और रुबियो के बयानों से मची हलचल!

भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही ट्रेड डील अब अंतिम दौर में पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिए हैं कि कुछ ही हफ्तों में इस ऐतिहासिक समझौते पर मुहर लग सकती है।

नई दिल्ली से लेकर वाशिंगटन तक पिछले काफी वक्त से जिस व्यापार समझौते का इंतजार किया जा रहा था, अब उस पर एक बेहद बड़ी और अहम खबर सामने आई है। भारत के दो दिवसीय दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बड़े संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील अब से कुछ ही हफ्तों में पूरी हो सकती है। वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस समझौते पर जल्द से जल्द मुहर लगने की अपनी उम्मीद खुलकर जताई है। दुनिया के इन दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों के शीर्ष नेताओं के बयानों से यह बात बिल्कुल साफ हो गई है कि वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच लंबे वक्त से चला आ रहा व्यापारिक गतिरोध अब पूरी तरह से खत्म होने की कगार पर पहुंच चुका है। वर्तमान स्थिति यह है कि अब दोनों देशों का पूरा ध्यान केवल और केवल इसकी तकनीकी बारीकियों को आपस में बैठकर सुलझाने पर केंद्रित है।

व्हाइट हाउस से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संबंध में एक बहुत बड़ा और स्पष्ट बयान दिया है। मंगलवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इस संभावित व्यापार समझौते की संभावनाओं और उसकी प्रगति पर सीधा सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। प्रतिष्ठित समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि भारत इस समझौते को करना चाहता है और अमेरिका भी इस डील को करने जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि दोनों ही देश इस समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने बिना ज्यादा अंदरूनी तकनीकी जानकारी साझा किए यह भी कहा कि यह समझौता अपने आप में एक काफी अलग तरह की डील साबित हो सकता है। आपको बता दें कि पिछले एक साल से ज्यादा समय से इस महत्वपूर्ण बातचीत को लेकर दोनों देशों के प्रशासनिक अधिकारियों में काफी उत्साह और सक्रियता देखी जा रही है।

इस पूरी प्रक्रिया को जमीन पर आगे बढ़ाने में भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर की भी अहम भूमिका रही है। राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित हुए ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के दौरान दुनिया के सामने यह बात रखी थी कि इस ट्रेड डील से जुड़े हुए बड़े और जटिल मुद्दे पूरी तरह से सुलझाए जा चुके हैं। उनके आधिकारिक बयान के मुताबिक, दोनों देश अब इस समझौते को अंतिम रूप देने के बहुत ही करीब आ चुके हैं। इसके साथ ही, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी दोनों पक्षों के बीच चल रही इस बातचीत की प्रगति पर अपना गहरा उत्साह जताया है। विदेश मंत्री जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि अब दोनों ही पक्ष पूरी मजबूती के साथ अंतिम और निर्णायक नतीजे की तरफ आगे बढ़ रहे हैं।

महीनों का इंतजार खत्म, अब कुछ ही हफ्तों में बनेगी बात

अपने दो दिवसीय महत्वपूर्ण भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नेटवर्क18 को दिए गए एक विशेष इंटरव्यू में भी इस ट्रेड डील पर खुलकर बात की। मार्को रुबियो ने पूरी दृढ़ता के साथ यह भरोसा जताया कि भारत और अमेरिका दोनों देश अब इस व्यापार समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। उन्होंने बिल्कुल साफ शब्दों में यह स्पष्ट किया कि वाशिंगटन को यह पूरी उम्मीद है कि अब यह समझौता महीनों का लंबा वक्त नहीं लेगा, बल्कि अब यह प्रक्रिया महज कुछ ही हफ्तों के भीतर पूरी तरह से संपन्न हो जाएगी। हालांकि, मार्को रुबियो ने यह भी साफ किया कि वह खुद व्यक्तिगत रूप से सीधे तौर पर इस समझौते की औपचारिक बातचीत में शामिल नहीं हैं, क्योंकि यह पूरी संवेदनशील प्रक्रिया अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि यानी यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव द्वारा संभाली जा रही है। इसके बावजूद, वह इस पूरी बातचीत की प्रगति और हर एक गतिविधि पर बहुत ही करीब से अपनी नजर बनाए हुए हैं।

समझौते के हर शब्द और भाषा पर सहमति बनना क्यों है जरूरी

मार्को रुबियो के अनुसार, इस समय बातचीत का पूरा का पूरा फोकस कुछ बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं को आपस में बैठकर सुलझाने पर टिका हुआ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समझौते के आधिकारिक ऐलान से पहले यह अत्यंत आवश्यक है कि इस डील के हर एक प्रावधान की भाषा को दोनों पक्षों द्वारा बहुत ही अच्छी तरह से समझा जाए और उस पर पूरी सहमति बनाई जाए। रुबियो का मानना है कि कूटनीतिक और व्यापारिक समझौतों में तकनीकी बारीकियां बहुत ज्यादा मायने रखती हैं। दोनों ही देशों को इस बात पर पूरी तरह से सहमत होना होगा कि डील के दस्तावेजों में लिखी गई भाषा का मतलब दोनों पक्षों के लिए बिल्कुल एक ही निकले। फिलहाल द्विपक्षीय बातचीत इस समय ठीक इसी अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्तर पर पहुंच चुकी है।

टैरिफ दरों में राहत मिलने की कितनी है उम्मीद और क्या हैं आर्थिक हित

जब मार्को रुबियो से मीडिया द्वारा यह सवाल पूछा गया कि क्या भारत को इस ट्रेड डील के तहत दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले कुछ बेहतर टैरिफ रेट मिल सकते हैं, तो उन्होंने इसका बहुत ही व्यावहारिक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी भी व्यापार समझौते का मूल उद्देश्य हमेशा से यही होता है कि मौजूदा व्यापारिक शर्तों से कहीं अधिक बेहतर शर्तें हासिल की जाएं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि इस तरह की डील करने का सीधा और स्पष्ट उद्देश्य यह होता है कि अभी जो बाजार में दरें चल रही हैं, उनसे बेहतर और अनुकूल रेट हासिल किए जा सकें। मार्को रुबियो ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि इस समझौते को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए यह अनिवार्य है कि यह दोनों देशों के सर्वोच्च आर्थिक हितों को पूरी तरह से संतुष्ट करे।

उन्होंने यह भी पूरी ईमानदारी से माना कि दूसरे संप्रभु देशों की तरह भारत भी इस बातचीत के दौरान अपने राष्ट्रीय हितों का पूरा ध्यान रखेगा और उन्हें प्राथमिकता देगा, लेकिन दोनों देशों के बीच के गहरे आपसी रिश्ते इन सभी मतभेदों को आसानी से पाटने में बहुत मदद करेंगे। मार्को रुबियो ने अपने विचार रखते हुए कहा कि जब आप एक-दूसरे के सच्चे दोस्त और सामरिक सहयोगी होते हैं और आप में बहुत सारी समानताएं होती हैं, तो इससे किसी भी प्रकार के मतभेदों को दूर करने और दोनों देशों के लिए समान रूप से फायदेमंद रास्ता निकालने में बहुत बड़ी मदद मिलती है और इस प्रकार, आने वाले कुछ हफ्तों में यह व्यापार समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को एक बिल्कुल नई और ऊंची दिशा देने के लिए पूरी तरह से तैयार दिखाई दे रहा है।