भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की तरफ से एक बहुत ही बड़ा और महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को राजधानी दिल्ली में आयोजित भारत के औद्योगिक बदलाव पर चौथे आईएसआईडी आईडीआरए (ISID-IDRA) राष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लिया और अपने संबोधन के दौरान यह स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता पूरा होने के बाद भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक मजबूत प्रतिस्पर्धी बढ़त मिलेगी और उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि व्यापार का असली आधार और पैमाना यही होता है कि आखिरकार कोई देश किन विशिष्ट उत्पादों और सेवाओं में दूसरे देशों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता रखता है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए देश के अब तक के व्यापार समझौतों का जिक्र किया और बताया कि भारत अब तक कुल आठ (8) मुक्त व्यापार समझौते यानी एफटीए (FTA) सफलतापूर्वक कर चुका है। उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि इन सभी समझौतों की पूरी जानकारी सार्वजनिक होने के बाद उन्हें आज तक ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं मिला है, जो इनमें किसी भी प्रकार की कोई बड़ी खामी या फिर कोई गंभीर त्रुटि निकाल सके। मंत्री ने यह भी विशेष रूप से उल्लेख किया कि अमेरिका के साथ जो 9वां यानी नौवां प्रस्तावित समझौता होने जा रहा है, उसे कुछ राजनीतिक लोग और तत्व बेवजह राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि इस समझौते की पूरी और विस्तृत जानकारी अभी तक आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं की गई है। इसके बावजूद उन्होंने देशवासियों के सामने पूरा भरोसा जताया है कि जब इस समझौते की सभी शर्तें और प्रावधान सबके सामने आएंगे, तो देश के आम नागरिक और व्यापारी वर्ग इसका तहेदिल से स्वागत करेंगे।
अंतिम चरण में है भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड डील
वर्तमान समय में भारत और अमेरिका के बीच इस महत्वपूर्ण व्यापार समझौते को आधिकारिक तौर पर अंतिम रूप देने के लिए कूटनीतिक और आर्थिक स्तर पर लगातार बातचीत जारी है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाल ही में भारत की राजधानी मुंबई की अपनी यात्रा के दौरान देश के विदेश मंत्री एस जयशंकर से एक उच्च स्तरीय मुलाकात की थी और उस मुलाकात के बाद उन्होंने मीडिया के सामने यह बयान दिया था कि दोनों देश इस व्यापार समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। उनके आकलन के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में अब केवल कुछ ही छोटे-मोटे मुद्दों पर बातचीत बाकी रह गई है और उन्हें पूरी उम्मीद है कि इन बचे हुए बिंदुओं को भी बहुत जल्द आपसी सहमति से सुलझा लिया जाएगा।
दूसरी तरफ, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी पिछले सप्ताह एक बयान देते हुए यह बात साफ की थी कि इस प्रस्तावित समझौते का पहला चरण अब अपने अंतिम दौर में प्रवेश कर चुका है। उनके अनुसार, व्यापार समझौते से जुड़े हुए ज्यादातर बड़े और जटिल मुद्दों पर आपसी चर्चा पहले ही पूरी हो चुकी है और अब दोनों देशों के अधिकारी बैठकर केवल छोटी-छोटी शर्तों और बारीकियों को अंतिम रूप देने का काम कर रहे हैं ताकि इस डील को जमीन पर उतारा जा सके।
टैरिफ और रूसी तेल की खरीद बनी बड़ी चुनौती
हालांकि इस पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और इसे अंतिम रूप देने के मार्ग में कई तरह की अड़चनें और चुनौतियां भी लगातार सामने आती रही हैं। अमेरिका की तरफ से लगाए जाने वाले आयात शुल्क यानी इम्पोर्ट टैरिफ और दूसरी तरफ भारत की ओर से लगातार रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर दोनों देशों के बीच लंबे समय तक मतभेद बने रहे हैं। स्थिति तब और अधिक जटिल हो गई जब अगस्त 2025 में दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार बातचीत अचानक टूट गई थी और इसके परिणामस्वरुप अमेरिका ने भारत के ज्यादातर सामानों पर पचास प्रतिशत (50%) तक का भारी-भरकम शुल्क लगा दिया था। इसके बाद कूटनीतिक प्रयासों के चलते फरवरी 2026 में दोनों देशों ने आपसी सहमति जताते हुए एक नई रूपरेखा तैयार की, जिसके तहत इस शुल्क या टैरिफ की दर को घटाकर अठारह प्रतिशत (18%) पर लाया गया। हालांकि, इस बड़ी राहत के बाद भी दोनों देशों के बीच बातचीत की रफ्तार में एक बार फिर से सुस्ती आ गई और यह प्रक्रिया धीमी पड़ गई।
भारत ने रखी थी वियतनाम जैसी विनिर्माण देशों की शर्त
इसी महीने की शुरुआत में देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी सार्वजनिक रूप से इस बात को स्वीकार किया था कि इस व्यापार समझौते पर आगे बढ़ने वाली बातचीत की रफ्तार में थोड़ी रुकावट आई है और वह थम सी गई है। भारत का स्पष्ट और अडिग रुख यह रहा है कि उसके सामान पर लगाए जाने वाला अंतिम शुल्क वियतनाम जैसे अन्य प्रमुख विनिर्माण देशों पर लागू होने वाले शुल्क के आसपास ही होना चाहिए, ताकि भारतीय कंपनियां वैश्विक और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अन्य देशों के साथ निष्पक्ष और मजबूत प्रतिस्पर्धा कर सकें। मार्को रुबियो और एस जयशंकर की हालिया मुलाकात के दौरान व्यापार के अलावा ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग जैसे सामरिक विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई थी। अब देश और दुनिया भर के विशेषज्ञों की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि दोनों देश मिलकर बाकी बचे हुए अड़चनों और मुद्दों को कब तक सुलझा लेते हैं और इस बड़े व्यापार समझौते को औपचारिक रूप से अंतिम रूप देते हैं।
